अब सरकारी कार्यालयों में ‘कल आइए’ का बहाना नहीं चलेगा, DM ने जारी किया बड़ा आदेश, लागू हुआ ‘सबका सम्मान–जीवन आसान’
सारण में Ease of Living का बड़ा फैसला

छपरा। क्या आपने कभी सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाए हैं? अगर हां, तो यह अनुभव किसी भूलभुलैया से कम नहीं रहा होगा। कभी अधिकारी नहीं मिलते, कभी फाइल आगे नहीं बढ़ती, तो कभी “कल आइए” का जवाब। यही दूरी और परेशानी आम आदमी और प्रशासन के बीच एक दीवार बन गई थी। इसी दीवार को गिराने के लिए सारण जिला प्रशासन ने एक ठोस और सराहनीय पहल की है।
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव का अहम निर्देश
सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने एक पत्र जारी कर साफ निर्देश दिया है कि अब सरकारी दफ्तरों में आम लोगों को भटकना नहीं पड़ेगा। यह आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि इसे 12 जनवरी 2026 से प्रभावी रूप से लागू किया जाना है। राज्य सरकार द्वारा सात निश्चय–3 के सातवें निश्चय के अंतर्गत “सबका सम्मान–जीवन आसान” यानी Ease of Living को लागू किया गया है। इसका सीधा सा मतलब है। सरकार का काम आम आदमी के जीवन को आसान बनाना, न कि जटिल।
‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ क्या है?
यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक सोच है। एक ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था, जहां नागरिक को सम्मान मिले, उसकी बात सुनी जाए और समस्या का समय पर समाधान हो। बार-बार यह शिकायत सामने आती थी कि अधिकारी कार्यालय में नहीं रहते, जिससे जनता को असुविधा होती है। सरकार ने इस जमीनी सच्चाई को स्वीकार किया और समाधान निकाला।
पहले क्या समस्याएं थीं?
- अधिकारियों की अनुपस्थिति
- शिकायत सुनने की कोई तय व्यवस्था नहीं
- बुनियादी सुविधाओं का अभाव
सोमवार और शुक्रवार: जनता से मिलने का तय दिन
अब हर सप्ताह सोमवार और शुक्रवार को सभी संबंधित पदाधिकारी जनता से मिलने के लिए समय निर्धारित करेंगे। यह नियम ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक लागू होगा। इन दोनों दिनों में अधिकारी स्वयं उपस्थित रहेंगे, लोगों से सम्मानपूर्वक मिलेंगे और शिकायतों को संवेदनशीलता से सुनेंगे। अगर किसी कारणवश अधिकारी उपस्थित नहीं हो पाते, तो उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी जनता से मिलेंगे। जो अधिकारी एक से अधिक कार्यालयों का प्रभार संभालते हैं, वे अलग-अलग समय तय कर सभी कार्यालयों में उपस्थित रहेंगे।
सम्मानजनक व्यवहार की अनिवार्यता
अब सरकारी दफ्तरों में आने वाला हर व्यक्ति सिर्फ “आगंतुक” नहीं, बल्कि सम्मानित नागरिक होगा। हर कार्यालय में पेयजल, शौचालय और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य की गई हैं। प्राप्त हर शिकायत का विधिवत पंजीकरण होगा और इसके लिए अलग रजिस्टर रखा जाएगा। शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी नियमित निगरानी की जाएगी। सभी वरीय पदाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करें।
आम जनता तक जानकारी कैसे पहुंचेगी?
सूचना बोर्ड, स्थानीय प्रचार और जनसंपर्क के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा। जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, सारण को नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है।यह आदेश प्रशासनिक संस्कृति को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां अधिकारी सेवा प्रदाता की भूमिका में होंगे। हर सप्ताह की रिपोर्ट के आधार पर आयुक्त स्तर पर समीक्षा होगी, चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन।
इस आदेश से आम जनता को क्या लाभ होगा?
- समय की बचत
- सम्मानजनक व्यवहार
- समस्याओं का त्वरित समाधान
- प्रशासन पर भरोसा मजबूत
चुनौतियां और उनके समाधान
शुरुआत में निगरानी और अनुश्रवण चुनौती हो सकती है, लेकिन साप्ताहिक समीक्षा से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। अगर यह व्यवस्था सही ढंग से लागू होती है, तो सारण राज्य के अन्य जिलों के लिए मिसाल बन सकता है। “सबका सम्मान–जीवन आसान” सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि प्रशासन और जनता के रिश्ते को नई दिशा देने की कोशिश है। यह पहल अगर जमीनी स्तर पर ईमानदारी से लागू होती है, तो सरकारी दफ्तरों का डर खत्म होगा और भरोसे की शुरुआत होगी।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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