बिहारस्वास्थ्य

NFHS-6 Survey Report: बिहार में ‘डबल हेल्थ संकट’! गांव में कुपोषण, शहरों में तेजी से बढ़ रहा मोटापा

कुपोषण, मोटापा, डायबिटीज और महिलाओं की स्थिति पर बड़ा संकेत

NFHS-6 Survey Report: बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक बदलाव को लेकर जारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6, 2023-24) की रिपोर्ट ने राज्य की बदलती तस्वीर को सामने रखा है। रिपोर्ट बताती है कि बिहार अब एक साथ दोहरी चुनौती से जूझ रहा है। एक तरफ गांवों में कुपोषण और कमजोरी अब भी गंभीर समस्या बनी हुई है, तो दूसरी तरफ शहरों में तेजी से बढ़ता मोटापा और लाइफस्टाइल बीमारियां चिंता बढ़ा रही हैं।

पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि NFHS के आंकड़े केवल आंकड़े नहीं, बल्कि बिहार के सामाजिक-आर्थिक बदलाव, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और लोगों की जीवनशैली में आए परिवर्तन की कहानी भी कहते हैं। यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं और स्वास्थ्य विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि अब केवल कुपोषण ही नहीं, बल्कि मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मानसिक-सामाजिक स्वास्थ्य पर भी समान रूप से काम करने की जरूरत है।

क्या है आंकड़ा

विषयNFHS-6 (2023-24) आंकड़ेNFHS-5 आंकड़ेस्थिति / निष्कर्ष
अंडरवेट महिलाएं25% के आसपासहर 4 में 1 महिला कुपोषण की शिकार
ग्रामीण महिलाओं में अंडरवेट27.2%गांवों में कुपोषण ज्यादा
ओवरवेट महिलाएं (Urban)30%कम थाशहरों में मोटापा तेजी से बढ़ा
ओवरवेट पुरुष (Urban)29.9%कम थालाइफस्टाइल बीमारी बढ़ी
हाई ब्लड शुगर महिलाएं13.1%थोड़ा कमडायबिटीज का खतरा बढ़ा
हाई ब्लड शुगर पुरुष17.3%थोड़ा कमपुरुषों में ज्यादा खतरा
हाई BP महिलाएं14.1%15.9%हल्का सुधार
हाई BP पुरुष17.8%18.4%फिर भी हर 6 में 1 प्रभावित
महिलाओं के बैंक अकाउंट90.9%76.7%बड़ा सुधार
महिलाओं का मोबाइल उपयोग62.8%51.4%डिजिटल पहुंच बढ़ी
सैनिटरी पैड उपयोग (15-24 वर्ष)63%59.2%पीरियड हाइजीन में सुधार
महिलाओं की नकद कमाई16.5%12.6%आर्थिक भागीदारी बढ़ी
घर के फैसलों में भागीदारी85.1%86.5%हल्की गिरावट
घरेलू हिंसा36.1%40.1%कमी आई लेकिन समस्या बड़ी
गर्भावस्था में हिंसा5.4%2.8%चिंताजनक बढ़ोतरी
तंबाकू सेवन महिलाएं4%ज्यादा थाकमी आई
तंबाकू सेवन पुरुष45.8%ज्यादा थाधीरे-धीरे कमी
शराब सेवन पुरुष16.5%15.4%हल्की बढ़ोतरी

बिहार में “डबल बर्डन” की चुनौती

NFHS-6 की सबसे बड़ी फाइंडिंग यह है कि बिहार में कुपोषण और मोटापा दोनों साथ-साथ मौजूद हैं। रिपोर्ट के अनुसार हर चार में से एक महिला और एक पुरुष का BMI सामान्य से कम है, यानी वे अंडरवेट हैं। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या और ज्यादा गंभीर है, जहां 27.2 प्रतिशत महिलाएं अब भी कुपोषण या कमजोरी की स्थिति में हैं।

वहीं दूसरी ओर शहरों में तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई देती है। अर्बन क्षेत्रों में लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं और 29.9 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। NFHS-5 की तुलना में इसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव बिहार में तेजी से बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड, कम शारीरिक श्रम और अनियमित दिनचर्या का असर है।

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का बढ़ता खतरा

रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में धीरे-धीरे डायबिटीज के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। 13.1 प्रतिशत महिलाओं और 17.3 प्रतिशत पुरुषों में ब्लड शुगर का स्तर अधिक पाया गया या वे पहले से इसकी दवा ले रहे हैं। पुरुषों में यह समस्या महिलाओं की तुलना में ज्यादा दिखाई दी।

हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में हल्का सुधार जरूर देखने को मिला है, लेकिन खतरा अब भी बड़ा है। महिलाओं में 14.1 प्रतिशत और पुरुषों में 17.8 प्रतिशत लोग हाई BP की समस्या से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य जांच की कमी के कारण कई लोग बीमारी का पता चलने से पहले ही गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं।

महिलाओं की स्थिति में सुधार, लेकिन चुनौतियां बाकी

NFHS-6 की रिपोर्ट में महिलाओं की आर्थिक और डिजिटल भागीदारी में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। 90.9 प्रतिशत महिलाओं के पास अब अपना बैंक अकाउंट है, जबकि NFHS-5 में यह आंकड़ा 76.7 प्रतिशत था। मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़कर 62.8 प्रतिशत हो गई है। 15 से 24 वर्ष की 63 प्रतिशत लड़कियां अब सैनिटरी पैड या साफ-सुथरे साधनों का इस्तेमाल कर रही हैं, जो पहले 59.2 प्रतिशत था। महिलाओं की नकद आय में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

हालांकि घरेलू फैसलों में महिलाओं की भागीदारी में हल्की गिरावट दर्ज हुई है। रिपोर्ट के अनुसार 85.1 प्रतिशत महिलाएं परिवार के बड़े फैसलों में भाग लेती हैं, जबकि NFHS-5 में यह आंकड़ा 86.5 प्रतिशत था।

घरेलू हिंसा अब भी गंभीर सामाजिक संकट

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में घरेलू हिंसा की समस्या अब भी चिंताजनक बनी हुई है। 36.1 प्रतिशत शादीशुदा महिलाओं ने स्वीकार किया कि उन्होंने कभी न कभी पति द्वारा हिंसा झेली है। हालांकि NFHS-5 की तुलना में इसमें करीब 4 प्रतिशत की कमी आई है, जिसे सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में वृद्धि चिंता बढ़ाने वाली है। NFHS-6 में 5.4 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान भी उनके साथ हिंसा हुई, जबकि पहले यह आंकड़ा 2.8 प्रतिशत था।

पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ इसे “डेंजर साइन” मान रहे हैं क्योंकि इसका सीधा असर मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।

तंबाकू कम हुआ, शराब का सेवन बढ़ा

रिपोर्ट के अनुसार बिहार में तंबाकू सेवन में कमी आई है। महिलाओं में 4 प्रतिशत और पुरुषों में 45.8 प्रतिशत लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जो पहले की तुलना में कम है। हालांकि शराब सेवन के मामलों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पुरुषों में 16.5 प्रतिशत लोग शराब पीते हैं, जबकि NFHS-5 में यह आंकड़ा 15.4 प्रतिशत था।

स्वास्थ्य नीति के लिए बड़ा संकेत

पब्लिक हेल्थ प्रैक्टिशनर्स का मानना है कि NFHS-6 बिहार के लिए केवल हेल्थ रिपोर्ट नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का आईना है। रिपोर्ट यह संकेत देती है कि अब स्वास्थ्य नीतियों को केवल कुपोषण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। बिहार को अब “डबल बर्डन” यानी कुपोषण और मोटापे दोनों से एक साथ लड़ना होगा। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, लाइफस्टाइल डिजीज और ग्रामीण स्वास्थ्य जांच प्रणाली को मजबूत करना आने वाले वर्षों की बड़ी जरूरत होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते संतुलित पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, जागरूकता अभियान और महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा पर प्रभावी काम नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में बिहार के सामने गैर-संचारी बीमारियों का खतरा और बड़ा हो सकता है।

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Ganpat Aryan
Ganpat Aryan
वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

Ganpat Aryan

वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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