Chhapra Railway News: मढ़ौरा फैक्ट्री में बने रेल इंजन से अफ्रीका में दौड़ेगी ट्रेनें, 100 इंजन की होगी आपूर्ति
सारण का मढ़ौरा अब अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर

छपरा। सारण जिले का मढ़ौरा रेल इंजन कारखाना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के औद्योगिक और तकनीकी सामर्थ्य का प्रतीक बनता जा रहा है। हाल ही में, इस कारखाने को अफ्रीकी देश गिनी की ओर से 100 आधुनिक डीजल रेल इंजनों की आपूर्ति का बड़ा ऑर्डर मिला है। यह ऐतिहासिक डील गिनी के “सिमांडू खनिज परियोजना” (Simandou Mining Project) के लिए की गई है, जिसे अफ्रीका का सबसे बड़ा लौह अयस्क खनन प्रोजेक्ट माना जाता है।
बिहार के उद्योग मंत्री नीतिन मिश्रा ने इस गौरवपूर्ण खबर को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि जून 2025 के अंत तक पहली खेप गिनी के लिए रवाना कर दी जाएगी।
🚆 मढ़ौरा रेल इंजन प्लांट की खासियतें:
- यह कारखाना Wabtec Locomotive Private Limited (WLPL) के नाम से जाना जाता है।
- यह अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनी Wabtec Corporation और भारत सरकार के रेल मंत्रालय का संयुक्त उपक्रम है।
- यहां पर 4500 हॉर्सपावर (HP) और 6000 HP के आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और अंतरराष्ट्रीय उत्सर्जन मानकों (Emission Norms) के अनुसार इंजन तैयार किए जाते हैं।
- कारखाने की स्थापना 17 सितंबर 2018 को हुई थी।
- अब तक 700 से अधिक इंजन भारतीय रेलवे को भेजे जा चुके हैं।
- वर्ष 2028 तक 1000 इंजन की आपूर्ति का लक्ष्य तय किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय पहुंच और “मेड इन बिहार” की साख
इस डील से यह सिद्ध होता है कि बिहार की माटी में वैश्विक गुणवत्ता की तकनीकी निर्माण क्षमता है। भारत अब केवल अपने लिए निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि अन्य देशों की जरूरतें भी पूरी कर रहा है। इससे राज्य के युवाओं के लिए रोज़गार, प्रशिक्षण और तकनीकी सशक्तिकरण के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
कारखाने का विस्तार और ढांचा
- मढ़ौरा स्थित यह रेल इंजन कारखाना 270 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है।
- इसमें 70 एकड़ में उत्पादन संयंत्र (Production Unit) है।
- लगभग 600 इंजीनियर और कुशल कर्मचारी प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं।
- अत्याधुनिक मशीनों और स्वचालित प्रणाली (Automation) से लैस यह यूनिट देश की सबसे आधुनिक इंजन निर्माण इकाई बन चुकी है।
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26 मई को होगा इंजनों का नामकरण समारोह
इस उपलब्धि के उत्सव स्वरूप 26 मई 2025 को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें गिनी को भेजे जाने वाले इंजनों का आधिकारिक नामकरण (Naming Ceremony) किया जाएगा।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि इन इंजनों पर “मढ़ौरा” का नाम भी अंकित किया जाए, जैसा कि देश के अन्य लोको प्लांट्स (जैसे गांधीधाम, रोजा) के इंजनों पर किया जाता है। इससे क्षेत्र की पहचान और गौरव दोनों बढ़ेंगे।
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मढ़ौरा की यह उपलब्धि क्यों है महत्वपूर्ण?
| बिंदु | महत्व |
|---|---|
| तकनीकी आत्मनिर्भरता | भारत के Make in India मिशन को विश्व मान्यता मिली |
| बिहार का औद्योगिक विकास | राज्य की वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर उपस्थिति |
| रोजगार के अवसर | स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष नौकरियों के अवसर |
| गौरव का क्षण | “मेड इन बिहार” टैग अब वैश्विक स्तर पर |
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निष्कर्ष:
मढ़ौरा रेल इंजन फैक्ट्री की यह उपलब्धि भारत के औद्योगिक इतिहास में एक नई लकीर खींचती है। यह न केवल बिहार की ताकत का प्रतीक है, बल्कि यह दिखाता है कि सही निवेश, प्रबंधन और तकनीकी भागीदारी से भारत के छोटे कस्बे भी वैश्विक मंच पर चमक सकते हैं।
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