रेलवे ने 50 हजार KM पुराने रेल ट्रैक को हटाकर नये ट्रैक को बिछाया, सुरक्षा को मिली प्राथमिकता

रेल न्यूज डेस्क। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में भारतीय रेलवे की प्रगति, सुरक्षा, तकनीकी सुधार और वैश्विक सफलता पर विस्तार से बात की। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय रेलवे द्वारा किए गए महत्वपूर्ण बदलावों और सुधारों को साझा किया, जिनसे रेल यात्रा को न केवल सुरक्षित बल्कि अधिक आधुनिक और प्रभावशाली बनाया गया है।
रेल मंत्री ने भारतीय रेलवे में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई तकनीकी कदमों का उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाना है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और फॉग सेफ्टी डिवाइस जैसे महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं, जिन्होंने दुर्घटनाओं की संख्या में कमी की है और सुरक्षा के स्तर को और ऊंचा किया है।
इसके अतिरिक्त, पुराने ट्रैक की स्थिति में सुधार करने के लिए 50,000 किलोमीटर पुराने ट्रैक को हटा कर नए ट्रैक बिछाए गए हैं। यह कदम सुरक्षा के साथ-साथ ट्रेन की गति और यात्रा की सुविधा को भी बेहतर बनाता है। इसके अलावा, 34,000 किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बनाए गए हैं, जो कि खुद में एक बड़ी उपलब्धि है। यह नए ट्रैक जर्मनी के पूरे रेल नेटवर्क से भी अधिक हैं, जिससे यह साबित होता है कि भारतीय रेलवे में इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भी भारी निवेश और सुधार हो रहा है।
लोकोमोटिव उत्पादन में भारतीय सफलता
भारतीय रेलवे ने लोकोमोटिव उत्पादन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत ने 1,400 लोकोमोटिव का उत्पादन किया है, जो अमेरिका और यूरोप के कुल उत्पादन से अधिक है। यह भारत के स्वदेशी उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय रेलवे अब तकनीकी दृष्टि से अत्याधुनिक लोकोमोटिव का निर्माण कर रहा है, जो न केवल भारतीय रेलवे को लाभ पहुंचा रहा है बल्कि विदेशी बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहा है।
वैश्विक मंच पर भारतीय रेलवे की बढ़ती उपस्थिति
भारतीय रेलवे ने अब वैश्विक मंच पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। रेल मंत्री ने सदन में जानकारी दी कि आज भारत एक प्रमुख रेलवे निर्यातक बन चुका है। उन्होंने बताया कि भारत से अब विभिन्न देशों को मेट्रो कोच, रेल कोच और ऑपरेशन इक्विपमेंट निर्यात किए जा रहे हैं। खासतौर से, ऑस्ट्रेलिया को मेट्रो कोच, यूके, सऊदी अरब और फ्रांस को रेल कोच, और मैक्सिको, स्पेन, जर्मनी और इटली को ऑपरेशन इक्विपमेंट निर्यात किए जा रहे हैं।
यह भारत के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि यह दर्शाता है कि भारतीय रेलवे का नेटवर्क और तकनीकी विशेषज्ञता वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर रही है।
भारत की सफलता का गर्वपूर्ण क्षण
श्री वैष्णव ने सदन को यह जानकारी भी दी कि जल्द ही बिहार में बने लोकोमोटिव का दुनिया में डंका बजेगा। तमिलनाडु में निर्मित पहिए अब दुनिया के दूसरे देशों की ट्रेनों में भी दौड़ते हुए नजर आएंगे। यह भारतीय रेलवे के लिए एक गर्व का क्षण होगा, क्योंकि यह दर्शाता है कि भारत अब रेलवे क्षेत्र में एक प्रमुख ग्लोबल खिलाड़ी बन चुका है।
रेल मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय रेलवे की सफलता से देश की प्रगति को भी बल मिलेगा। उन्होंने सदन से यह आह्वान किया कि सभी को ‘राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम’ की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए ताकि भारत का विकास और गति पकड़ सके।
वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान
अश्विनी वैष्णव के संबोधन ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय रेलवे न केवल देश की आंतरिक जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है। रेलवे के क्षेत्र में हो रहे सुधार, जैसे कि सुरक्षा, नई तकनीकी पहलों, और लोकोमोटिव उत्पादन में वृद्धि, भारतीय रेलवे को एक नई दिशा में ले जा रहे हैं। इसके साथ ही, भारत का रेलवे निर्यात भी दुनिया भर में फैल रहा है, जो भारतीय रेलवे के लिए गर्व की बात है और देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करेगा।
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