गंडक का कहर: सारण के 7 प्रखंडों में 25 पंचायत और 102 गांव प्रभावित, 15,400 लोग सुरक्षित निकाले गए
राहत केंद्र और सामुदायिक रसोई से मिल रहा भोजन

छपरा। गंडक नदी के जलप्लावन से सारण जिले के तटवर्ती इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। जिला प्रशासन की 1 अक्टूबर 2026 की अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार जिले के सात प्रखंडों की 25 पंचायतों और 102 गांवों में जलप्लावन का असर है। इन क्षेत्रों में करीब 1,70,025 लोग और 36,250 परिवार प्रभावित बताए गए हैं। जलस्तर और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने अब तक 15,400 लोगों का सुरक्षित निष्क्रमण कराया है।
प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव और स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार संचालित किया जा रहा है। लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों का परिचालन जारी है। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त नावों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि प्रभावित गांवों से लोगों और राहत सामग्री की आवाजाही में किसी तरह की बाधा न आए।
सात प्रखंडों में लगातार निगरानी
गंडक नदी के जलप्लावन से पानापुर, तरैया, अमनौर, मकेर, परसा, दरियापुर और सोनपुर प्रखंड प्रभावित हैं। इन प्रखंडों की प्रभावित पंचायतों और गांवों की स्थिति पर जिला प्रशासन लगातार नजर रख रहा है।
प्रशासन का निर्देश है कि जलस्तर, आवागमन और स्थानीय परिस्थितियों में बदलाव की जानकारी समय पर एकत्र की जाए और जहां भी जरूरत महसूस हो, वहां तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों और कर्मियों को सक्रिय रखा गया है।
20 चिकित्सा शिविरों से स्वास्थ्य सेवाएं
बाढ़ प्रभावित आबादी को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कुल 20 चिकित्सा शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से प्रभावित लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के साथ बीमारी की रोकथाम और स्वास्थ्य निगरानी की जा रही है।
जलप्लावन के बीच स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं हों, इसके लिए चिकित्सा टीमों को जरूरत के अनुसार विभिन्न प्रभावित इलाकों में सक्रिय रखा गया है। प्रशासन का जोर है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिले।
पशुओं के लिए भी चिकित्सा और चारे की व्यवस्था
प्रशासन ने प्रभावित पशुओं की सुरक्षा को भी राहत अभियान का हिस्सा बनाया है। प्रभावित इलाकों में पशु चिकित्सा शिविर चलाए जा रहे हैं। साथ ही पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने और उसके वितरण की कार्रवाई भी जारी है।
बाढ़ के कारण पशुपालकों के सामने चारे और पशुओं को सुरक्षित रखने की चुनौती को देखते हुए स्थानीय स्तर पर आवश्यक व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की स्थिति की भी लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं।
राहत केंद्र और सामुदायिक रसोई से मिल रहा भोजन
प्रभावित आबादी के लिए राहत केंद्र और सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इन केंद्रों के माध्यम से प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही जरूरत वाले परिवारों के बीच फूड पैकेट और ड्राई राशन पैकेट भी वितरित किए जा रहे हैं।
प्रशासन की कोशिश है कि जलप्लावन से प्रभावित परिवारों को भोजन और जरूरी खाद्य सामग्री की कमी नहीं होने दी जाए। स्थानीय स्थिति और जरूरत के अनुसार राहत सामग्री की आपूर्ति और वितरण का काम लगातार चल रहा है।
पॉलीथिन शीट का पर्याप्त भंडार
जिन परिवारों के घर जलप्लावन से प्रभावित हुए हैं, उनके लिए पॉलीथिन शीट उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन के अनुसार जिला स्तर पर पॉलीथिन शीट का पर्याप्त भंडार मौजूद है और जरूरत के अनुसार प्रभावित परिवारों तक इसका वितरण किया जा रहा है।
इससे प्रभावित परिवारों को अस्थायी तौर पर रहने और सामान को सुरक्षित रखने में सहायता मिल रही है।
चार एनडीआरएफ-एसडीआरएफ टीमें तैनात
राहत और बचाव अभियान को मजबूत बनाने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कुल चार टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों को जरूरत के अनुसार संवेदनशील इलाकों में लगाया जा रहा है और सुरक्षित निष्क्रमण तथा अन्य आपात परिस्थितियों में इनकी मदद ली जा रही है।
प्रशासन स्थानीय संसाधनों के साथ आपदा प्रतिक्रिया बलों का समन्वय करते हुए राहत और बचाव कार्यों को आगे बढ़ा रहा है।
नावों से जारी है आवाजाही और राहत पहुंचाने का काम
जलप्लावन के कारण जिन क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है, वहां नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। राहत सामग्री के वितरण और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता के लिए भी नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रशासन ने आवश्यकता के अनुसार नावों की संख्या बढ़ाने और उनके नियमित परिचालन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही नावों के संचालन में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करने पर जोर दिया गया है।
15,400 लोगों का कराया गया सुरक्षित निष्क्रमण
जलस्तर और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए अब तक 15,400 लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में आबादी की स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी समयबद्ध निष्क्रमण कराने के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षित निष्क्रमण के दौरान राहत केंद्रों, भोजन और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।
अधिकारी-कर्मचारी 24 घंटे सक्रिय
जिला प्रशासन ने सभी संबंधित पदाधिकारियों और कर्मियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्थिति की निगरानी करने और जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। किसी भी गांव या पंचायत में परिस्थिति बदलने पर तुरंत राहत और बचाव संसाधनों को सक्रिय करने पर जोर दिया गया है।
प्रशासन की ओर से तटवर्ती क्षेत्रों में स्थानीय सूचना तंत्र को भी सक्रिय रखा गया है, ताकि जलस्तर, आवागमन और राहत की जरूरत से जुड़ी जानकारी समय पर मिल सके।
राहत से स्वास्थ्य और पशु सेवा तक समेकित व्यवस्था
सारण में इस समय राहत एवं बचाव अभियान को केवल सुरक्षित निष्क्रमण तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, ड्राई राशन, पॉलीथिन शीट, चिकित्सा शिविर, पशु चिकित्सा, चारा और नावों की व्यवस्था एक साथ संचालित की जा रही है।
जिला प्रशासन के अनुसार प्रभावित पंचायतों और गांवों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा परिस्थितियों के अनुरूप राहत एवं बचाव कार्यों को तत्काल बढ़ाया जा रहा है। सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने और प्रभावित लोगों तक सहायता समय पर पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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