
DM or SP Who is more powerful: किसी भी जिले में दो अधिकारी सबसे अधिक चर्चा में रहते हैं जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP)। आम लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि आखिर जिले में कौन ज्यादा पावरफुल होता है, डीएम या एसपी? दोनों के अधिकार, जिम्मेदारियां और सैलरी में क्या अंतर होता है? इसी भ्रम को दूर करने के लिए हम आपको DM और SP से जुड़ी पूरी जानकारी विस्तार से बता रहे हैं।
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DM और SP: दोनों जिले के सबसे बड़े अधिकारी
जिला स्तर पर डीएम और एसपी अपने-अपने विभागों के सर्वोच्च अधिकारी होते हैं। डीएम प्रशासनिक व्यवस्था की कमान संभालते हैं, जबकि एसपी जिले की पुलिस व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होते हैं। हालांकि दोनों का कार्यक्षेत्र अलग-अलग है, लेकिन समन्वय के बिना जिला प्रशासन सुचारू रूप से नहीं चल सकता।
सेवा का अंतर: IAS बनाम IPS
जिलाधिकारी (DM)
- भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी
- कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के अधीन
- नीति निर्माण, प्रशासन और योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी
पुलिस अधीक्षक (SP)
- भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी
- गृह मंत्रालय के अधीन
- पुलिस प्रशासन, अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी
- यही कारण है कि दोनों पदों की भूमिका और अधिकार क्षेत्र अलग-अलग होते हैं।
DM के अधिकार और जिम्मेदारियां
जिले में डीएम के पास व्यापक प्रशासनिक शक्तियां होती हैं
- राजस्व संग्रह (भूमि, लगान, कर आदि)
- जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखना (समन्वय की भूमिका)
- सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और निगरानी
- आपदा प्रबंधन (बाढ़, सूखा, महामारी आदि)
- भूमि विवाद, प्रमाण पत्र, प्रशासनिक आदेश
- जिले के समग्र विकास की योजना और नियंत्रण
- कुल मिलाकर डीएम जिले का प्रशासनिक मुखिया होता है।
SP के अधिकार और जिम्मेदारियां
वहीं पुलिस अधीक्षक (SP) जिले में पुलिस व्यवस्था का सर्वोच्च अधिकारी होता है।
- जिले के सभी थाने
- अपराध नियंत्रण और जांच
- कानून-व्यवस्था बनाए रखना
- अपराधियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई
- पुलिस बल का नेतृत्व और अनुशासन
- एसपी को जिले में एएसपी और डीएसपी सहयोग करते हैं।
कौन ज्यादा पावरफुल: DM या SP?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार DM और SP दोनों अपने-अपने क्षेत्र में बराबर स्तर की शक्ति रखते हैं। लेकिन कुल प्रशासनिक अधिकारों की व्यापकता को देखें तो DM को अधिक पावरफुल माना जाता है, क्योंकि उसके निर्णयों का दायरा पुलिस से आगे राजस्व, विकास, योजनाओं और प्रशासन तक फैला होता है। हालांकि कानून-व्यवस्था के मामलों में SP पूरी तरह स्वतंत्र और सर्वोच्च अधिकारी होता है।
DM और SP की सैलरी कितनी होती है?
SP (IPS) की सैलरी
- बेसिक सैलरी: लगभग ₹78,800 प्रति माह
- भत्तों (HRA, TA आदि) सहित: ₹1,10,000 से ₹1,35,000 तक
DM (IAS) की सैलरी
- बेसिक सैलरी: लगभग ₹80,000 प्रति माह
- भत्तों सहित कुल वेतन: ₹1,00,000 से अधिक
सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं
DM और SP दोनों को सरकार की ओर से
- सरकारी बंगला
- सरकारी वाहन
- ड्राइवर
- कुक, माली
- कार्यालय स्टाफ और सुरक्षा जैसी विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
Author Profile

- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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