Death of National Bird: छपरा जंक्शन पर राष्ट्रीय पक्षी की मौत, पोस्टमार्टम के बाद राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
डॉक्टर बोले – प्रथम दृष्टया प्राकृतिक मौत, लेकिन जांच जारी

छपरा। छपरा जंक्शन पर उस समय सनसनी फैल गई जब प्लेटफॉर्म नंबर एक के पूर्वी हिस्से स्थित रेलवे यार्ड में राष्ट्रीय पक्षी मोर का शव संदिग्ध हालात में पाया गया। इस घटना ने रेलवे और वन विभाग दोनों को अलर्ट मोड में ला दिया। मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर वेटनरी कॉलेज, छपरा में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमॉर्टम के बाद मोर के शव का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
सोशल मीडिया से हुआ खुलासा
इस घटना की शुरुआत उस समय हुई जब एक राहगीर ने मोर के शव की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी। तस्वीर वायरल होते ही रेलवे पुलिस को इसकी भनक लगी और रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। रातभर रेलवे यार्ड में सर्च ऑपरेशन चला और अंततः शव बरामद किया गया।
RPF इंस्पेक्टर विनोद कुमार के अनुसार, शव लॉन्ड्री एरिया के पास मिला था। शव बरामद होते ही जिला वन पदाधिकारी को सूचित किया गया, जिनकी देखरेख में शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।
डॉक्टर बोले – प्रथम दृष्टया प्राकृतिक मौत, लेकिन जांच जारी
| प्रथम दृष्टया मोर की मौत प्राकृतिक प्रतीत होती है, लेकिन पूर्ण पुष्टि के लिए कुछ अंगों को आगे की जांच हेतु भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह महज एक प्राकृतिक मौत थी या शिकार/तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधि से जुड़ी हुई है। डॉ. जयशंकर कुमार, वेटरनरी कॉलेज के पशु चिकित्सक |
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छपरा जैसे शहर में मोर की मौजूदगी पर सवाल
छपरा शहरी क्षेत्र में मोर की उपस्थिति ने वन्यजीव विभाग को भी चौंका दिया है, क्योंकि सारण प्रमंडल में अब तक मोर की उपस्थिति को लेकर कोई औपचारिक जानकारी या दस्तावेज नहीं है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि शायद मोर को कहीं से अवैध रूप से लाया जा रहा था और उसकी रास्ते में मृत्यु हो गई, जिसके बाद शव को चुपचाप यार्ड में फेंक दिया गया।
वन विभाग कर रहा है गहन जांच
वन विभाग ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य तकनीकी जांच के बाद ही यह तय होगा कि यह वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन का मामला है या नहीं।
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यदि यह शिकार या तस्करी से जुड़ा मामला पाया गया, तो वन विभाग संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करेगा। वन अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय पक्षी मोर को भारत में पूर्ण रूप से संरक्षित दर्जा प्राप्त है, और इसकी मौत या तस्करी पर सख्त कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
क्या कहता है कानून?
भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत मोर को शेड्यूल-I में रखा गया है, जिसके अंतर्गत इसे सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है। इसके शिकार, कब्जा, तस्करी या मौत की दशा में 7 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
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अंतिम संस्कार भी हुआ सम्मान के साथ
मोर के शव का पोस्टमॉर्टम होने के बाद वन विभाग द्वारा पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया। मौके पर वन विभाग के अधिकारियों ने नम आंखों से पक्षी को विदाई दी। यह प्रक्रिया वन्य जीवों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का प्रतीक मानी जा रही है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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