
छपरा | कृषि प्रधान सारण जिला इस समय गहरे सिंचाई संकट से जूझ रहा है। जिले के लगभग 5.40 लाख किसान, जिनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है, मानसून की अनिश्चितता और सरकारी सिंचाई तंत्र की बदहाली के कारण काफी परेशान हैं। खेतों में पानी नहीं, नहरें सूखी, और सरकारी नलकूपों का हाल बेहद खराब है। ऐसे में खरीफ और रबी दोनों फसलों की बुआई संकट में घिर गई है।
नहरों पर खर्च 3 अरब, फिर भी सूखी हैं धाराएं
सरकार ने सारण प्रमंडल में नहरों के जीर्णोद्धार पर 3 अरब रुपये खर्च किए, लेकिन जमीनी हालात जस के तस हैं। नहरों में पानी न होने से किसान जुताई और बुआई शुरू करने से पहले ही चिंतित हैं। खासकर सब्जी उत्पादक किसानों पर इसका सीधा असर पड़ा है।
सारण में वृक्षारोपण का बनेगा नया रिकॉर्ड, 16 लाख से अधिक पौधा लगाने का संकल्प |
377 में सिर्फ 122 नलकूप चालू
| श्रेणी | संख्या |
|---|---|
| कुल सरकारी नलकूप | 377 |
| चालू नलकूप | 122 |
| बंद नलकूप | 215 |
| पूरी तरह असफल नलकूप | 40 |
| बंद होने का कारण | संख्या |
|---|---|
| विद्युत दोष | 11 |
| तकनीकी दोष | 17 |
| विद्युत + तकनीकी दोष | 101 |
| अन्य कारण | 89 |
किसान निजी खर्च पर कर रहे सिंचाई
करीब 1.60 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जिम्मेदारी मात्र 122 चालू नलकूपों पर है, जो पूरी तरह अपर्याप्त है। ऐसे में किसान या तो निजी बोरिंग कर रहे हैं या पंपसेट से सिंचाई, जिससे उनकी आर्थिक हालत दोहरी मार झेल रही है – एक ओर महंगे डीजल या बिजली के खर्च, दूसरी ओर फसल की अनिश्चित पैदावार।
संचालन पंचायतों को सौंपने की योजना, पर नहीं मिल रहा साथ
सरकार ने चालू नलकूपों के संचालन की जिम्मेदारी पंचायतों, पैक्स और जीविका समूहों को सौंपने की योजना बनाई है। बिजली बिल और मरम्मत खर्च सरकार देगी, लेकिन संचालन की जवाबदेही स्थानीय इकाइयों पर होगी। हालांकि, अधिकतर पंचायतें और पैक्स इस जिम्मेदारी को लेने से कतराती दिख रही हैं।
Swadesh Darshan Scheme: सोनपुर मेला बनेगा वैश्विक पर्यटन हब, 24.28 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी |
संकट बना रहा तो खाद्य सुरक्षा पर भी खतरा
अगर जल्द ही नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया और बंद पड़े नलकूपों को चालू नहीं किया गया, तो खरीफ और रबी फसलों की पैदावार बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। यह संकट सिर्फ किसानों की आर्थिक हालत नहीं, बल्कि जिले की खाद्य सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकता है।
सारण में RERA के नियमों का उल्लंघन करने वाली 21 डेवलपर कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई |
क्या कहता है यह संकट?
यह संकट सिर्फ प्राकृतिक कारणों की देन नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, संसाधनों के असमान वितरण और योजना के फेल क्रियान्वयन का परिणाम है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और सरकार इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर क्या ठोस कदम उठाती है।
Author Profile

- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
Latest entries
- August 26, 2026करियर – शिक्षाJob Alert: छपरा में नौकरी का मौका, 20 शिक्षकों की होगी भर्ती, 14,500 रुपये वेतन के साथ रूम रेंट और बोनस भी
- August 26, 2026क्राइमBihar Crime News: बिहार में 3 अपराधियों को मिली फांसी की सजा, 124 को अभियुक्तों को उम्रकैद
- August 26, 2026छपराChhapra Crime News: सरयू नदी किनारे मिला 40 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति का शव, पहचान में जुटी पुलिस
- August 26, 2026क्राइमChhapra Court News: एक दशक पुराने हत्याकांड के अभियुक्त को कोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा



