छपरा

छपरा मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ कर्मचारियों का प्रदर्शन

दोबारा बहाली के नाम पर 30 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक मांगने का आरोप

छपरा। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में आउटसोर्सिंग कंपनी शिवा प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दर्जनों पूर्व कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। स्वीपर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सुपरवाइजर, गार्ड, सफाईकर्मी, माली और ऑफिस बॉय समेत विभिन्न पदों पर काम कर चुके कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें नौकरी से हटाने के बाद दोबारा बहाली के लिए पैसे की मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों को फिर से काम पर रखने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अस्पताल के मुख्य गेट के पास अपनी मांगों को लेकर आक्रोश जताया। प्रदर्शन का नेतृत्व युवा नेता राहुल कुमार यादव ने किया।

30 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक मांगने का आरोप

राहुल कुमार यादव ने आरोप लगाया कि सारण जिले में विभिन्न स्थानों पर आउटसोर्सिंग सेवाएं उपलब्ध कराने वाली शिवा प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड ने पूर्व से कार्यरत कई कर्मचारियों को हटा दिया है। उनका दावा है कि अलग-अलग पदों पर दोबारा नियुक्ति के लिए कर्मचारियों से 30 हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक की मांग की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी से जुड़े कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों के माध्यम से कथित तौर पर राशि की मांग और वसूली कराई जा रही है। हालांकि, पैसे की मांग और वसूली से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और कंपनी का पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आया है।

गरीब कर्मचारियों को हटाने का भी आरोप

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पूर्व में अलग-अलग पदों पर कार्यरत महिला एवं पुरुष कर्मचारियों में से कुछ को दोबारा रखा गया, जबकि जिन लोगों ने कथित तौर पर मांगी गई राशि देने में असमर्थता जताई, उन्हें काम से बाहर कर दिया गया।

राहुल कुमार यादव का आरोप है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर कर्मचारियों के सामने रोजगार और परिवार चलाने का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी की बहाली योग्यता, नियम और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए, न कि कथित रूप से पैसे के आधार पर।

वेतन में कटौती और भुगतान में देरी का आरोप

प्रदर्शन में शामिल कुछ कर्मचारियों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर आरोप लगाया कि कंपनी की ओर से निर्धारित राशि से कम भुगतान किया जा रहा है। उनका यह भी कहना था कि वे निर्धारित ड्यूटी पूरी करने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं पा रहे हैं।

कुछ कर्मचारियों ने पीएफ कटौती को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, कुछ कर्मचारियों को बताया गया कि उनके वेतन से पीएफ के नाम पर 35 प्रतिशत तक राशि काटी जा रही है। कर्मचारियों ने इस दावे की भी जांच कराने की मांग की है।इन आरोपों की वास्तविकता संबंधित रिकॉर्ड, वेतन पर्ची, बैंक भुगतान और कंपनी के दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप, जांच की मांग

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि कर्मचारियों की नियुक्ति, हटाने और दोबारा बहाली की प्रक्रिया में श्रम विभाग एवं नियोजन से संबंधित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन और सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।राहुल कुमार यादव ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जानी चाहिए, जो कर्मचारियों की नियुक्ति, हटाने, वेतन भुगतान, पीएफ कटौती और बहाली के नाम पर कथित पैसे की मांग से जुड़े आरोपों की जांच करे।

उन्होंने दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित कंपनी के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।

पूर्व कर्मचारियों की दोबारा बहाली की मांग

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, छपरा में पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों को फिर से बहाल करना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से काम करने के बाद अचानक रोजगार छिन जाने से उनके परिवारों पर आर्थिक संकट उत्पन्न हुआ है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि बहाली और नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए तथा किसी भी कर्मचारी से नौकरी के बदले अवैध राशि की मांग की जाती है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाए।

एक सप्ताह में निर्णय नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए एक सप्ताह के भीतर ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने शिवा प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड, जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

राहुल कुमार यादव ने कहा कि कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं और प्रशासन से मामले का समाधान कराने की अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारियों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

इन पदों पर काम करने वाले कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल

प्रदर्शन में विभिन्न पदों पर पूर्व में कार्यरत कर्मचारी शामिल हुए। इनमें हरेंद्र सिंह, रीना देवी, मनीषा देवी, पिंकी देवी, रिंकी देवी, अशोक मांझी, रागिनी देवी, देवंती देवी, छोटेलाल मांझी, प्रभावती देवी, सुमन देवी, माला देवी, धीरज कुमार, नेहा देवी, रामवती देवी, प्रियंका देवी, सुनीता देवी, बुन्नीलाल मांझी, चितरंजन मांझी, कृष्णा बैठा, लालमोहन मांझी, वीरेंद्र पासवान, वीरेंद्र मांझी, चंदन कुमार मांझी, आकाश शाह, राधेश्याम और सीमा देवी सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।

क्या है पूरा मामला?

कर्मचारियों के अनुसार विवाद मुख्य रूप से तीन बिंदुओं को लेकर है पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों को हटाया जाना, कथित तौर पर पुनर्बहाली के लिए पैसे की मांग और वेतन एवं पीएफ कटौती से संबंधित शिकायतें। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में कंपनी और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

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Ganpat Aryan
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वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

Ganpat Aryan

वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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