सारण के इस गांव ने बदल दी वर्षों पुरानी परंपरा! मृत्यु भोज पर लगाया सामाजिक ब्रेक
मुकरेरा गांव में मृत्यु भोज के बहिष्कार का ऐतिहासिक फैसला

छपरा। सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड अंतर्गत मुकरेरा गांव में सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ग्रामीणों ने पंचायत भवन में आयोजित सभा में मृत्यु भोज के आयोजन का बहिष्कार करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया।
गांव के बुजुर्गों, युवाओं और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे ग्रामीणों ने समाज के लिए सकारात्मक कदम बताया।
सभा को संबोधित करते हुए पप्पू सिंह ने कहा कि हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में भी मृत्यु भोज को केवल असहाय और जरूरतमंद लोगों तक सीमित रखने की बात कही गई है।
उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि मृत्यु भोज न तो खिलाने वाले के लिए सुखद होता है और न ही खाने वाले के लिए, इसलिए इसे सामाजिक दिखावा और आडंबर से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान समय में मृत्यु भोज की परंपरा कई परिवारों पर आर्थिक बोझ बनती जा रही है।
कई लोग सामाजिक दबाव में कर्ज लेकर ऐसे आयोजन करते हैं, जो उचित नहीं है। ऐसे में इस परंपरा को रोककर समाज में सादगी और जागरूकता का संदेश देना जरूरी है।
सभा में मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक साबित होगा और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करेगा।
कार्यक्रम में उपमुखिया रोहित सिंह टिंकू सहित गांव के कई गणमान्य लोग, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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- अंकिता कुमारी पत्रकारिता की छात्रा हैं। वर्तमान में वह संजीवनी समाचार डॉट कॉम के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं और समाचार लेखन व फील्ड रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।
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