क्राइमछपरा

Chhapra Court: साढ़े पांच साल जेल में काटे, अब मिली बेगुनाही की आजादी; बेटे की हत्या के आरोप से बाइज्जत बरी हुई बबली खातून

मुफ्त कानूनी सहायता से महिला को मिली साढ़े पांच साल बाद आजादी

छपरा। न्याय पाने की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार एक असहाय महिला को राहत मिली है। अपने दो वर्षीय पुत्र की हत्या के आरोप में पिछले पांच वर्ष छह माह से मंडल कारा, छपरा में न्यायिक हिरासत में बंद बबली खातून को न्यायालय ने बाइज्जत बरी कर दिया है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सारण की ओर से उपलब्ध कराई गई निःशुल्क कानूनी सहायता के तहत मामले की पैरवी की गई। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अभियुक्ता को निर्दोष पाते हुए सम्मानपूर्वक रिहा करने का आदेश दिया।

यह फैसला डोरीगंज थाना कांड संख्या 55/21 एवं सत्र वाद संख्या 369/21 से संबंधित है। बबली खातून पर अपने दो वर्षीय पुत्र की हत्या का आरोप था। मामले में गिरफ्तारी के बाद वह 3 मार्च 2021 से लगातार मंडल कारा, छपरा में न्यायिक हिरासत में थीं।

आर्थिक कमजोरी के कारण मिली निःशुल्क कानूनी सहायता

बताया गया कि बबली खातून आर्थिक रूप से कमजोर और असहाय थीं। ऐसे में उनके मामले की पैरवी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सारण के अंतर्गत संचालित लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) को सौंपी गई। मामले की ओर से मुख्य डिफेंस काउंसिल के अधिवक्ता पूर्णेन्दु रंजन ने न्यायालय के समक्ष तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं को विस्तार से रखा। बचाव पक्ष की ओर से उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी बिंदुओं के आधार पर अभियुक्ता का पक्ष मजबूती से प्रस्तुत किया गया।

अभियोजन पक्ष ने पेश किए सात गवाह

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात साक्षियों का साक्ष्य कराया गया। इसके बाद दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने पर न्यायालय ने मामले से संबंधित पत्रावली और उपलब्ध साक्ष्यों का परिशीलन किया।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला

माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सारण (छपरा)  अनंत कुमार सिंह की अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद बबली खातून को निर्दोष पाया। न्यायालय ने उन्हें बाइज्जत बरी करते हुए सम्मानपूर्वक रिहा करने का आदेश दिया।

पांच साल छह माह बाद मिली न्यायिक राहत

लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद बबली खातून के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से उपलब्ध कराई गई कानूनी सहायता और LADCS की पैरवी के बाद उन्हें मामले में न्यायिक राहत मिली।

यह मामला आर्थिक रूप से कमजोर और असहाय आरोपितों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की अहमियत को भी रेखांकित करता है। लगभग पांच वर्ष छह माह की लंबी न्यायिक हिरासत के बाद बबली खातून को न्यायालय के फैसले से आजादी मिली।

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Ganpat Aryan
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वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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