
Dogs get angry at the sight of a bike or car: रात के सन्नाटे में जैसे ही कोई बाइक या कार तेज़ी से गुजरती है, अचानक 2-3 कुत्ते उसके पीछे दौड़ पड़ते हैं और जोर-जोर से भौंकने लगते हैं। यह दृश्य लगभग हर शहर और कस्बे में आम है। कई लोग इसे कुत्तों की आक्रामकता समझ लेते हैं, लेकिन असल में इसके पीछे उनके स्वाभाविक व्यवहार, जैविक प्रवृत्ति और पर्यावरणीय कारणों का मेल होता है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर रात में कुत्ते गाड़ियों के पीछे क्यों भागते हैं।
1. शिकार करने की जन्मजात प्रवृत्ति
घरेलू कुत्तों के पूर्वज भेड़िये माने जाते हैं। वैज्ञानिक रूप से कुत्ता प्रजाति को Canis lupus familiaris कहा जाता है, जो भेड़ियों से विकसित हुई है। भेड़ियों में तेज़ी से भागती वस्तु का पीछा करने की स्वाभाविक आदत होती है। जब कोई वाहन तेज़ रफ्तार से गुजरता है, तो कुत्तों के भीतर वही “चेज़ रिफ्लेक्स” सक्रिय हो जाता है। चलती हुई बाइक या कार उन्हें भागते हुए शिकार जैसी प्रतीत हो सकती है, और वे बिना सोचे-समझे उसके पीछे दौड़ पड़ते हैं।
2. अपने इलाके की रक्षा
कुत्ते स्वभाव से बेहद इलाकाई (Territorial) होते हैं। वे जिस जगह रहते हैं, उसे अपना क्षेत्र मानते हैं। जब कोई अनजान वाहन उनके इलाके से गुजरता है, तो वे उसे बाहरी दखल की तरह देखते हैं। भौंकना या गाड़ी के पीछे भागना उनके लिए चेतावनी देने का तरीका होता है मानो वे कह रहे हों, “यह हमारा इलाका है।” खासकर मोहल्लों, कॉलोनियों और खुले क्षेत्रों में यह व्यवहार ज्यादा देखने को मिलता है।
3. रात में बढ़ी हुई सतर्कता
रात के समय वातावरण अपेक्षाकृत शांत होता है। कम शोर और कम गतिविधि के कारण कुत्तों की सुनने और सूंघने की क्षमता और अधिक सक्रिय हो जाती है। वाहन की इंजन आवाज़, टायरों की रगड़ और हेडलाइट की तेज रोशनी उन्हें अचानक उत्तेजित कर सकती है। दिन की तुलना में रात में वे इन संकेतों पर तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं।
4. अतिरिक्त ऊर्जा और बोरियत
दिन के समय ट्रैफिक, लोगों की आवाजाही और शोरगुल के कारण कुत्ते अपेक्षाकृत निष्क्रिय रहते हैं। रात में सड़कें खाली होने पर उनके पास जमा ऊर्जा निकालने का मौका मिलता है। कुछ मामलों में गाड़ियों का पीछा करना उनके लिए खेल या गतिविधि जैसा भी हो सकता है, जिससे वे खुद को सक्रिय महसूस करते हैं।
5. समूह (पैक) व्यवहार
कुत्ते समूह में रहने वाली प्रजाति हैं। यदि एक कुत्ता किसी गाड़ी के पीछे दौड़ना शुरू करता है, तो आसपास के अन्य कुत्ते भी स्वतः सक्रिय हो जाते हैं। इसे “पैक बिहेवियर” कहा जाता है। एक की प्रतिक्रिया पूरी टोली को उकसा देती है, जिससे यह दृश्य और तीव्र हो जाता है।
क्या यह खतरनाक हो सकता है?
हालांकि यह व्यवहार स्वाभाविक है, लेकिन इससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। तेज़ रफ्तार वाहन के सामने अचानक आ जाना कुत्तों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है, वहीं चालक का संतुलन भी बिगड़ सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसे इलाकों में वाहन की गति नियंत्रित रखें, हॉर्न का अत्यधिक प्रयोग न करें और अचानक ब्रेक लगाने से बचें।
निष्कर्ष
रात में कुत्तों का गाड़ियों के पीछे भागना किसी शरारत या अनावश्यक आक्रामकता का परिणाम नहीं है। यह उनकी जन्मजात प्रवृत्ति, क्षेत्रीय भावना, संवेदनशीलता और ऊर्जा स्तर का मिश्रण है। जब हम उनके व्यवहार को समझते हैं, तो यह भी स्पष्ट होता है कि सड़क पर सावधानी और सह-अस्तित्व दोनों की सुरक्षा के लिए कितने जरूरी हैं।
Author Profile

- अंकिता कुमारी पत्रकारिता की छात्रा हैं। वर्तमान में वह संजीवनी समाचार डॉट कॉम के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं और समाचार लेखन व फील्ड रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।
Latest entries
छपराMarch 9, 2026छपरा में जनगणना का मेगा प्लान तैयार, 9343 अधिकारी-कर्मी होंगे तैनात, डिजिटल होगी जनगणनना
करियर – शिक्षाMarch 9, 2026छपरा के AND स्कूल के दो छात्रों ने पहले हीं प्रयास में CA की परीक्षा में हासिल की सफलता
पटनाMarch 9, 2026हड़ताल से नहीं लौटने वाले CO होंगे निलंबित, डिप्टी सीएम ने दी चेतावनी
पटनाMarch 9, 2026बकरी पालन के लिए बिहार की जलवायु अनुकूल, सरकार दे रही है 90 फीसदी तक अनुदान राशि







