
छपरा। पत्नी की हत्या कर शव को गायब करने और साक्ष्य मिटाने के चर्चित मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम रविशंकर की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने परसा थाना क्षेत्र के हरपुर गांव निवासी अनिल सिंह को पत्नी किरण देवी की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
साक्ष्य मिटाने के जुर्म में तीन साल की सजा
न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध में आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं, साक्ष्य मिटाने के अपराध में धारा 201 के तहत तीन वर्ष के कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड की भी सजा दी गई। अदालत के आदेश के अनुसार दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक श्याम किशोर मिश्रा ने प्रभावी ढंग से पैरवी की। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों तथा गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी अनिल सिंह को दोषी माना और उसे सजा सुनाई।
वहीं, इस मामले में नामजद अन्य चार आरोपितों सुनील सिंह, चंदन सिंह, चंदन कुमार चौबे और संजय सिंह को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। अदालत ने कहा कि उनके विरुद्ध आरोप सिद्ध नहीं हो सके।
मृतका के भाई ने दर्ज करायी थी प्राथमिकी
जानकारी के अनुसार, मृतका किरण देवी के भाई उमेश सिंह ने 8 अप्रैल 2023 को परसा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विवाह के बाद से ही किरण देवी को लगातार प्रताड़ित किया जाता था। बाद में उसकी हत्या कर दी गई और शव को गायब कर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 11 गवाहों को प्रस्तुत किया, जिनकी गवाही और अन्य साक्ष्य अदालत के फैसले का आधार बने।
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करीब तीन वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने पति अनिल सिंह को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि चार अन्य आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
प्रमुख बिंदु
- पत्नी की हत्या कर शव गायब करने के मामले में पति को उम्रकैद
- हत्या के साथ साक्ष्य मिटाने का भी दोषी पाया गया आरोपी
- 20 हजार रुपये का अर्थदंड, नहीं देने पर अतिरिक्त कारावास
- 11 गवाहों की गवाही बनी फैसले का आधार
- चार सहआरोपितों को साक्ष्य के अभाव में मिली राहत
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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