जीवन मंत्र

  • सदर अस्पताल में अब उपलब्ध होगा ’’दीदी की रसोई’’ का स्वादिष्ट एवं पोष्टिक नास्ता एवं खाना
    सदर अस्पताल में अब उपलब्ध होगा ’’दीदी की रसोई’’ का स्वादिष्ट एवं पोष्टिक नास्ता एवं खाना

    • अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और स्वास्थ्यकर भोजन उपलब्ध कराना चुनौती था

    •आर्थिक रूप से सशक्त होंगी जीविका दीदी

    छपरा : जीविका दीदियाँ सिर्फ रोटी बनाने में ही नहीं बल्कि रोटी कमाने की ओर भी अग्रसर हैं। ये दीदियाँ स्वरोजगार के अन्य माध्यमों के साथ ही अब दीदी की रसोई के माध्यम से भी आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और लोगों को घर जैसा शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन परोस रही हैं। इसी कड़ी में सदर अस्पताल परिसर छपरा में जीविका दीदियों द्वारा संचालित राज्य का 73 वॉ दीदी की रसोई का शुभारंभ को हुआ । अब राज्य के सभी 38 जिलों के सदर अस्पताल में एवं कई अनुमंडल अस्पतालों में भी जीविका द्वारा दीदी की रसोई का संचालन हो रहा है। दीदी की रसोई का उद्घाटन राहुल कुमार (मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जीविका) राजेश मीणा (जिला पदाधिकारी, सारण), अमित कुमार (उप विकास आयुक्त), डॉ सागर दुलार सिन्हा (सिविल सर्जन) एवं जीविका दीदियों ने संयुक्त रूप से किया। यह दीदी की रसोई, सदर अस्पताल , छपरा में सत्यम जीविका महिला सकुल स्तरीय संघ ,भैरोपुर निजामत, छपरा सदर द्वारा संचालित किया जा रहा है।जिला अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और स्वास्थ्यकर भोजन उपलब्ध कराना एक चुनौती था। जीविका द्वारा गरीब ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आजीविका विकल्प प्रदान करने के लिए दीदी की रसोई की अवधारणा की गई। बिहार स्टेट हेल्थ सोसाइटी ने जीविका सदस्यों में विश्वास दिखाया और उन्हें अस्पताल परिसर में कैंटीन चलाने के लिए कहा ताकि मरीजों को घर जैसा स्वादिष्ट एवं स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराया जा सके।सत्यम जीविका संकुल स्तरीय संघ, भैरोपुर निजामत, छपरा सदर और सदर अस्पताल-छपरा के बीच एक समझौता ज्ञापन के बाद दीदी की रसोई का शुभारम्भ शनिवार को जिला अस्पताल परिसर में हुआ। जीविका दीदियों के प्रशिक्षण के लिए तकनीकी पार्टनर ने छपरा की चयनित 18 जीविका दीदियों को प्रशिक्षण प्रदान किया । मॉड्यूल में ग्राहकों के साथ संचार, लेखा और बहीखाता, स्वच्छता और स्वच्छता का रखरखाव, संकट प्रबंधन, कच्चे माल की खरीद की तकनीक, मेनू योजना, लागत और कई अन्य प्रासंगिक कौशल शामिल थे।

    जीविका दीदी को दिया गया है प्रशिक्षण

    अरुण कुमार, जिला परियोजना प्रबंधक, छपरा ने बताया कि खाना एवं नाश्ता बनाने में निपुण जीविका दीदियों को दीदी की रसोई के संचालन के लिए प्रशिक्षित किया गया है। मंजू देवी, सदस्य, सत्यम जीविका महिला सकुल स्तरीय संघ ने बताया कि दीदी की रसोई से अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होने वाले मरीजों को अस्पताल प्रशासन द्वारा भोजन नास्ता उपलब्ध कराया जाएगा।

    शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जायेगा:

    मैन्यू के अंतर्गत सुबह का नाश्ता, दिन का भोजन, शाम को नाश्ता एवं रात्रि का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही मरीजों के परिजनों और अस्पताल में आने वाले अन्य लोगों के लिए भी कैंटीन में नाश्ता, चाय एवम भोजन निर्धारित दर पर उपलब्ध रहेगा। इसके साथ ही मांग के अनुरूप प्रतिदिन नाश्ता एवं भोजन भी विभिन्न आयोजनों, कार्यक्रमों एवं बैठकों के लिए आपूर्ति की जायेगी। अस्पताल परिसर एवं बाहर भी विभिन्न कार्यालयों में मांग के अनुरूप शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जायेगा। इसके लिए सत्यम जीविका महिला सकुल स्तरीय संघ, भैरोपुर निजामत, छपरा सदर को जिला प्रशासन ने जगह उपलब्ध कराया है।

छपरा

  • बदलते मौसम में शिशुओं को निमोनिया का अधिक ख़तरा, बचाव के लिए पीसीवी टीका कारगर
    बदलते मौसम में शिशुओं को निमोनिया का अधिक ख़तरा, बचाव के लिए पीसीवी टीका कारगर

    • निमोनिया बच्चों में मृत्यु का प्रमुख कारण
    • 5 साल से कम उम्र के बच्चों में 18 प्रतिशत मृत्यु केवल निमोनिया से
    • सर्दी एवं संक्रमण से बचाव है जरुरी

    छपरा : सर्दी के मौसम में बच्चों को निमोनिया का अधिक ख़तरा होता है। इसलिए इस मौसम में बच्चों को निमोनिया से बचाव पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों में होने वाली मौतों में निमोनिया एक प्रमुख कारण है. विश्व भर में प्रति वर्ष 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 13 लाख बच्चों की जान केवल निमोनिया के कारण चली जाती है, जो कुल होने वाली मौतों का लगभग 18 प्रतिशत है। इस दिशा में सरकार ने निमोनिया से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण में पीसीवी टीके को शामिल किया है। यह टीका निमोनिया से बचाव में काफ़ी असरदार है।

    ठंड के मौसम में अधिक ख़तरा:

    सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा ने बताया कहा कि बदलते मौसम में शिशुओं की बेहतर देखभाल जरूरी है। इस मौसम में शिशुओं में निमोनिया होने का खतरा अधिक हो जाता है। निमोनिया एक संक्रामक रोग है जो एक या दोनों फेफड़ों के वायु के थैलों को द्रव या मवाद से भरकर उसमें सूजन पैदा करता है। इससे बलगम वाली खांसी, बुखार, ठंड लगना और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। निमोनिया साधारण से जानलेवा भी हो सकता है। इसलिए इस मौसम में शिशुओं को ठंड से बचाना चाहिए। इससे बचाव के लिए पीसीवी का टीका बच्चे को जरुर लगवाना चाहिए।

    शिशुओं व 65 वर्ष उम्र से अधिक व्यक्तियों को खतरा:

    आमतौर पर निमोनिया से शिशुओं, बच्चों एवं 65 वर्ष से ऊपर आयु वाले लोगों या कमजोर प्रतिरोधक प्रणाली वाले लोगों को अधिक ख़तरा होता है। यह एक संक्रामक रोग है जो छींकने या खांसने से फ़ैल सकता है। जिले में सर्दी के मौसम के शुरुआत से ही बच्चों में निमोनिया एवं ठंड से जुडी अन्य बीमारियों में बढ़ोतरी हुयी है ।

    निमोनिया के प्रकार-

    • बैक्टीरियल निमोनिया: यह विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया के कारण होता है। इससे कमजोर प्रतिरक्षण प्रणाली वाले लोगों, कुपोषित बच्चे तथा बीमार लोगों को अधिक ख़तरा होता है।

    • वायरल निमोनिया: इस प्रकार का निमोनिया फ्लू सहित विभिन्न वायरस के कारण होता है तथा इससे बैक्टीरियल निमोनिया होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं।
    • माइक्रोप्लाज्मा निमोनिया- इसके लक्षण अलग होते हैं और इसे एटीपीकल निमोनिया कहा जाता है। यह आम तौर पर हलके परन्तु बड़े पैमाने पर निमोनिया का कारण बनता है जो सभी आयु समूहों को प्रभावित करता है।

    • एसपीरेशन निमोनिया: यह किसी भोजन, तरल पदार्थ, गैस या धुल से होता है. निमोनिया के इस प्रकार को कभी -कभी ठीक करना मुश्किल हो जाता है क्यूंकि इससे ग्रसित लोग पहले से ही बीमार होते हैं।

    • फंगल निमोनिया: इस प्रकार का निमोनिया विभिन्न स्थानीय कारणों से होता है तथा इसका निदान काफी कठिन होता है।

    निमोनिया के लक्षण-
     बलगम वाली खांसी
     कंपकपी वाला बुखार
     सांस लेने में तकलीफ या तेजी से सांस चलना
     सीने में दर्द या बेचैनी
     भूख कम लगना
     खांसी में खून आना
     कम रक्तचाप
     जी मचलना और उलटी

    निमोनिया से बचाव:
    पीसीवी वैक्सीन बच्चों को निमोनिया से बचाने में सहायक होता है. इसे सरकार द्वारा नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया है। इसे तीन खुराकों में दिया जाता है तथा यह बच्चों को निमोनिया से बचाने में अहम् भूमिका अदा करता है। चिकित्सक 2 साल से कम आयु के बच्चों और 2 से 5 साल के बच्चों को अलग अलग निमोनिया के टीकों की सलाह देते हैं। धुम्रपान से परहेज, स्वस्थ एवं संतुलित जीवन शैली तथा साफ़ सफाई का ध्यान रख निमोनिया से बचा जा सकता है।