UGC Equity Rules 2026: क्या छात्रों को मिलेगा बराबरी का अधिकार या बढ़ेगा विवाद?
2012 के नियम हटे, 2026 की नई इक्विटी व्यवस्था लागू

UGC Equity Regulations 2026: अगर आप कॉलेज में पढ़ते हैं, किसी यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं या आपके घर में कोई हायर एजुकेशन ले रहा है, तो बीते कुछ दिनों से एक नाम लगातार चर्चा में है UGC Equity Regulations 2026। सोशल मीडिया से लेकर कैंपस की गलियों और चाय की दुकानों तक, हर जगह यही सवाल गूंज रहा है कि आखिर UGC ने ऐसा कौन-सा नियम बना दिया, जिस पर इतना विवाद खड़ा हो गया?
दरअसल, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव खत्म करने और समानता को मजबूत करने के उद्देश्य से नई नियमावली लागू की है। UGC का दावा है कि ये नियम छात्रों को जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान या विकलांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव से सुरक्षा देंगे। लेकिन इन्हीं नियमों के कुछ प्रावधानों को लेकर बहस भी तेज हो गई है।
UGC New Act: नए नियम से कॉलेजों में हड़कंप, SC-ST, OBC और दिव्यांग छात्रों को राहत
क्या है UGC का नया ‘इक्विटी’ नियम?
UGC ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में “विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026” लागू किए हैं।ये नियम वर्ष 2012 से लागू भेदभाव-रोधी विनियमों की जगह लेंगे।
UGC का कहना है कि 2012 के नियम अब समय के अनुरूप नहीं रह गए थे। इसलिए उन्हें और अधिक स्पष्ट, व्यापक और सख्त बनाया गया है, ताकि हर छात्र को कैंपस में बराबरी, सम्मान और सुरक्षा मिल सके।
नई नियमावली की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- 13 जनवरी 2026 को इन नियमों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया गया।
- फरवरी 2025 में UGC ने इनका ड्राफ्ट (मसौदा) सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया था।
उस मसौदे में
- OBC वर्ग को जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा से बाहर रखा गया था।
- भेदभाव की परिभाषा को अस्पष्ट बताया गया।
- झूठी शिकायतों को हतोत्साहित करने के लिए जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित था।
इन बिंदुओं पर देशभर में तीखी आलोचना हुई।इसके बाद UGC ने संशोधन करते हुए
- OBC को भी जाति-आधारित भेदभाव के दायरे में शामिल किया
- झूठी शिकायतों पर जुर्माने वाला प्रावधान हटा दिया
- भेदभाव की परिभाषा को थोड़ा और विस्तृत किया
संशोधित नियमों में क्या है नया?
जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा
अब जाति-आधारित भेदभाव का अर्थ होगा केवल जाति या जनजाति के आधार पर SC, ST और OBC वर्ग के सदस्यों के खिलाफ किया गया भेदभाव।
भेदभाव की विस्तृत परिभाषा
कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष अनुचित, भिन्न या पक्षपातपूर्ण व्यवहार, जो निम्न आधारों पर हो, भेदभाव माना जाएगा।
- धर्म
- जाति
- लिंग
- जन्मस्थान
- विकलांगता
- या इनका कोई भी संयोजन
2012 के नियमों से ली गई परिभाषा
ऐसा कोई भी भेद, बहिष्कार, सीमा या प्राथमिकता जिसका उद्देश्य या प्रभाव शिक्षा में समानता को बाधित करना हो और जो किसी छात्र या समूह की मानवीय गरिमा के खिलाफ हो उसे भी भेदभाव माना जाएगा।
किन प्रावधानों को हटाया गया?
हालांकि, 2012 के दो अहम प्रावधान इस नई नियमावली में शामिल नहीं किए गए
- जाति, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर अलग शैक्षणिक प्रणाली या संस्थान स्थापित करने पर रोक
- प्रवेश प्रक्रिया में SC/ST के खिलाफ बताए गए आठ विशिष्ट प्रकार के भेदभाव
- यही बिंदु कई शिक्षाविदों और छात्र संगठनों की चिंता का कारण बने हुए हैं।
हर संस्थान में बनेगी ‘इक्विटी कमेटी’
नई नियमावली के तहत
- हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में समान अवसर केंद्र (EOC) बनाना अनिवार्य होगा
- EOC के अंतर्गत इक्विटी कमेटी गठित होगी
- कमेटी की अध्यक्षता संस्थान प्रमुख करेंगे
- इसमें SC, ST, OBC, दिव्यांग और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा
कमेटी को
- साल में कम-से-कम दो बैठकें करनी होंगी
- अर्द्धवार्षिक रिपोर्ट तैयार करनी होगी
- संस्थानों को हर साल EOC की रिपोर्ट UGC को भेजनी होगी
राष्ट्रीय स्तर पर होगी निगरानी
- UGC एक राष्ट्रीय निगरानी समिति बनाएगा
- इसमें वैधानिक परिषदों, आयोगों और नागरिक समाज के सदस्य होंगे
समिति
- साल में कम-से-कम दो बार बैठक करेगी
- नियमों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी
- भेदभाव के मामलों की जांच करेगी
- सुधारात्मक उपाय सुझाएगी
नियम न मानने पर क्या कार्रवाई होगी?
अगर कोई संस्थान नियमों का पालन नहीं करता, तो
- उसे UGC योजनाओं से वंचित किया जा सकता है
- डिग्री, डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन कार्यक्रम चलाने पर रोक लग सकती है
- यहां तक कि उसे UGC की मान्यता सूची से हटाया भी जा सकता है
UGC क्या है?
- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC)
- स्थापना: 1956, संसद के अधिनियम द्वारा
कार्य:
- विश्वविद्यालय शिक्षा को बढ़ावा देना
- शिक्षण, परीक्षा और शोध के मानक तय करना
- योग्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अनुदान देना
- केंद्र व राज्य सरकारों को उच्च शिक्षा पर सलाह देना
UGC Equity Regulations 2026 का मकसद कैंपस में समानता और सम्मान का माहौल बनाना है।हालांकि, कुछ प्रावधानों को लेकर सवाल और आशंकाएं भी हैं। आने वाले समय में यह साफ होगा कि ये नियम ज़मीन पर कितने प्रभावी साबित होते हैं या फिर विवादों की नई वजह बनते हैं।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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