
बिहार डेस्क। तीन दिनों से घर में मातम पसरा हुआ था। पिता ने बेटी की अर्थी सजाई। ग्रामीण शव यात्रा में शामिल हुए। परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल हो रखा था। पिता जवान बेटी को मुखाग्नि देने की हिम्मत नहीं जुटा पाए तो दादा ने अंतिम विदाई की रस्म निभाई। स्वयं श्राद्ध कर्म की तैयारी में जुटे में हुए थे। इसी बीच, शुक्रवार को एक वीडियो कॉल पर आवाज सुनाई दी -”पापा मैं तो अभी जिंदा हूं…”, तो हर कोई हैरत में पड़ गया। दरअसल, परिवार वाले जिस बेटी अंशु कुमारी का अंतिम संस्कार कर चुके थे, उसी बेटी का वीडियो कॉल था। अब पुलिस भी परेशान है कि आखिर वह अंशु कुमारी का शव नहीं तो किसका शव था।
वहीं स्वजन इस बात से परेशान हैं कि आखिर शव को पहचानने में उनसे गलती कैसे हो गई, जिस कारण उनकी जिंदा चलती-फिरती बेटी का दाह संस्कार कर दिया। यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल पूरा मामला बिहार के पूर्णिया जिले का है। जहां 15 अगस्त को अकबरपुर ओपी के डढ़वा गांव स्थित नहर में उपलाता एक अज्ञात युवती का शव पुलिस ने बरामद किया था। सोशल मीडिया पर शव की तस्वीर वायरल होने पर बलिया ओपी क्षेत्र के तुलसी बिशनपुर निवासी विनोद मंडल ने शव की पहचान अपनी बेटी अंशु कुमारी के रूप में की थी। कई दिनों का शव होने के चलते उसका चेहरा वीभत्स हो गया था। अंगुली व युवती के बदन पर मौजूद कपड़े के आधार पर शव की पहचान स्वजनों ने की थी।
जानकारी के अनुसार, प्रेम-प्रसंग के मामले में अंशु एक महीने से गायब थी। परिवारवालों ने बेटी की अपने स्तर पर खोजबीन की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल पाया था। ऐसे में अज्ञात शव मिलने पर स्वजनों ने यह मान लिया था कि शायद अंशु की हत्या कर शव को नहर में फेंक दिया गया। उस अज्ञात शव की स्थिति से यह आशंका भी जताई गई थी कि दुष्कर्म बाद उसकी हत्या की गई है। अंशु कुमारी ने घर से गायब होने के बाद जानकीनगर थाना क्षेत्र के रुपोली हाल्ट निवासी अपने प्रेमी से मंदिर में शादी कर ली थी और वह अपने ससुराल में रह रही थी।
इधर, मीडिया में खुद के दाह संस्कार होने की खबर आने पर अंशु विचलित हो गई। ऐसे में स्वजनों की मर्जी के बिना शादी किए जाने का भय से निकल कर आखिरकार शुक्रवार को अपने मायके में वीडियो कॉल किया और खुद के जिंदा होने का प्रमाण दिया।
स्वजनों की पहचान पर जिस शव को अंशु बता पुलिस अपनी कार्रवाई में जुटी थी, उस मामले में अब नया मोड़ आ चुका है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर स्वजनों को सौंप दिया था। अब जब अंशु के जीवित होने का साक्ष्य सामने आ चुका है तो एक बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि आखिर वह शव किस युवती का था।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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