छपरा में गर्भवती की मौत पर 13 साल बाद फैसला, डॉक्टर को देना होगा 20 लाख मुआवजा
गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ा भारी

छपरा। गर्भवती महिला की गंभीर शिकायतों को नजरअंदाज कर पुरानी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर उपचार करने और जरूरी चिकित्सकीय जांच नहीं किए जाने के मामले में बिहार राज्य उपभोक्ता आयोग ने कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने चिकित्सकीय लापरवाही के लिए संबंधित महिला चिकित्सक को मृतका के पति को 20 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में भी भुगतान करना होगा। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने मुआवजे की राशि 60 दिनों के भीतर देने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
मामला छपरा शहर के भगवान बाजार स्थित भूमिजा चिकित्सा केंद्र से जुड़ा है। आयोग के आदेश ने गर्भावस्था के दौरान गंभीर लक्षणों की अनदेखी और उचित चिकित्सकीय जांच नहीं किए जाने को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
तेज पेट दर्द और गर्भस्थ शिशु की हलचल बंद होने की शिकायत
मामले के अनुसार, शालू जैन गर्भावस्था के दौरान पेट में तेज दर्द और गर्भस्थ शिशु की हलचल बंद होने की शिकायत लेकर डा. बिमला शाही के पास पहुंची थीं। आरोप था कि उस समय उनकी पर्याप्त शारीरिक जांच नहीं की गई और पूर्व की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर स्थिति सामान्य बता दी गई। शालू की शिकायतें सामान्य नहीं थीं। गर्भस्थ शिशु की हलचल बंद होने और तेज पेट दर्द जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत थी। लेकिन आयोग के समक्ष रखे गए मामले के अनुसार, आवश्यक जांच और स्थिति की गंभीरता के अनुरूप चिकित्सकीय कदम नहीं उठाए गए।
6 अक्टूबर 2013 को फिर बिगड़ी तबीयत
आरोप के अनुसार, 6 अक्टूबर 2013 को शालू जैन दोबारा गंभीर पीड़ा की स्थिति में डॉक्टर के पास पहुंचीं। उस समय भी उनकी शिकायतों को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया और उन्हें दवा लेने की सलाह देकर वापस भेज दिया गया। इसके बाद उनकी तबीयत और बिगड़ गई। परिजन उन्हें बेहतर उपचार के लिए पटना के फोर्ड अस्पताल ले गए।
पटना में जांच के बाद सामने आई गंभीर स्थिति
फोर्ड अस्पताल में हुई जांच के दौरान पता चला कि गर्भस्थ शिशु की पहले ही मौत हो चुकी थी। इसके साथ ही संक्रमण फैलकर महिला की स्थिति गंभीर हो चुकी थी और वह सेप्टीसीमिया की स्थिति में पहुंच गई थीं। अस्पताल में उपचार के बावजूद शालू जैन की हालत नहीं संभली और 11 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। इस घटनाक्रम के बाद मृतका के पति की ओर से चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में मामला उठाया गया।
पुरानी रिपोर्ट के आधार पर उपचार पर आयोग ने जताई आपत्ति
आयोग ने मामले पर विचार करते हुए माना कि मरीज की गंभीर शिकायतों के बावजूद उचित चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक सावधानियां नहीं बरती गईं। केवल पुरानी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर स्थिति को सामान्य मानना और वर्तमान लक्षणों का समुचित मूल्यांकन नहीं करना चिकित्सकीय लापरवाही की श्रेणी में आया। आयोग ने माना कि मरीज की वर्तमान स्थिति को देखते हुए आवश्यक जांच, चिकित्सकीय मूल्यांकन और उचित उपचार किया जाना चाहिए था।
20 लाख रुपये मुआवजा और 20 हजार मुकदमा खर्च
बिहार राज्य उपभोक्ता आयोग ने चिकित्सकीय लापरवाही के लिए डॉक्टर को मृतका के पति को 20 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में भी भुगतान करना होगा। आयोग ने दोनों राशियों के भुगतान के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किए जाने की स्थिति में बकाया राशि पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।
गंभीर लक्षणों की अनदेखी पर महत्वपूर्ण फैसला
यह फैसला गर्भावस्था के दौरान गंभीर लक्षणों की स्थिति में चिकित्सकीय जांच और समय पर उपचार के महत्व को रेखांकित करता है। तेज पेट दर्द, गर्भस्थ शिशु की हलचल में कमी या बंद होना जैसी शिकायतों को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम की वजह बन सकता है। इस मामले में आयोग ने मरीज की शिकायतों, उपचार के तरीके और बाद में सामने आई गंभीर चिकित्सकीय स्थिति के बीच के तथ्यों का मूल्यांकन करते हुए चिकित्सकीय लापरवाही को गंभीर माना।
13 साल पुराने मामले में आया आदेश
शालू जैन की मौत का मामला अक्टूबर 2013 का है। करीब 13 वर्षों बाद बिहार राज्य उपभोक्ता आयोग का यह आदेश सामने आया है। फैसले के बाद चिकित्सकीय उपचार के दौरान मरीज की वर्तमान स्थिति का आकलन, आवश्यक जांच और समय पर रेफरल जैसे पहलुओं की अहमियत एक बार फिर सामने आई है।
आयोग के आदेश के प्रमुख बिंदु
- चिकित्सकीय लापरवाही के लिए 20 लाख रुपये मुआवजा।
- मृतका के पति को 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च।
- भुगतान की समयसीमा 60 दिन।
- समय पर भुगतान नहीं होने पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज।
- मामला छपरा के भगवान बाजार स्थित भूमिजा चिकित्सा केंद्र से संबंधित।
- घटना वर्ष 2013 की।
यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि गर्भावस्था के दौरान गंभीर लक्षण सामने आने पर केवल पुरानी जांच रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय मरीज की तत्काल स्थिति का चिकित्सकीय मूल्यांकन और आवश्यक जांच बेहद महत्वपूर्ण है।
Author Profile

- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
Latest entries
- October 21, 2026Railway Updateछपरा-सीवान के यात्रियों को रेलवे की सौगात! चंडीगढ़-बरौनी के बीच चलेगी त्योहार स्पेशल ट्रेन, जानें पूरा शेड्यूल
- October 21, 2026Railway UpdateRailway Alert: छपरा-दुर्ग सारनाथ एक्सप्रेस का ठहराव रद्द, 7 ट्रेनों के परिचालन में बदलाव; यात्रा से पहले जानें अपडेट
- October 21, 2026छपरासारण में गृह रक्षक भर्ती में बड़ा बदलाव: 3 अभ्यर्थियों का चयन रद्द, प्रतीक्षा सूची से नए उम्मीदवारों को मौका
- October 21, 2026करियर – शिक्षाछपरा में 24 अक्टूबर को होगी सिमुलतला आवासीय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा, 396 परीक्षार्थी होंगे शामिल



