Now electricity will be generated from speed breaker in Bihar, NIT Patna got success

अब बिहार में अब स्पीड ब्रेकर से बिजली बनाया जाएगा, एनआईटी पटना को मिली सफलता

बिहार

डॉ. शैलेश ने तकनीकी जानकारी देते हुए कहा, इस डिजाइन कार्य में वाहन का वजन 160 किलोग्राम माना गया है. इसके अलावा स्पीडब्रेकर की ऊंचाई 10 सेमी रखी गई। इस बल की गणना 160 x 9.81 मी/से. की गई है। वाहन द्वारा तय की गई दूरी यानी ब्रेक की ऊंचाई को 10 सेंटीमीटर रखा गया गया। प्रति एक धक्के के लिए 2.616 वाट की शक्ति मिली।

पटना. ट्रैफिक लाइट और स्ट्रीट लाइट को अब विभिन्न स्थानों पर स्थापित स्पीड ब्रेकर का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करके नियंत्रित किया जा सकता है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने हासिल की है। पर्यावरण संतुलन के उद्देश्य से किए गए इस शोध को पेटेंट भी मिल चुका है। ऑपरेटिंग मॉडल को लेकर आगे की कवायद की जा रही है।

एनआईटी के निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार जैन ने कहा, “इस शोध का उद्देश्य बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और प्रदूषण के बिना सबसे सस्ती ऊर्जा प्रदान करना है।”

एक ब्रेकर से प्रति वर्ष 1356.2 केवी बिजली
यह सफलता एनआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डी. शैलेश एम. पांडे के नेतृत्व में मिली। एम.टेक छात्र राकेश सिंघला और बी.टेक छात्र आनंद पांडे ने मिलकर इस नवाचार को विकसित किया। तकनीकी जानकारी प्रदान करते हुए डाॅ. शैलेश के मुताबिक इस डिजाइन कार्य में कार का वजन 160 किलोग्राम माना गया। स्पीडब्रेकर की ऊंचाई भी 10 सेंटीमीटर रखी गई. बल की गणना 160 x 9.81 मीटर प्रति सेकंड से की। वाहन द्वारा तय की गई दूरी, अर्थात ब्रेकिंग की ऊंचाई 10 सेमी रखी गई, पावर आउटपुट गणना ने प्रति पैकेट 2.616 W का पावर आउटपुट दिया।
गतिज ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है

डॉ. शैलेश ने कहा, इस तकनीक में वाहन द्वारा उत्पन्न गतिज ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करके बिजली उत्पन्न की जाती है। इसमें दो तरफा रैक और पिनियन व्यवस्था शामिल है। स्पीड ब्रेकर से गुजरने वाला वाहन रैक पर धक्का देता है और पिनियन तंत्र के माध्यम से यांत्रिक ऊर्जा उत्पन्न करता है। उत्पन्न यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। इसके लिए जेनरेटर का इस्तेमाल किया जाता है.

सीएसआईआर ने मंजूरी दी, रिपोर्ट सौंपी गई
डॉ. शैलेश ने कहा कि केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर), नई दिल्ली ने इस नवाचार को मंजूरी देते हुए परिवहन मंत्रालय को एक रिपोर्ट भेजी है। इस आविष्कार का मुख्य उद्देश्य स्पीड ब्रेकर का उपयोग करके स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न करना है। यह उपयोग के लिए हर प्रकार से प्रदूषण व ईंधन से रहित सबसे सस्ती बिजली है।