डिग्री नहीं, हुनर बनेगा रोजगार की चाबी; राजेंद्र कॉलेज में वोकेशनल छात्रों को मिला मंत्र
कौशल विकसित करेंगे तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

छपरा। बदलते रोजगार बाजार में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के पास विषय से जुड़ा व्यावहारिक ज्ञान और आवश्यक कौशल भी होना जरूरी है। इसी दिशा में व्यावसायिक पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के लिए रोजगार के नए अवसरों का रास्ता खोल सकते हैं। यह बातें जयप्रकाश विश्वविद्यालय के वोकेशनल निदेशक प्रो. अजीत कुमार तिवारी ने सोमवार को राजेंद्र कॉलेज में आयोजित व्यावसायिक विषयों के विद्यार्थियों के दीक्षारंभ (इंडक्शन) कार्यक्रम में कहीं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार वाजपेयी के प्रयास से विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में पिछले वर्ष से विधिवत रूप से व्यावसायिक विषयों की पढ़ाई शुरू हुई है। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ रोजगारपरक ज्ञान और कौशल उपलब्ध कराना है।
कौशल विकसित करेंगे तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
प्रो. अजीत तिवारी ने विद्यार्थियों से कहा कि वोकेशनल विषयों में पढ़ाई करने वाले युवाओं के सामने रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। लेकिन इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए विद्यार्थियों को अपने विषय से संबंधित कौशल, तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक ज्ञान लगातार विकसित करना होगा।
उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ प्रयोगात्मक गतिविधियों, तकनीकी प्रशिक्षण और अपने क्षेत्र में हो रहे बदलावों से परिचित रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कंपनियां और संस्थान केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं, बल्कि काम करने की क्षमता और व्यावहारिक दक्षता को भी महत्व देते हैं।
वोकेशनल शिक्षा को मजबूत करने को प्रतिबद्ध कॉलेज प्रशासन
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजेंद्र कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय कुमार ने कहा कि कॉलेज प्रशासन व्यावसायिक विषयों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ संबंधित विषयों के लिए आवश्यक प्रयोगशाला सुविधाओं को विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने घोषणा की कि वोकेशनल पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए ड्रेस कोड लागू किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात भी कही। प्राचार्य ने कहा कि कॉलेज में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को केवल कक्षा तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को व्यावहारिक और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम और गतिविधियों की दी गई जानकारी
कार्यक्रम का संचालन करते हुए बीसीए के समन्वयक डॉ. प्रशांत सिंह ने विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने इंडक्शन कार्यक्रम के उद्देश्य और विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को कॉलेज में उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों, कक्षा संचालन और व्यावसायिक पाठ्यक्रम की पढ़ाई के दौरान अपनाई जाने वाली गतिविधियों से भी अवगत कराया।
सिर्फ डिग्री नहीं, रोजगार की तैयारी पर जोर
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार और करियर के लिए तैयार करना है। बदलते तकनीकी दौर में कंप्यूटर, प्रबंधन, मीडिया, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की मांग बढ़ रही है। ऐसे में विद्यार्थियों को अपने पाठ्यक्रम के साथ संचार क्षमता, तकनीकी दक्षता, टीमवर्क और समस्या समाधान जैसे कौशल विकसित करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
बीसीए, बीबीए, बीएमसी और बायोटेक्नोलॉजी के विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम में राजेंद्र कॉलेज में संचालित विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी और शिक्षक मौजूद रहे। इनमें बीसीए, बीबीए, बीएमसी और बायोटेक्नोलॉजी के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में बायोटेक्नोलॉजी की कोर्स समन्वयक डॉ. ज्योत्सना त्रिपाठी, बीएमसी समन्वयक डॉ. सुनील प्रसाद, बीसीए के शिक्षक अभिनंदन कुमार, बीबीए के शिक्षक सुबोध कुमार, मो. शाहिद अली और विश्वविजय सिंह सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन बीबीए के समन्वयक डॉ. देवेश रंजन ने किया।
वोकेशनल पाठ्यक्रमों पर मुख्य जोर
राजेंद्र कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा के साथ कौशल विकास, प्रयोगात्मक प्रशिक्षण और रोजगार की तैयारी पर विशेष ध्यान देने का संदेश दिया गया। कॉलेज प्रशासन ने भी प्रयोगशाला, डिजिटल एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में नए शैक्षणिक सत्र को लेकर उत्साह बढ़ाया और उन्हें यह संदेश दिया कि सही कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और निरंतर सीखने की आदत के साथ वोकेशनल शिक्षा रोजगार और बेहतर करियर की मजबूत आधारशिला बन सकती है।
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