सारण में पेयजल संकट से निपटने की तैयारी, एक कॉल पर बंद पड़े चापाकलों की होगी मरम्मती
जिलाधिकारी ने मरम्मति दल को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

छपरा: आगामी गर्मी के मौसम को देखते हुए सारण जिले में पेयजल की सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में खराब पड़े सरकारी चापाकलों की मरम्मत के लिए विशेष मरम्मति दल का गठन किया गया है। सोमवार को जिलाधिकारी ने इन मरम्मति दलों को हरी झंडी दिखाकर विभिन्न प्रखंडों के लिए रवाना किया, ताकि बंद पड़े चापाकलों की जल्द से जल्द मरम्मत कर आम लोगों को राहत दी जा सके।
टीम भ्रमण कर बंद पड़े चापाकलों की पहचान करेगी
जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा प्रत्येक प्रखंड में प्रखंडवार चापाकल मरम्मति दल गठित किया गया है। ये दल पंचायतवार क्षेत्र का भ्रमण कर खराब या बंद पड़े चापाकलों की पहचान करेंगे और युद्धस्तर पर उनकी मरम्मत का कार्य करेंगे। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि आगामी मई माह तक जिले में बंद पड़े सभी सार्वजनिक चापाकलों को चालू कर दिया जाए, ताकि भीषण गर्मी के दौरान पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार सारण जिले में विभिन्न मदों से कुल 32,492 चापाकल स्थापित हैं। इनमें से इस वर्ष 3,116 चापाकलों की मरम्मत का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें IM-II और IM-III श्रेणी के 2,326 चापाकल तथा सिंगुर/ऑर्डिनरी श्रेणी के 790 चापाकल शामिल हैं। इन सभी की मरम्मत कर उन्हें पुनः चालू किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंताओं को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित करें। इसके तहत सांसद, विधायक, पार्षद, प्रखंड विकास पदाधिकारी, मुखिया एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर बंद या अकार्यरत चापाकलों की सूची प्राप्त कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस नंबर पर कॉल कर दे सकते है जानकारी
इसी के साथ चापाकलों की मरम्मत से संबंधित शिकायतों के लिए जिला स्तर पर एक जिला नियंत्रण कक्ष का भी गठन किया गया है। इसका दूरभाष नंबर 06152-244791 जारी किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग कार्यालय अवधि में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक इस नंबर पर संपर्क कर खराब चापाकलों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
जिला प्रशासन का कहना है कि इस पहल से गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा और लोगों को स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
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- अंकिता कुमारी पत्रकारिता की छात्रा हैं। वर्तमान में वह संजीवनी समाचार डॉट कॉम के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं और समाचार लेखन व फील्ड रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।
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