छपरा शहर के श्यामचक में कूड़े के पहाड़ पर NGT का शिकंजा, नगर निगम की बढ़ीं मुश्किलें
डीएम की अगुवाई में हाईलेवल जांच समिति गठित"

छपरा। छपरा नगर निगम द्वारा शहर के श्यामचक मोहल्ले में 300 टन से अधिक कूड़ा डंप किए जाने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले की सुनवाई एनजीटी की ईस्टर्न जोन बेंच, कोलकाता में हुई, जहां न्यायाधिकरण ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का आदेश दिया। साथ ही छपरा नगर निगम, जिला पदाधिकारी सारण, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
यह मामला श्यामचक मोहल्ले में लंबे समय से बड़े पैमाने पर कूड़ा डंप किए जाने से उत्पन्न पर्यावरणीय संकट और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभाव से जुड़ा है। इस संबंध में वेटरन्स फोरम फॉर ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक लाइफ से जुड़ी ज्योति कुमारी ने एनजीटी में जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उपेंद्र प्रसाद यादव ने न्यायाधिकरण के समक्ष पक्ष रखा।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर चिंता
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि श्यामचक मोहल्ले में 300 टन से अधिक कचरा खुले में डंप किए जाने से क्षेत्र में गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो गया है। कूड़े के विशाल ढेर से उठने वाली दुर्गंध के कारण स्थानीय लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका, मच्छरों और अन्य कीटों का प्रकोप बढ़ने तथा भू-जल के दूषित होने जैसे गंभीर खतरे भी न्यायाधिकरण के समक्ष रखे गए।
याचिका में यह भी कहा गया कि यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निस्तारण नहीं किया गया तो स्थिति और भयावह हो सकती है तथा इसका असर आसपास के हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
डीएम की अध्यक्षता में गठित हुई तीन सदस्यीय समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने मौके की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है।
समिति का नेतृत्व सारण के जिला पदाधिकारी करेंगे। इसके अलावा समिति में बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव तथा बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि अथवा संबंधित अधिकारी को सदस्य बनाया गया है।
यह समिति श्यामचक स्थित डंपिंग स्थल का स्थलीय निरीक्षण करेगी और यह जांच करेगी कि ठोस कचरा प्रबंधन के निर्धारित मानकों का पालन किया गया या नहीं। साथ ही पर्यावरणीय मानकों, स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों तथा कचरा निस्तारण की व्यवस्था का विस्तृत मूल्यांकन कर अपनी रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
चार पक्षों को जारी होगा नोटिस
एनजीटी ने इस मामले में औपचारिक नोटिस जारी करने का भी निर्देश दिया है। न्यायाधिकरण के आदेश के अनुसार नोटिस इन सभी पक्षों को भेजा जाएगा।इन सभी पक्षों से मामले पर विस्तृत जवाब मांगा गया है।
- छपरा नगर निगम
- जिला पदाधिकारी, सारण
- नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार
- बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की अनदेखी का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम ने श्यामचक मोहल्ले में बिना वैज्ञानिक ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली अपनाए बड़े पैमाने पर कचरा डंप किया। साथ ही आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियों एवं नियमों का भी पालन नहीं किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में कूड़े के ढेर लगे होने के कारण दुर्गंध, प्रदूषण और गंदगी से जीवन प्रभावित हो गया है। बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
एनजीटी ने जांच समिति को निर्देश दिया है कि वह स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे। इसी रिपोर्ट के आधार पर न्यायाधिकरण आगे की कार्रवाई तय करेगा। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को होगी।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो नगर निगम के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि एनजीटी के हस्तक्षेप के बाद वर्षों से चली आ रही कूड़ा डंपिंग की समस्या का स्थायी समाधान निकल सकेगा।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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