वर्दी वाला देवदूत!दिन हो या रात, दुर्घटना की सूचना मिलते ही दौड़ पड़ते हैं SHO अश्विनी तिवारी
गोल्डन ऑवर में मदद से बच रही जिंदगियां

छपरा। सड़क दुर्घटना के बाद के शुरुआती कुछ मिनट किसी भी घायल व्यक्ति के लिए जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी तय करते हैं। ऐसे समय में यदि त्वरित सहायता और उपचार मिल जाए तो कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
सारण जिले के मशरक थाना क्षेत्र में सड़क हादसों के दौरान घायलों को समय पर सहायता पहुंचाने की दिशा में थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार तिवारी की सक्रियता और संवेदनशील कार्यशैली लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। दुर्घटना की सूचना मिलते ही वे पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराते हैं और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करते हैं।
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मशरक थाना क्षेत्र से होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-227 ए (रामजानकी पथ), राज्य उच्च पथ-90, सिवान-मशरक-शीतलपुर मार्ग सहित कई प्रमुख सड़कें गुजरती हैं। इन सड़कों पर प्रतिदिन भारी वाहनों और यात्रियों की आवाजाही होती है, जिसके कारण सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
गोल्डन ऑवर में मदद से बच रही जिंदगियां
स्थानीय लोगों के अनुसार, थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार तिवारी ने दुर्घटनाओं में घायल लोगों की मदद को प्राथमिकता बना रखा है। कई बार उन्हें स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर घायलों को पुलिस वाहन अथवा उपलब्ध अन्य साधनों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाते देखा गया है। उनकी तत्परता के कारण कई गंभीर घायलों को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकी है, जिससे उनकी जान बचाने में सफलता मिली है।
थानाध्यक्ष ने पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही बिना किसी देरी के घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जाए। इसके साथ ही आम लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है कि दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति की सहायता करने से न हिचकिचाएं तथा तत्काल पुलिस, डायल-112 और एंबुलेंस सेवा को सूचना दें।
थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार तिवारी का कहना है कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में लोगों की मदद करना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने और उन्हें समय पर उपचार दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक की व्यवस्था पर सवाल
हालांकि सड़क दुर्घटनाओं में राहत कार्य के दौरान स्थानीय लोगों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। प्रखंड मुखिया संघ अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में पुलिस और आम लोग तो पूरी तत्परता दिखाते हैं, लेकिन कई बार अस्पताल में अपेक्षित स्तर की चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि कुछ माह पूर्व सारण के जिलाधिकारी द्वारा अस्पताल का निरीक्षण कर चिकित्सकों का रोस्टर जारी किया गया था, जिससे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा की उम्मीद जगी थी। बावजूद इसके कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में एमबीबीएस चिकित्सक उपलब्ध नहीं रहते हैं।
वहीं रोगी कल्याण समिति के सदस्य राजेन्द्र सिंह ने कहा कि चिकित्सकों को निर्धारित रोस्टर के अनुसार नियमित ड्यूटी करनी चाहिए, ताकि दुर्घटना में घायल मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
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सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा “गोल्डन ऑवर” कहलाता है। इस दौरान यदि घायल को समुचित चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो मृत्यु की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। मशरक पुलिस इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए तेजी से राहत एवं बचाव कार्य कर रही है।
पुलिस की मानवीय पहल से बढा भरोसा
क्षेत्रवासियों का कहना है कि मशरक पुलिस की यह मानवीय पहल न केवल लोगों का भरोसा बढ़ा रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर लोगों की जिंदगी बचाने वाली संवेदनशील व्यवस्था भी है। सड़क हादसों में घायलों को समय पर सहायता पहुंचाने की दिशा में थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार तिवारी की सक्रिय भूमिका लोगों के लिए उम्मीद की एक नई मिसाल बनकर उभरी है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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