
पटना। पुलिस महकमा ने राज्य में बेहतर और मुस्तैद पुलिसिंग के लिए बड़ा फैसला लिया है। गृह विभाग ने अधिसूचना जारी करते हुए 11 जिलों में ग्रामीण एसपी (पुलिस अधीक्षक) के क्षेत्राधिकार को स्पष्ट कर दिया है। अब इनके अधिकार और जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। इसके अनुसार, वर्ष 2022 में गठित ग्रामीण एसपी के 11 पदों के अधीन आने वाले अनुमंडल और थानों की संख्या का निर्धारण किया गया है। वहीं संबंधित जिलों में एसपी कार्यालय की शाखाओं का बंटवारा एसपी (ग्रामीण) और अन्य अधिकारियों के बीच किया जाएगा।
इन ग्रामीण एसपी के अधीन आए ये थाने
गया: ग्रामीण एसपी के कार्य क्षेत्र में नीमचक बथानी, टिकारी, इमामगंज और शेरघाटी-1 व शेरघाटी-2 के एसडीपीओ शामिल होंगे। इनके अधीन करीब 33 थाने रहेंगे।
रोहतास: एसपी (ग्रामीण) के अंतर्गत सासाराम मुख्यालय कोचस, डिहरी और विक्रमगंज के एसडीपीओ के साथ 28 थाने आएंगे।
मुंगेर: सदर, तारापुर और हवेली खड़गपुर एसडीपीओ तथा उनके अधीन 12 थाने शामिल किए गए हैं।
बेगूसराय: मंझौल, बखरी और बलिया एसडीपीओ के साथ कुल 11 थाने ग्रामीण एसपी के अधीन रहेंगे।
भागलपुर: कहलगांव-1, कहलगांव-2 और विधि-व्यवस्था डीएसपी के साथ 18 थानों की जिम्मेदारी दी गई है।
पूर्णिया: बायसी, बनमनखी और धमदाहा एसडीपीओ तथा इनके अधीन 18 थाने शामिल हैं।
सहरसा: सिमरी बख्तियारपुर एसडीपीओ और उनके अधीन 9 थाने ग्रामीण एसपी के कार्य क्षेत्र में रहेंगे।
दरभंगा: बेनीपुर, बिरौल और सदर एसडीपीओ-2 के साथ कुल 19 थाने जोड़े गए हैं।
मुजफ्फरपुर: पूर्वी-1, पूर्वी-2 और सरैया के एसडीपीओ के साथ 24 थाने शामिल होंगे।
सारण: मढ़ौरा-1, मढ़ौरा-2 और सोनपुर एसडीपीओ के साथ 18 थाने ग्रामीण एसपी के अधीन रहेंगे।
बेतिया: सदर-2 और नरकटियागंज एसडीपीओ के साथ 21 थानों का क्षेत्र तय किया गया है।
ये होंगे ग्रामीण एसपी के अधिकार
गृह विभाग ने सितंबर 2022 में बिहार पुलिस सेवा संवर्ग के अंतर्गत 181 पदों का सृजन किया था। इसमें ग्रामीण एसपी के 11 पद भी शामिल हैं। अब इनके अधिकारों को भी स्पष्ट कर दिया गया है। ग्रामीण एसपी अपने क्षेत्र के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करेंगे। साथ ही कांडों की समीक्षा और अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी निभाएंगे। इसके अलावा सभी महत्वपूर्ण मामलों की जानकारी जिला एसपी को देंगे। वहीं अपने अधीन थानों की अपराध पंजी, दैनिक प्रतिवेदन और पेट्रोलिंग चार्ट का पर्यवेक्षण करेंगे। जरूरत पड़ने पर दारोगा, सिपाही और हवलदार को निलंबित भी कर सकेंगे। हालांकि पुलिस लाइन के अधिकारियों के निलंबन से पहले जिला एसपी से विमर्श करना होगा। इसी बीच उन्हें सप्ताह में कम से कम एक बार पुलिस परेड में शामिल होना होगा। साथ ही पुलिस सभा में मौजूद रहना भी अनिवार्य रहेगा।
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- अंकिता कुमारी पत्रकारिता की छात्रा हैं। वर्तमान में वह संजीवनी समाचार डॉट कॉम के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं और समाचार लेखन व फील्ड रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।
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