सारण के अभिज्ञान ने महज 14 साल के उम्र में बनाया ऐसा मोबाइल ऐप, जिससे पढ़ाई के साथ-साथ होगी कमाई

• “दोस्ती टोली” मोबाइल ऐप से पढ़ाई के साथ होगी कमाई
• यूट्यूब से मिला कोडिंग का आईडिया, खुद नहीं रखता मोबाइल फोन
• आठवीं कक्षा से शुरू किया था मोबाइल ऐप बनाने का कार्य
छपरा। महज 14 साल के उम्र में सारण के एक और लाल ने आईटी के क्षेत्र में कमाल करके दिखाया है। वह लड़का जिसके पास खुद का फोन तक नहीं है उसने एक मोबाइल ऐप विकसित किया है। जिसके माध्यम से बच्चें पढ़ाई के साथ-साथ कमाई भी कर सकते हैं। छपरा शहर के घोष कलोनी निवासी रिटार्यड सैनिक अखिलेश कुमार और शिक्षिका सरिता कुमारी के पुत्र अभिज्ञान अर्जीत ने “दोस्ती टोली” नामक एक मोबाइल ऐप विकसित किया है। यह एप शिक्षा पर आधारित है।
इस ऐप से बच्चे क्वीज खेलकर कमाई भी कर सकते हैं। इस ऐप में सभी विषयों का प्रश्न जोड़ा गया है। साथ हीं नीट-जेई का भी प्रश्न होगा। जिसमें प्रश्नों का सही जवाब देने वाले यूजर को क्वाइन मिलेगा। एक सही जवाब पर 10 क्वाइन मिलेगा। जल्द हीं दोस्ती टोली मोबाइल का लंच होगा। इस ऐप को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अभिज्ञान अर्जीत छपरा सेंट्रल स्कूल के दसवीं का छात्र है। उसने बताया कि यूट्यूब से उसे कोडिंग का आइडिया मिला। जहां से कोडिंग सीख कर मोबाइल ऐप डेवलपमेंट का कार्य शुरू किया। फिर उसने शुरूआती दौड़ में क्वीज अर्न नाम से मोबाइल ऐप विकसित किया। इस कार्य में उसके स्कूल के टीचर ने भी काफी सहयोग किया है। अभिज्ञान अर्जीत बिहार का एकलौता सबसे कम उम्र का ऐप डेवलॉपर है।
बीटा वर्जन हो चुका है लंच:
अभिज्ञान अर्जीत ने बताया कि वह मोबाइल का बीटा वर्जन क्वीज अर्न नाम से लंच किया था। जिसपर काफी अच्छा रिस्पांस मिला। जिसके बाद उसने इस कार्य में अपने कुछ और दोस्तों को जोड़ा और अब इस ऐप का नाम दोस्ती टोली रखा गया है। अप्रैल माह के अंत तक इस ऐप को बड़े पैमाने पर लंच किया जायेगा। इस ऐप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इम्पलीमेंट किया जा रहा है।
खुद का नहीं है फोन और बना दिया मोबाइल ऐप:
अभिज्ञान अर्जीत के पास अभी खुद का मोबाइल फोन नहीं है। वह कभी-कभी अपनी दीदी का फोन यूज करता है। घर में पड़े एक पुराना कंप्यूटर पर कार्य कर ऐप डेवलपमेंट का कार्य शुरू किया था। इसकी जानकारी उसके माता पिता को भी नहीं थी कि अभिज्ञान इतना अच्छा कार्य कर रहा है। धीरे-धीरे इसकी जानकारी घरवालों को मिली तब उसके पिता जी ने उसके लिए एक अच्छा सा लैपटॉप खरीदकर दिया है। फिलहाल अभी भी उसके पास अपना फोन नहीं है।
क्या है उद्देश्य:
इस मोबाइल ऐप को विकसित करने के पीछे का उद्देश्य के बारे में बताते हुए अभिज्ञान ने बताया कि मैने देखा है कि आजकल के बच्चे अर्निंग ऐप ज्यादा ढूंढते हैं और ऐसा कोई ऐप नहीं है जो क्वीज खेलने के लिए पैसा भी देता हो। वहीं से मेरे दिमाग में आइडिया आया कि क्यों न ऐसा ऐप बनाया जाये जहां से पढ़ाई भी हो और कमाई भी। फिर उसने यह ऐप बनाया है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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