दिल में छेद से ग्रसित सारण की दो बच्चियों का अहमदाबाद में होगा ऑपरेशन

•आरबीएसके की टीम ने किया था चिह्नित
• बिहार सरकार ने अपने खर्चे पर फ्लाइट से भेजा अहमदाबाद
छपरा,25 जुलाई। स्वास्थ्य विभाग के आरबीएसके टीम द्वारा ह्रदय रोग से ग्रसित 2 बच्चियों को आवश्यक जांच व इलाज के लिए सदर अस्पताल से पटना भेजा गया है। दोनों बच्चियों को फ्लाइट के माध्यम से अहमदाबाद भेजा जाएगा, जहां उनके दिल के छेद का सफल ऑपरेशन किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एंबुलेंस 102 के माध्यम से दोनों बच्चियों को निःशुल्क पटना तक पहुंचाया गया। विदित हो कि बिहार सरकार द्वारा अहमदाबाद के श्री सत्य साईं हृदय रोग संस्थान में दिल में छेद से ग्रसित बच्चों का निःशुल्क ऑपरेशन कराने का प्रावधान किया गया है।
सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा ने बताया कि मुख्यमंत्री के सात निश्चय योजना पार्ट 2 में शामिल बाल हृदय योजना के तहत दोनों बच्चियों को नि:शुल्क इलाज व ऑपरेशन लिए चिह्नित किया गया है । उन्होंने बताया पटना स्थित इंदिरा गांधी इंस्टीच्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी द्वारा आयोजित विशेष शिविर के दौरान चिकित्सक बच्चों के रोग की गंभीरता की जांच करते हैं। इस योजना के तहत बच्चों के इलाज तथा परिजन के आने जाने के सभी खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है । मंगलवार को सारण जिले के गणेश कुमार यादव की 8 वर्षीय पुत्री श्वेता कुमारी तथा छपरा शहर के छोटा तेलपा निवासी मो असगर की 8 वर्षीय पुत्री नाजिया परवीन को अहमदाबाद भेजा गया।
सरकार उठाती है पूरा खर्चा :
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बिहार सरकार बाल हृदय योजना संचालित कर रही है। इस योजना के तहत 18 वर्ष तक के बच्चों का निःशुल्क इलाज कराया जा रहा है। वहीं ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को राज्य सरकार अपने खर्च पर अहमदाबाद भेजती और वहां स्थित श्री सत्य साईं अस्पताल में ऑपरेशन किया जाता है। जिसका पूरा खर्च बिहार सरकार के द्वारा वहन किया जाता है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला समन्वयक डॉ अमरेंद्र कुमार सिंह ने बताया राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत विभिन्न रोग से ग्रसित 0 से 18 साल के बच्चों के लिये इलाज की व्यवस्था है। इसमें बाल हृदय योजना भी शामिल है।
हृदय रोग से ग्रसित बच्चों के नि:शुल्क इलाज का इंतजाम:
इस योजना के तहत हृदय में छेद सहित विभिन्न तरह के हृदय रोग से ग्रसित बच्चों के नि:शुल्क इलाज का इंतजाम है। रोगग्रस्त बच्चों की पहले विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जरूरी जांच की जाती है। फिर जरूरी पड़ने पर उन्हें बेहतर चिकित्सा संस्थान भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में आने वाला खर्च सरकार वहन करती है। आम लोगों को सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहिए।
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