क्राइमछपरा

FIR में आपका नाम और मोबाइल नंबर है? सावधान! पुलिस बनकर फोन कर रहे साइबर ठग, गिरफ्तारी का डर दिखाकर मांग रहे पैसे

सारण के एसएसपी ने साइबर फ्रॉड को लेकर किया अलर्ट

छपरा। अब FIR दर्ज कराना या किसी मामले में शिकायतकर्ता अथवा आरोपी होना भी साइबर अपराधियों के लिए ठगी का जरिया बनता जा रहा है। अपराधी सरकारी पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध FIR डाउनलोड कर उसमें दर्ज नाम, मोबाइल नंबर और अन्य जानकारियां जुटा रहे हैं। इसके बाद संबंधित लोगों को फोन कर खुद को पुलिस अधिकारी बताते हैं और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। केस में राहत दिलाने, गिरफ्तारी रुकवाने या कानूनी कार्रवाई से बचाने के नाम पर की जा रही इस ठगी को लेकर सारण पुलिस ने आम लोगों को सतर्क किया है।

 वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साइबर अपराधियों के इस नए तरीके की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अपराधी बिहार राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB) के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध FIR का दुरुपयोग कर रहे हैं। FIR में दर्ज शिकायतकर्ता, अभियुक्त और अन्य संबंधित व्यक्तियों की जानकारी हासिल करने के बाद उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि पुलिस अधिकारी बनकर फोन करने वाले किसी भी अनजान व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और पैसे देने से पहले संबंधित थाने से जानकारी की पुष्टि जरूर करें।

FIR डाउनलोड कर जुटा रहे हैं लोगों की जानकारी

पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराधी SCRB बिहार के आधिकारिक पोर्टल से FIR डाउनलोड करते हैं। इसके बाद उसमें दर्ज वादी, अभियुक्तों के नाम, मोबाइल नंबर और अन्य उपलब्ध विवरण का इस्तेमाल कर लोगों से संपर्क करते हैं। चूंकि फोन करने वाले व्यक्ति के पास संबंधित केस की वास्तविक जानकारी होती है, इसलिए कई बार लोग उसे पुलिस अधिकारी समझकर उसकी बातों में आ जाते हैं।

अपराधी फोन पर खुद को पुलिस पदाधिकारी बताकर संबंधित व्यक्ति को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि उसके खिलाफ दर्ज मामले में गिरफ्तारी हो सकती है या पुलिस कार्रवाई होने वाली है। इसके बाद डर का माहौल बनाकर केस में राहत दिलाने, गिरफ्तारी से बचाने अथवा कानूनी कार्रवाई रुकवाने के नाम पर पैसों की मांग की जाती है।

पुलिस की पहचान और कार्यप्रणाली का कर रहे दुरुपयोग

इस तरह के साइबर फ्रॉड में अपराधी केवल लोगों की निजी जानकारी का इस्तेमाल नहीं कर रहे, बल्कि पुलिस की पहचान और कार्यप्रणाली की नकल करके लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश भी कर रहे हैं। FIR में मौजूद वास्तविक जानकारियों के कारण फोन कॉल सुनने वाले व्यक्ति को यह लग सकता है कि सामने से कोई अधिकृत पुलिस अधिकारी ही बात कर रहा है।

सारण पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति के फोन पर गिरफ्तारी का भय दिखाने या केस में राहत दिलाने के नाम पर पैसे नहीं देने चाहिए। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पैसे मांगता है, तो उसकी पहचान और दावे की पुष्टि संबंधित थाना से करनी चाहिए।

इन पांच बातों का रखें ध्यान

सारण पुलिस ने आम नागरिकों से साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है।

  1. घबराएं नहीं: किसी संदिग्ध कॉल पर गिरफ्तारी या केस में कार्रवाई की धमकी मिलने पर घबराने के बजाय संबंधित थाना से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करें।
  2. गोपनीय जानकारी साझा न करें: OTP, बैंक खाते की जानकारी, ATM PIN और UPI PIN किसी भी अनजान व्यक्ति को न बताएं।
  3. पैसे न दें: पुलिस अधिकारी बनकर केस में राहत दिलाने या गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पैसे मांगने वालों के झांसे में न आएं।
  4. पुलिस को सूचना दें: ऐसे संदिग्ध फोन कॉल, संदेश या गतिविधि की जानकारी तत्काल स्थानीय थाना को दें।
  5. ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें: यदि साइबर ठगी का शिकार हो जाएं तो बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

डर और जल्दबाजी में न लें कोई फैसला

सारण पुलिस ने लोगों से अपील की है कि साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है। पुलिस अधिकारी के नाम पर पैसे की मांग किए जाने पर सीधे संबंधित थाने से संपर्क करें। जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह की साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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Ganpat Aryan
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वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

Ganpat Aryan

वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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