सारण के सांसद बोले- अगले 10 वर्षों में 31 हजार नए पायलटों की आवश्यकता होगी, 300 विदेशी पायलट कार्यरत

छपरा। लोकसभा में सारण सांसद एवं पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने भारतीय विमानन क्षेत्र में हवाई किराए में अनियंत्रित वृद्धि, बुनियादी ढाँचे की कमियाँ और नियामक तंत्र की अक्षमता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। श्री रूडी ने बिहार में नालंदा, भागलपुर और पटना के निकट एक नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की आवश्यकता को जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्य में हवाई संपर्क को बढ़ाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।
इसके साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री को नागरिक विमानन क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरकार की यह पहल आने वाले समय में देश के आर्थिक विकास और हवाई यात्रा की सुलभता के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।
श्री रूडी ने कहा कि भारत का विमानन क्षेत्र पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन टिकटों की कीमतें आम नागरिकों की पहुँच से बाहर होती जा रही हैं। एयरलाइंस को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उच्च ईंधन लागत, भारी कर और हवाई अड्डों पर अतिरिक्त शुल्क प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए असमान करों पर चिंता जताई, जिससे किराए में भारी असमानता पैदा होती है। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश में यह कर 1% है, जबकि तमिलनाडु और बिहार में 29% तक जाता है।
कई महत्वपूर्ण रनवे बेकार पड़े हैं
विमानन क्षेत्र के बुनियादी ढाँचे पर चिंता व्यक्त करते हुए श्री रूडी ने कहा कि कई महत्वपूर्ण रनवे बेकार पड़े हैं, जिससे यात्रियों को अनावश्यक विलंब का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दिल्ली एयरपोर्ट के टू नाइन लेफ्ट और टू नाइन राइट रनवे का उदाहरण दिया, जहाँ अर्ध-लैंडिंग की समस्या बनी हुई है।
उड़ान योजना की सराहना करते हुए श्री रूडी ने कहा कि यह छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने का एक अच्छा प्रयास है, लेकिन इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सरकार को बेहतर बुनियादी ढाँचा और सस्ता किराया सुनिश्चित करना होगा।
10 वर्षों में 31,000 नए पायलटों की आवश्यकता
उन्होंने पायलटों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत को अगले 10 वर्षों में 31,000 नए पायलटों की आवश्यकता होगी। लेकिन यहाँ प्रशिक्षण इतना महँगा है कि युवा इसमें शामिल होने से कतराते हैं, जबकि देश में पहले से ही 300 विदेशी पायलट कार्यरत हैं।
श्री रूडी ने इन समस्याओं के समाधान के लिए टैरिफ पारदर्शिता बढ़ाने, किराए के निर्धारण पर सख्त दिशा-निर्देश लागू करने और नए एयरलाइंस के लिए आसान प्रवेश नीतियाँ बनाने की आवश्यकता बताई, ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े और टिकट की कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके। उन्होंने हवाई अड्डों के ऑपरेटरों द्वारा वसूले जाने वाले शुल्कों की समीक्षा, एटीएफ कर को पूरे देश में समान करने और पायलट प्रशिक्षण लागत को कम करने पर भी जोर दिया, ताकि युवा आसानी से इस क्षेत्र में करियर बना सकें और भारत को आवश्यक संख्या में प्रशिक्षित पायलट मिल सकें।
श्री राजीव प्रताप रूडी ने केंद्र सरकार से इन सभी मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की माँग की, ताकि आम जनता को सस्ती हवाई सेवा मिल सके और भारतीय विमानन क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत कर सके।
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