ट्रायल में ही फेल हुआ रिविलगंज का विद्युत शवदाह गृह, करोड़ों की योजना, पहला टेस्ट में ही फेल
हस्तांतरण से पहले किया जा रहा था परीक्षण

छपरा। रिविलगंज नगर पंचायत के सेमरिया घाट पर करीब एक वर्ष से बनकर तैयार पड़े विद्युत शवदाह गृह की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर पंचायत रिविलगंज प्रशासन गुरुवार को नव निर्मित विद्युत शवदाह गृह में एक लावारिस शव का परीक्षण के तौर पर अंतिम संस्कार कराने पहुंचा, लेकिन मशीन में तकनीकी खराबी के कारण शवदाह गृह शुरू ही नहीं हो सका। ऑपरेटर ने मशीन को चालू कर परीक्षण करने का काफी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अंततः लावारिस शव को बिना अंतिम संस्कार कराए वापस ले जाना पड़ा।
हस्तांतरण से पहले किए गए इस परीक्षण के असफल होने के बाद नगर पंचायत प्रशासन ने निर्माण एजेंसी बुडको से मशीन की तकनीकी गड़बड़ी समेत अन्य कमियों को दूर कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
लावारिस शव से किया जाना था पहला परीक्षण
नगर पंचायत रिविलगंज प्रशासन के अनुसार सिविल सर्जन, सारण से पत्राचार के बाद एक लावारिस शव को सेमरिया घाट स्थित नवनिर्मित विद्युत शवदाह गृह में परीक्षण के तौर पर जलाने के लिए लाया गया था।नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी किशोर कुणाल ने बताया कि शवदाह गृह की मशीन में तकनीकी खराबी सामने आने के कारण शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। ऑपरेटर की ओर से मशीन को चालू करने और खराबी दूर करने का प्रयास किया गया, लेकिन मशीन पूरी तरह काम नहीं कर सकी। इसके बाद परीक्षण रोकना पड़ा और शव को वापस ले जाना पड़ा।
मशीन में खराबी, ऑपरेटर ने बताया मामूली फॉल्ट
कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि नवनिर्मित विद्युत शवदाह गृह की मशीन में गड़बड़ी है और इसी वजह से परीक्षण सफल नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि मशीन समेत निर्माण कार्य में सामने आई अन्य कमियों को लेकर बुडको को पत्र भेजा जाएगा। वहीं, शवदाह गृह के ऑपरेटर ने मशीन में किसी बड़ी खराबी से इनकार करते हुए इसे माइनर फॉल्ट बताया। दोनों पक्षों के बयानों के बाद अब मशीन की तकनीकी जांच और खराबी के वास्तविक कारण का पता लगाना जरूरी हो गया है।
बाउंड्रीवाल और फर्श में भी खामियां
सिर्फ मशीन ही नहीं, बल्कि शवदाह गृह परिसर के दूसरे निर्माण कार्यों को लेकर भी नगर पंचायत प्रशासन ने आपत्ति जताई है। ईओ किशोर कुणाल के अनुसार रिवर साइड की बाउंड्रीवाल और फर्श समेत कई हिस्सों में खामियां मिली हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक निर्माण कार्य से जुड़ी कमियों का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक शवदाह गृह का नगर पंचायत को औपचारिक हस्तांतरण नहीं किया जाएगा।
करीब एक साल से बनकर तैयार है परिसर
जानकारी के अनुसार आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय-2 के तहत नगर पंचायत रिविलगंज में बुडको, छपरा की ओर से सेमरिया घाट पर एक विद्युत शवदाह गृह और दो लकड़ी शवदाह गृह का निर्माण कराया गया है। निर्माण कार्य करीब एक वर्ष पहले पूरा होने के बावजूद यह सुविधा अब तक नियमित रूप से चालू नहीं हो सकी है।
बुडको की ओर से नगर पंचायत रिविलगंज को शवदाह गृह हस्तांतरित करने के लिए पत्र भेजा गया था। इसी के मद्देनजर हस्तांतरण से पहले नगर पंचायत प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण और शुरुआती परीक्षण किया।
लेकिन पहली ही जांच में विद्युत शवदाह गृह की मशीन के काम नहीं करने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए।
हस्तांतरण से पहले कमियों को दूर कराने पर जोर
कार्यपालक पदाधिकारी ने कहा कि नगर पंचायत प्रशासन की कोशिश है कि हस्तांतरण से पहले निर्माण कार्य और मशीन से जुड़ी सभी कमियों को दूर कराया जाए, ताकि भविष्य में शवदाह गृह के संचालन में किसी तरह की समस्या उत्पन्न न हो।
उन्होंने बताया कि मशीन की खराबी और परिसर में मिली अन्य तकनीकी एवं निर्माण संबंधी खामियों की जानकारी बुडको को दी जाएगी। कमियां दूर होने के बाद ही दोबारा परीक्षण कराया जाएगा और उसके बाद हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
जांच के दौरान मौजूद रहे अधिकारी और जनप्रतिनिधि
शवदाह गृह के निरीक्षण और परीक्षण के दौरान कनीय अभियंता निरंजन कुमार, मुख्य पार्षद प्रतिनिधि मुकेश कुमार यादव उर्फ सोनू यादव, वार्ड पार्षद जय प्रकाश चौधरी, राजेश्वर राय, अरुण यादव, प्रधान सहायक कृष्णा सिंह और राकेश रंजन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
एक साल से तैयार, अब चालू होने का इंतजार
सेमरिया घाट पर तैयार इस विद्युत शवदाह गृह से उम्मीद थी कि शहर और आसपास के लोगों को आधुनिक एवं अपेक्षाकृत सुविधाजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था मिल सकेगी। लेकिन निर्माण पूरा होने के लंबे समय बाद भी इसका नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है। अब हस्तांतरण से पहले हुए असफल परीक्षण ने एक बार फिर इसके संचालन को लेकर इंतजार बढ़ा दिया है।
नगर पंचायत प्रशासन का कहना है कि मशीन और निर्माण संबंधी सभी खामियां दूर होने के बाद ही शवदाह गृह को उपयोग के लिए लिया जाएगा, ताकि सुविधा शुरू होने के बाद लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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