
पटना। राजधानी पटना स्थित आईजीआईएमएस में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया। नालंदा जेल में सजा काट रहा 23 वर्षीय कैदी कई महीनों पहले नशे की हालत में धातु के नुकीले तार और पेंसिल के टुकड़े निगल गया था। पेट में दर्द बढ़ने पर जब उसकी जांच की गई तो एक्स-रे में पेट के भीतर कई नुकीली धातु सामग्री पाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजीआईएमएस के डॉक्टरों ने तुरंत एंडोस्कोपी कर सभी अवयवों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। अस्पताल प्रशासन ने इसे एक दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण केस बताया है।
कैदी को जांच के लिए पटना रेफर किया गया
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि नालंदा जिले का रहने वाला 23 वर्षीय सजायाफ्ता कैदी पेट दर्द की शिकायत पर नालंदा जेल से बेउर जेल लाया गया था। वहां से उसे चिकित्सीय जांच हेतु पीएमसीएच भेजा गया। पीएमसीएच में अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट, और एक्स-रे किए गए। एक्स-रे में उसके पेट के भीतर धातु के कई तार और पेंसिल के अवशेष पाए गए। इसके बाद उसे बेहतर इलाज हेतु आईजीआईएमएस रेफर किया गया।
एंडोस्कोपी में मिला चौकाने वाला दृश्य — आंत में फंसे थे तार और पेंसिल
डॉ. मंडल ने बताया कि रिपोर्ट देखने के बाद, और आंतरिक रक्तस्राव के लक्षण न मिलने पर, डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी का निर्णय लिया। एंडोस्कोपी में पाया गया कि कैदी की छोटी आंत में चार धातु के नुकीले तार और दो पेंसिल के हिस्से फंसे हुए थे। यह स्थिति बेहद जोखिम भरी थी, क्योंकि ये धातु के तार आंतों की दीवार को फाड़ सकते थे, छेद कर सकते थे, गंभीर रक्तस्राव करा सकते थे, तथा पाचन तंत्र को अवरुद्ध कर जानलेवा हालत बना सकते थे।
कुशलता से निकाले गए सभी नुकीले अवयव
गंभीर परिस्थिति को देखते हुए एंडोस्कोपी द्वारा अवयव निकालने के लिए टीम गठित की गई जिसका नेतृत्व डॉ. राहुल कुमार, सहायक प्राध्यापक, गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग ने किया। आपातकाल की स्थिति से निपटने हेतु गैस्ट्रो सर्जरी टीम को भी अलर्ट रखा गया। डॉ. राहुल कुमार ने बताया कि कैदी ने लगभग पाँच महीने पहले नशे की हालत में तार और पेंसिल निगल ली थी। इतने महीनों तक पेट और आंत में नुकीली वस्तुओं का बना रहना अत्यंत खतरनाक स्थिति थी, जिससे उल्टी, तेज पेट दर्द, और मलत्याग अवरुद्ध होने की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। टीम की सावधानी और विशेषज्ञता से सभी वस्तुएं सुरक्षित रूप से बाहर निकाल ली गईं।
आईजीआईएमएस निदेशक ने की चिकित्सकों की सराहना
संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदेश्वर कुमार ने कहा कि ऐसे मामले बहुत ही दुर्लभ होते हैं, लेकिन आईजीआईएमएस की कुशल टीम ने अत्यंत जोखिमपूर्ण चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने डॉ. संजीव, डॉ. राहुल कुमार और पूरी मेडिकल टीम को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई दी। यह मामला न केवल चिकित्सकों की दक्षता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि नशे की हालत में किया गया एक खतरनाक कदम जीवन पर कितना गंभीर असर डाल सकता है।
Author Profile

- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
Latest entries
- August 27, 2026क्राइमChhapra News: पड़ोसियों से विवाद पड़ा भारी, मारपीट के 9 दिन बाद महिला की मौत, हत्या मामले में तीन गिरफ्तार
- August 27, 2026क्राइमChhapra Court: साढ़े पांच साल जेल में काटे, अब मिली बेगुनाही की आजादी; बेटे की हत्या के आरोप से बाइज्जत बरी हुई बबली खातून
- August 27, 2026क्राइमChhapra Crime News: सारण का कुख्यात ‘टाइगर’ आखिरकार पुलिस के शिकंजे में, STF ने रचा गिरफ्तारी का जाल
- August 27, 2026छपरासारण में जयप्रभा सेतु से उफनती सरयू नदी में कूदी इंजीनियरिंग की छात्रा, तेज धारा में बहकर हुई लापता



