Chhapra Flood: सारण में बाढ़ का बड़ा संकट, 2.33 लाख लोग प्रभावित; 155 नावें और 21 मेडिकल कैंप सक्रिय
बाढ़ के बीच हर मोर्चे पर प्रशासन, भोजन से इलाज तक पहुंचाई जा रही मदद

छपरा। सारण जिले में बाढ़ की स्थिति के बीच जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। जिले के 7 प्रखंडों की 35 पंचायतों के 109 गांवों की कुल 2,33,511 आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। प्रशासन ने अब तक 1,206 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक भोजन, चिकित्सा, पेयजल और अन्य जरूरी सहायता पहुंचाने के साथ-साथ तटबंधों की मरम्मत और सुरक्षा का काम भी युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।
जिला प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, जलस्तर बढ़ने और कई निचले इलाकों में पानी फैलने के बाद राहत एवं बचाव व्यवस्था को और सक्रिय किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में नावों का परिचालन बढ़ाया गया है, जबकि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी तैनात की गई हैं। प्रशासन का विशेष ध्यान बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने पर है।
155 नावें राहत और बचाव में लगीं
बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए 155 नावों का परिचालन किया जा रहा है। दुर्गम और जलजमाव वाले क्षेत्रों में नावों के माध्यम से प्रशासनिक एवं राहत दल पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही एसडीआरएफ के छह राफ्ट तैनात किए गए हैं। इनमें सदर में दो, दिघवारा में दो और सोनपुर में दो राफ्ट शामिल हैं। इसके अलावा जिले में एनडीआरएफ की एक यूनिट भी पहुंच चुकी है, जिसे आवश्यकता के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में लगाया जा रहा है। डोरीगंज क्षेत्र में जलस्तर राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंचने के बाद प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कार्रवाई की गई है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
21 चिकित्सा शिविरों में 1371 मरीजों का उपचार
बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा व्यवस्था को भी सक्रिय रखा है। प्रभावित क्षेत्रों में 21 चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से अब तक 1,371 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। मेडिकल टीमें जरूरी दवाओं और चिकित्सा सामग्री के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंच रही हैं। इसके अलावा छह बोट एंबुलेंस भी सक्रिय हैं, जो सड़क मार्ग से कटे इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें बीमारी से पीड़ित लोगों की जांच और उपचार के साथ गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों तथा बुजुर्गों पर विशेष नजर रख रही हैं। आपात स्थिति में मरीजों को सुरक्षित स्थान या स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है।
8945 ड्राई राशन और 11349 पॉलीथिन शीट वितरित
प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए प्रशासन की ओर से खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक 8,945 ड्राई राशन/फूड पैकेट तथा 11,349 पॉलीथिन शीट का वितरण किया जा चुका है। पॉलीथिन शीट का उपयोग प्रभावित परिवारों को अस्थायी आश्रय और बारिश से बचाव के लिए किया जा रहा है, जबकि खाद्य पैकेट के माध्यम से बाढ़ से प्रभावित परिवारों तक तत्काल भोजन पहुंचाया जा रहा है।
15 सामुदायिक रसोई में 12 हजार से अधिक लोगों को भोजन
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिले में 15 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें सदर छपरा में चार, रिविलगंज में चार, दिघवारा में तीन, सोनपुर में दो और गड़खा में दो सामुदायिक रसोई शामिल हैं। इन रसोई के माध्यम से अब तक 12,005 लोगों को भोजन कराया जा चुका है। प्रशासन की ओर से आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक रसोई की संख्या बढ़ाने की भी तैयारी रखी गई है, ताकि किसी भी प्रभावित परिवार को भोजन के लिए परेशान न होना पड़े।
तटबंधों की सुरक्षा के लिए युद्धस्तर पर काम
बाढ़ के दबाव के बीच तटबंधों की सुरक्षा और मरम्मत का काम भी लगातार जारी है। त्रिलोकचक (दिघवारा) और सिमरिया (दरियापुर) में तटबंध में आए दबाव और क्षति को देखते हुए मिट्टी भरने एवं मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता कमजोर हिस्सों को मजबूत करना और संभावित कटाव को रोकना है। संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।
बाढ़ प्रभावित बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित बच्चों के लिए भी विशेष इंतजाम किए हैं। सोनपुर प्रखंड की विभिन्न पंचायतों से आए बाढ़ प्रभावित लोगों और बच्चों के लिए सामुदायिक रसोई केंद्र-सह-राहत शिविरों में बच्चों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों की तर्ज पर खेल, मनोरंजन, रचनात्मक और शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, ताकि राहत अवधि के दौरान उनके मानसिक स्वास्थ्य और दिनचर्या पर प्रतिकूल प्रभाव कम हो। इन गतिविधियों में जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
678 पशुओं को पशु शिविरों में रखा गया
बाढ़ में पशुधन को भी सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन की ओर से 8 पशु शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में अब तक 678 पशुओं को रखा गया है। शिविरों में पशुओं के लिए चारा और पशु चिकित्सा की व्यवस्था की गई है, ताकि बाढ़ के कारण पशुपालकों को अतिरिक्त परेशानी न हो। जरूरत के अनुसार अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी पशु शिविर बढ़ाए जाने की व्यवस्था रखी गई है।
प्रभारी मंत्री ने लिया राहत कार्यों का जायजा
बाढ़ की स्थिति और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लेने के लिए उप मुख्यमंत्री सह सारण जिले के प्रभारी मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधीक्षक रोशन कुमार ने प्रभारी मंत्री को जिले में बाढ़ की वर्तमान स्थिति, राहत शिविरों, सामुदायिक रसोई, मेडिकल टीम, नावों, एसडीआरएफ-एनडीआरएफ की तैनाती तथा अन्य व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी। इसके अलावा प्रभारी सचिव सह प्रधान सचिव, गृह विभाग, बिहार श्री पंकज कुमार ने भी जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया।
प्रभारी मंत्री ने हरसंभव सहायता देने पर दिया जोर
राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा के दौरान प्रभारी मंत्री ने प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने तथा सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को लगातार सक्रिय रखने पर जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बनाए रखें और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव संसाधनों को सक्रिय किया जाए।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
जिला प्रशासन ने आम लोगों से बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सतर्क एवं सावधान रहने की अपील की है। लोगों को अनावश्यक आवागमन से बचने और परिवार के साथ सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने यह भी अपील की है कि बाढ़ की स्थिति को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक निर्देशों का पालन करें। आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन द्वारा बनाए गए आश्रय स्थलों में जाने की अपील की गई है।
एक नजर में सारण की बाढ़ स्थिति
| राहत-बचाव व्यवस्था | आंकड़ा |
|---|---|
| प्रभावित प्रखंड | 7 |
| प्रभावित पंचायतें | 35 |
| प्रभावित गांव | 109 |
| प्रभावित आबादी | 2,33,511 |
| सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोग | 1,206 |
| संचालित नावें | 155 |
| एसडीआरएफ राफ्ट | 6 |
| एनडीआरएफ यूनिट | 1 |
| चिकित्सा शिविर | 21 |
| चिकित्सा लाभ लेने वाले मरीज | 1,371 |
| सक्रिय बोट एंबुलेंस | 6 |
| ड्राई राशन/फूड पैकेट | 8,945 |
| पॉलीथिन शीट | 11,349 |
| पशु शिविर | 8 |
| पशु शिविरों में रखे गए पशु | 678 |
| सामुदायिक रसोई | 15 |
| सामुदायिक रसोई से भोजन पाने वाले लोग | 12,005 |
| जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच सारण में राहत और बचाव अभियान बहुआयामी स्तर पर चलाया जा रहा है। प्रशासन का जोर एक ओर प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन, चिकित्सा और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने पर है, तो दूसरी ओर तटबंधों की सुरक्षा और संपर्क व्यवस्था को बनाए रखने पर भी लगातार काम किया जा रहा है। |
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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