सारण का ‘आर्मी गांव’, हर घर से निकलता है सैनिक, जहां फौज में शामिल होना समझा जाता है धर्म

छपरा। सारण जिले के मांझी प्रखण्ड स्थित धर्मपुरा गांव…यहां के युवा फौज में ही जाना अपना धर्म समझते हैं। होश संभालते ही सेना की तैयारी में लग जाते हैं। यहां के दर्जनों लाल सेना में अधिकारी एवं जवान के रूप में देश सेवा में लगे हैं।धर्मपुरा के लोग बड़े फख्र से बताते हैं कि उनका बेटा सेना में अधिकारी है। यहां के युवकों का उत्साह एवं जोश का ही प्रतिफल है कि हर वर्ष गांव से दो-चार लड़कों का चयन सेना में होता है। कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनकी दो- दो पीढ़ियां सेना में हैं। कुल करीब 4500 की आबादी और 250 घर वाले इस गांव से 350 से अधिक जवान फौज में हैं।
सेना में जाना ही धर्म
आर्मी में कैप्टन रहे सेवानिवृत्त दामोदर सिंह के दो पुत्र राजेश कुमार सिंह एवं संजीव कुमार सिंह आर्मी में अफसर हैं। जबकि एक पुत्री आर्मी में ही डॉक्टर हैं। इसी तरह बीएसएफ से सेवानिवृत्त रामेश्वर सिंह के पुत्र अभिमन्यु कुमार सिंह कमांडेंट हैं। जितेंद्र सिंह की पुत्री सावित सिंह कर्नल हैं। सेवानिवृत्त फौजी शिव कुमार सिंह के एक पुत्र और तीन पोते सेना में विभिन्न पदों पर हैं। प्रधानमंत्री के सुरक्षा दस्ते (एनएसजी) में कई वर्षों तक रहे एनके सिंह के परिवार के कई लोग फौज में हैं। गांव के उमेश पाठक सीआरपीएफ में बड़े पद पर हैं। राजकिशोर पाठक के पुत्र समीर पाठक और असम राइफल्स गोवाहाटी में तैनात नंदकिशोर पाठक के पुत्र अमित कुमार पाठक सेना में डॉक्टर हैं।


इसी तरह सुबोध कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, विपिन सिंह आदि दर्जनों नाम हैं जो फख्र से इस गांव का सीना ऊंचा करते हैं। फौजी संतोष सिंह, विपिन सिंह, सुबोध सिंह कहते हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा करने में हम अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं। पंचायत के मुखिया राजेश पाण्डेय बताते हैं कि बरेजा पंचायत स्थित धर्मपुरा के युवा सेना में जाने के लिए प्रतिदिन कड़ी मेहनत करते हैं। हर साल इस गांव के युवाओं का सेना में विभिन्न पदों पर चयन होता है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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