सारण का प्रसिद्ध शिल्हौड़ी मंदिर पर्यटन के रूप में होगा विकसित, डीएम ने की पहल

छपरा। सारण के प्रसिद्ध शिल्हौड़ी मंदिर को पर्यटन के रूप में विकसित किया जायेगा। इसको लेकर जिलाधिकारी अमन समीर ने पहल की है। जिलाधिकारी अमन समीर द्वारा वन प्रमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पदाधिकारी, मढ़ौरा के साथ शिल्हौड़ी मंदिर को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने हेतु स्थलीय निरीक्षण किया गया तथा मंदिर परिसर के घेरे में निर्माणाधीन चहारदीवारी में मंदिर के निकास द्वार के सामने चहारदीवारी को तोड़कर बड़ा निकास द्वार बनाने तथा मंदिर के निकास द्वार के पास अवस्थित सीढ़ी को आवश्यकतानुसार समतलीकरण करने का निदेश दिया गया ताकि श्रद्धालुओं को मंदिर से निकासी में काफी सहूलियत हो सके।
अस्थाई अतिक्रमणों को अविलंब हटाने का निदेश
साथ ही अनुमंडल पदाधिकारी को उक्त मंदिर के 20 फीट चौड़े पहुंच पथ जो अतिक्रमण के कारण काफी संकीर्ण है, की मापी कराकर दोनों तरफ पिलर, सिकड़ आदि से सीमांकन कराते हुए सभी अस्थाई अतिक्रमणों को अविलंब हटाने का निदेश दिया गया ताकि श्रद्धालुओं को उक्त पहुंच पथ के माध्यम से मंदिर में प्रवेश करने में कोई समस्या उत्पन्न नहीं होने पाए। निरीक्षण के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी, मढ़ौरा, अंचलाधिकारी, मढ़ौरा तथा थानाध्यक्ष, मढ़ौरा उपस्थित रहे।
मंदिर प्राचीन संस्कृति का ध्वजवाहक
मढ़ौरा की धरती ऐतिहासिक व पौराणिक रूप से जिलेवासियों के लिए आस्था, संयम व सामाजिक एकता का परिचायक रही है. शिल्हौड़ी स्थित महादेव मंदिर व गढ़देवी का मंदिर प्राचीन संस्कृति का ध्वजवाहक हैं. ऐसे मंय यदि इस क्षेत्र को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाये तो स्थानीय लोगों को रोजगार के तो अवसर मिलेंगे ही.
सांस्कृतिक व ऐतिहासिक दृष्टिकोण से मढ़ौरा अनुमंडल की प्रासंगिकता आज भी कायम
सारण जिले में सांस्कृतिक व ऐतिहासिक दृष्टिकोण से मढ़ौरा अनुमंडल की प्रासंगिकता आज भी कायम है. यहां के प्राचीन गढ़देवी मंदिर में माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. गढदेवी मंदिर की पौराणिकता अपने आप में मढ़ौरा की विशेषता लिए हुए हैं. इसके विषय में दो कथाएं जनमानस में बरकरार हैं. एक कथा पौराणिक आस्था लिए है. जिसके अनुसार दक्ष प्रजापति द्वारा शिव जी के अपमान से त्रस्त सती ने हवन कुंड में आत्मदाह कर लिया था.
तब क्रुद्ध महादेव ने सती के अधजले शव को लेकर क्रोधित हो तांडव किया था. तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन से सती के अंगों को खंडित किया था. जहां-जहां अंग गिरे वहां वहां शक्तिपीठ बने. उस दौरान कुछ खून के छिटे मढ़ौरा में जिस जगह गिरे वहां गढदेवी जी की स्थापना हुई. दूसरी कथा बौध्द मत के अनुसार हैं जिसके अनुसार यह बौद्ध मठ था जो कि कालांतर में बौद्ध धर्म के पतनोपरांत गढदेवी मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हो गया.
Author Profile

- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
Latest entries
- August 26, 2026करियर – शिक्षाJob Alert: छपरा में नौकरी का मौका, 20 शिक्षकों की होगी भर्ती, 14,500 रुपये वेतन के साथ रूम रेंट और बोनस भी
- August 26, 2026क्राइमBihar Crime News: बिहार में 3 अपराधियों को मिली फांसी की सजा, 124 को अभियुक्तों को उम्रकैद
- August 26, 2026छपराChhapra Crime News: सरयू नदी किनारे मिला 40 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति का शव, पहचान में जुटी पुलिस
- August 26, 2026क्राइमChhapra Court News: एक दशक पुराने हत्याकांड के अभियुक्त को कोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा



