बेटे की मौत के बाद संकट में था परिवार, गांव वालों ने दिखाई इंसानियत की मिसाल
गिरवी रखे घर को समाजसेवियों ने छुड़ाया

छपरा। रोटी की तलाश में घर से निकला एक बेटा कभी वापस नहीं लौटा। सारण जिले के मांझी थाना क्षेत्र स्थित बरेजा गांव के रहने वाले शिवम तिवारी का सपना था कि वह बाहर कमाने जाकर परिवार की बदहाल जिंदगी को संवार सके, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पुणे जाने के दौरान ट्रेन हादसे में उसकी दर्दनाक मौत हो गई। बेटे की मौत से पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
गांव ने मिलकर बचा लिया घर
बताया जाता है कि शिवम तिवारी, कामाख्या तिवारी और रंजन देवी का पुत्र था। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। हालात ऐसे थे कि वर्ष 2023 में शिवम की मां को अपना घर तक गिरवी रखना पड़ा था। घर की जिम्मेदारियों और परिवार की परेशानियों को कम करने के लिए शिवम रोजगार की तलाश में पुणे जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही वह ट्रेन हादसे का शिकार हो गया।
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कमाऊ बेटे की असमय मौत के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ा संकट सिर छुपाने का था। जिस घर में वे रहते थे, वह पहले से गिरवी रखा जा चुका था। बेटे के चले जाने के बाद मां-बाप की आंखों के सामने अंधेरा छा गया। गांव में यह खबर फैलते ही हर किसी की आंखें नम हो गईं।
लोगों ने दिए 1.65 लाख
इसी बीच एकमा और मांझी क्षेत्र के समाजसेवियों ने मानवता की मिसाल पेश की। जब उन्हें परिवार की स्थिति की जानकारी मिली तो उन्होंने स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग का निर्णय लिया। इस मुहिम का नेतृत्व समाजसेवी डॉ अमित तिवारी और अविनाश चन्द्र उपाध्याय ने किया। लोगों ने आपस में सहयोग राशि जुटाई और परिवार को कुल 1 लाख 65 हजार रुपये की मदद दी।
इसमें 1 लाख 15 हजार रुपये देकर परिवार का गिरवी रखा घर छुड़ाया गया, जबकि 50 हजार रुपये अतिरिक्त आर्थिक सहयोग के रूप में पीड़ित परिवार को दिए गए। समाजसेवियों की इस पहल ने दुख में डूबे परिवार को न सिर्फ आर्थिक सहारा दिया, बल्कि यह भरोसा भी दिलाया कि समाज अभी भी संवेदनाओं से जिंदा है।
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इस सहयोग अभियान में बंटी ओझा, बबलू उपाध्याय, श्याम किशोर तिवारी, जय प्रकाश पांडे, राजेश पांडे, कमलेश राय, बुलबुल मिश्रा, मारकंडे ओझा और सतीश उपाध्याय सहित कई लोग शामिल रहे।
गांव और आसपास के इलाके में समाजसेवियों के इस मानवीय प्रयास की जमकर सराहना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि बेटे को तो वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन इस मदद ने एक उजड़ते परिवार को फिर से संभलने का सहारा जरूर दिया है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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