Chhapra News: सारण DM का बड़ा फैसला, 48 निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस भुगतान को मिली मंजूरी
नियमों से खिलवाड़ पड़ा भारी, 2 स्कूलों की राशि रोकी

छपरा। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम (Right to Education Act) के तहत नामांकित बच्चों की ट्यूशन फीस भुगतान को लेकर जिला प्रशासन ने अहम निर्णय लिया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शैक्षणिक सत्र 2019-20 से 2023-24 तक के लंबित ट्यूशन फीस क्लेम के भुगतान को स्वीकृति प्रदान की गई। जांच के बाद 50 निजी विद्यालयों में से 48 विद्यालयों के दावों को अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप सही पाया गया, जबकि 2 विद्यालयों के क्लेम को अस्वीकृत कर दिया गया।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि संबंधित सभी विद्यालयों की जांच जिला एवं अनुमंडल स्तर के वरीय पदाधिकारियों द्वारा की गई थी। जांच के क्रम में यह सुनिश्चित किया गया कि विद्यालयों द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नामांकित विद्यार्थियों से किसी प्रकार की अवैध शुल्क वसूली तो नहीं की गई है।
जांच में पाया गया कि दो विद्यालयों द्वारा कमजोर वर्ग एवं अलाभकारी समूह के छात्रों के अभिभावकों से ट्यूशन फीस के अतिरिक्त पोशाक एवं पुस्तक मद में भी राशि ली गई थी, जो अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत विद्यालय केवल ट्यूशन फीस का ही क्लेम सरकार से कर सकते हैं, जबकि पोशाक एवं पुस्तकें नामांकित बच्चों को निःशुल्क उपलब्ध कराना अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन के कारण इन दोनों विद्यालयों के क्लेम को अस्वीकृत कर दिया गया।
बच्चों के अधिकारों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं
जिलाधिकारी ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नामांकित बच्चों के अधिकारों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। भविष्य में भी यदि किसी विद्यालय द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
25 प्रतिशत सीटें कमजोर वर्ग एवं वंचित समूह के बच्चों के लिए आरक्षित
गौरतलब है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें कमजोर वर्ग एवं वंचित समूह के बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं। इन सीटों पर नामांकन हेतु अभिभावक “ज्ञानदीप पोर्टल” के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करते हैं। चयनित बच्चों की ट्यूशन फीस का भुगतान सरकार द्वारा विद्यालयों को किया जाता है।
बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन ने कहा कि इस निर्णय से जहां एक ओर विद्यालयों को लंबित भुगतान मिलेगा, वहीं दूसरी ओर बच्चों के शैक्षणिक अधिकारों की भी रक्षा सुनिश्चित होगी।
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