
पटना। बकरी पालन गरीब परिवारों के लिए एटीएम की तरह है। किसान ज़रूरत पड़ने पर इसे आसानी से बेचकर तत्काल आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। बिहार की जलवायु बकरी पालन के लिए अनुकूल है और यहां इसके विकास की असीम संभावनाएं हैं। ये बातें सोमवार को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री सुरेंद्र मेहता ने कही। वे जलवायु अनुकूल बकरी पालन एवं प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए होटल चाणक्य में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
60 से 90 फीसदी तक अनुदान दे रही है सरकार
इसमें उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बकरी पालन पर 60 से 90 फीसदी तक अनुदान दे रही है। इसके लिए बड़े पैमाने पर किसानों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। आने वाले दिनों में बकरी के मांस के साथ-साथ इसके दूध के व्यवसाय को बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। बकरी के दूध का मूल्य अधिक होता है, जिसे बेचकर किसानों को अच्छी आय हो सकती है।
बकरी के दूध की बाजार में अधिक मांग
कार्यक्रम में डेयरी एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि बकरी के दूध की काफी अधिक मांग है। ऐसे में बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए इसे सुधा के माध्यम से बेचने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही बकरी पालकों को समुचित लाभ मिल सके, इसके लिए मांस के व्यवसाय की भी अच्छी व्यवस्था की जा रही है।
पशुपालन से रोजगार सृजन को बढ़ावा
वहीं इस मौके पर बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि बिहार में रोजगार सृजन योजना के तहत पशुपालन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पशुओं से जुड़ी चिकित्सा और शोध को बेहतर कर बकरी पालन को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
बकरी का दूध इम्यूनिटी बूस्टर की तरह
केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा के डायरेक्टर डॉ. मनीष कुमार चाटली ने कहा कि बकरों के मांस की मांग के साथ-साथ बकरियों के दूध और पनीर की कीमत भी बाजार में ज्यादा है। इसका दूध हमारे लिए इम्यूनिटी बूस्टर की तरह काम करता है।
इस दौरान पशुपालन निदेशक उज्ज्वल कुमार सिंह, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव कुमार रविंद्र, वरीय वैज्ञानिक रवि रंजन, नाबार्ड के महाप्रबंधक अजय साहू सहित कई अन्य ने भी अपनी बातें रखीं।
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- अंकिता कुमारी पत्रकारिता की छात्रा हैं। वर्तमान में वह संजीवनी समाचार डॉट कॉम के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं और समाचार लेखन व फील्ड रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।
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