बिहार में राजस्व व्यवस्था होगी स्मार्ट, हर जिले में एआई सेल, ChatGPT के उपयोग को भी बढ़ावा
एडीएम (राजस्व) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कोषांग होगा गठित

पटना: बिहार सरकार राजस्व प्रशासन को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और दक्ष बनाने की दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकों के उपयोग की शुरूआत करने जा रही है। इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने की पहल
संबंध में उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार सरकार राजस्व प्रशासन को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। जिलों में एआई सेल के गठन और प्रशिक्षण की व्यवस्था से प्रशासनिक कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार आएगा।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य है कि तकनीक के माध्यम से आम लोगों को तेज, सरल और विश्वसनीय सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही ‘ईज ऑफ लिविंग’ के लक्ष्य को प्रभावी रूप से हासिल किया जा सके।
इंडिया एआई मिशन के अनुरूप पहल
राजस्व विभाग से जारी पत्र के अनुसार भारत सरकार द्वारा 7 मार्च 2024 को इंडिया एआई मिशन की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाने, लोक सेवाओं का ऑटोमेशन बढ़ाने तथा कमियों और संभावित धोखाधड़ी की पहचान करने जैसे कार्यों को तकनीक के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है।
इसी के अनुरूप बिहार में भी बिहार एआई मिशन की स्थापना की गई है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग इसके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है। इसी को देखते हुए राजस्व प्रशासन में भी एआई के विधिवत और व्यवस्थित उपयोग की दिशा में पहल की गई है।
वर्ल्ड एआई कॉन्फ्रेंस में भेजे गए अधिकारी
विभाग के तीन वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड एआई कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए भेजा गया था। इसका उद्देश्य यह समझना था कि राजस्व प्रशासन के दैनिक कार्यों में एआई का प्रभावी उपयोग किन-किन क्षेत्रों में किया जा सकता है।
जिलों में बनेगा पांच सदस्यीय एआई सेल
प्रत्येक जिले में अपर समाहर्ता (राजस्व) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एआई सेल का गठन किया जाएगा। इसमें जिला के आईटी मैनेजर, एक भूमि सुधार उप समाहर्ता, एक अंचल अधिकारी और एक राजस्व अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यह कोषांग जिला स्तर पर एआई के उपयोग से जुड़े निर्णय लेने वाली सर्वोच्च समिति के रूप में कार्य करेगा। इसका निर्णय जिलाधिकारी लेंगे।
हर शनिवार होगी बैठक
एआई सेल की बैठक प्रत्येक शनिवार को अपराह्न 3 बजे से 6 बजे तक अपर समाहर्ता (राजस्व) के कार्यालय कक्ष में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में एआई के उपयोग से संबंधित योजनाओं और कार्यों की समीक्षा की जाएगी।
अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
एआई सेल का एक महत्वपूर्ण कार्य अधिकारियों और कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से एआई प्रशिक्षण के लिए नामित करना होगा। साथ ही आई पाठ्यक्रम लागू कर परीक्षा आयोजित की जाएगी। मानक स्तर प्राप्त करने वाले कर्मियों को जिलाधिकारी के आदेश से प्रमाणपत्र भी दिया जा सकेगा।
1 अप्रैल से एआई के उपयोग का लक्ष्य
विभाग ने निर्देश दिया है कि प्रारंभिक स्तर पर 1 अप्रैल 2026 से राजस्व प्रशासन में एआई का उपयोग शुरू करने की व्यवस्था की जाए। इसके लिए मुख्य सचिव द्वारा जारी एआई टूल्स की सूची भी जिलों को उपलब्ध कराई गई है।
चैट जीपीटी के उपयोग को भी बढ़ावा
पत्र में विभागीय बैठकों और दैनिक कार्यों में मुफ्त एआई सहायक चैट जीपीटी के उपयोग को भी प्रोत्साहित करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और तेज बनाना है। जिलाधिकारियों से अपील की गई है कि एआई टूल्स के उपयोग के माध्यम से कर्मचारियों में जागरूकता बढ़ाई जाए। साथ ही सात निश्चय (पार्ट-3) के तहत ‘ईज ऑफ लिविंग’ के लक्ष्य को साकार करने में राजस्व प्रशासन अग्रणी भूमिका निभाए।
Author Profile

- अंकिता कुमारी पत्रकारिता की छात्रा हैं। वर्तमान में वह संजीवनी समाचार डॉट कॉम के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं और समाचार लेखन व फील्ड रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।
Latest entries
छपराMarch 11, 2026Jamin Registry: छपरा में अब घर बैठे होगी जमीन की रजिस्ट्री, 80 साल से ऊपर के बुजुर्गों को डोर-स्टेप सुविधा
छपराMarch 11, 2026LPG Gas Cylinder: सारण में रसोई गैस की कालाबाजारी पर नकेल, DM ने तैनात किए 21 दंडाधिकारी
छपराMarch 11, 2026सारण में डिजिटल जनगणना से पहले अलर्ट, ओटीपी शेयर किया तो हो सकती है ठगी
छपराMarch 11, 2026सारण के प्रमंडलीय आयुक्त का आदेश: मार्च खत्म होने से पहले भरें सरकारी खजाना, सभी बालू घाटों की बंदोबस्ती आवश्यक







