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Chhapra Court News: सारण में 10 साल पुराने मारपीट कांड में कोर्ट का बड़ा फैसला, चार दोषियों को सजा, 5 साल का कारावास

अमनौर के चर्चित मारपीट कांड में फैसला

छपरा। करीब दस वर्ष पुराने मारपीट और जानलेवा हमले के मामले में छपरा न्यायालय ने चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अष्टम अनिल कुमार भारद्वाज की अदालत ने अमनौर थाना कांड संख्या 115/2016 से जुड़े सत्र वाद संख्या 797/18 में अमनौर थाना क्षेत्र के झाखंडी निवासी मुन्ना राय, सोनू राय, राहुल कुमार राय और गोलू राय को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।

अदालत ने धारा 147/149 के तहत छह माह का साधारण कारावास और 500 रुपये अर्थदंड, धारा 148 के तहत दो वर्ष का कारावास और 500 रुपये अर्थदंड, धारा 323 के तहत छह माह का कारावास और 500 रुपये अर्थदंड तथा धारा 325/149 के तहत पांच वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। धारा 141 के तहत एक माह के कारावास की सजा भी दी गई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

2016 में पंचायत चुनाव को लेकर हुआ था विवाद

मामला वर्ष 2016 का है। अभियोजन के अनुसार, अमनौर थाना क्षेत्र के मनोहरपुर निवासी चंद्रमा राय ने 30 जून 2016 को सदर अस्पताल, छपरा में इलाज के दौरान भगवान बाजार थाना के पुलिस निरीक्षक के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया था।

अपने बयान में उन्होंने बताया था कि वह झाखंडी गांव में रामदेव राय के घर से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान छोटका पुल के पास पहले से घात लगाए आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और जान मारने की नीयत से लाठी-डंडे, फरसा और लोहे की पाइप से हमला कर दिया।

हमले में चंद्रमा राय गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। अभियोजन के अनुसार, लोगों को आते देख आरोपी देसी कट्टा से फायरिंग करते हुए मौके से फरार हो गए।

पंचायत चुनाव में साथ नहीं देने को बताया गया घटना का कारण

अभियोजन के अनुसार, घटना के पीछे वर्ष 2016 के पंचायत चुनाव से जुड़ा विवाद था। आरोप लगाया गया कि चंद्रमा राय ने आरोपियों के पिता का चुनाव में साथ नहीं दिया था। इसी बात को लेकर आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और जानलेवा हमला किया।

घटना के बाद घायल चंद्रमा राय को इलाज के लिए सदर अस्पताल, छपरा में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज हुआ। उनके बयान के आधार पर अमनौर थाना में मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।

छह गवाहों ने अदालत में दी गवाही

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में कुल छह गवाहों की गवाही कराई। इनमें अनुसंधानकर्ता और चिकित्सक भी शामिल थे। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक प्रियरंजन सिन्हा ने सरकार का पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा।

अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषी पाया और विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई।

23 सितंबर 2016 को दाखिल हुआ था आरोप पत्र

पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 23 सितंबर 2016 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और करीब एक दशक बाद अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

किस धारा में कितनी सजा

धारासजाअर्थदंड
147/1496 माह साधारण कारावास₹500
1482 वर्ष कारावास₹500
3236 माह कारावास₹500
325/1495 वर्ष कारावास₹5,000
1411 माह कारावास

नोट: अदालत के आदेश के अनुसार सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

न्यायालय के इस फैसले के बाद करीब दस वर्ष पुराने मामले में पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है। अभियोजन ने मामले में प्रस्तुत मौखिक, चिकित्सकीय और अनुसंधान संबंधी साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को साबित करने का प्रयास किया, जिसे अदालत ने सुनवाई के बाद स्वीकार करते हुए दोषियों को सजा सुनाई।

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Ganpat Aryan
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वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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