
पटना। देशभर में 100 ऐसे जिलों को चिन्हित किया गया है, जहां सड़क दुर्घटनाएं बड़ी संख्या में होती हैं। इनमें बिहार के छह जिले पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, गया और नालंदा शामिल हैं। इन जिलों में दुर्घटनाओं की संख्या को न्यूनतम या शून्य करने के लिए इन्हें जीरो फैटेलिटी जिलों के तौर पर चिन्हित किया गया है। ताकि इनमें इसे लेकर विशेष पहल की जा सके। यह जानकारी सूबे के परिवहन सह ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने गुरुवार को दी। वे नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री की अध्यक्षता में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार इन जिलों में दुर्घटना के कारणों को चिन्हित कर इसे शून्य करने पर काम कर रही है।
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मंत्री ने कहा कि राज्य में सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नियमित रूप से विभिन्न समितियों की बैठक आयोजित की जा रही है। सड़क पर होने वाले हादसों की संख्या कम से कम करने के लिए वर्ष 2025 में कुल 484 ऐसी बैठकें आयोजित हुई थी, जिसमें जिलों की स्थानीय परिस्थितियों, दुर्घटना संभावित स्थलों और प्रमुख जोखिम कारकों की समीक्षा स्थानीय डीएम, एसपी, परिवहन, पथ, अभियांत्रिकी विभाग के स्तर से की गई है। दुर्घटनाओं को शून्य करने के लिए 1 से 31 जनवरी तक सभी जिलों में व्यापक स्तर पर जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें रैली, मार्च, मैराथन, वाहन चालकों का प्रशिक्षण, स्कूलों-कॉलेजों में सड़क सुरक्षा संबंधी कार्यक्रम और क्षतिग्रस्त क्रैश बैरियर की मरम्मत जैसे तमाम बिंदु शामिल हैं।
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ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार
मंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटना प्रवण क्षेत्र के रूप में ब्लैक स्पॉट व ग्रे स्पाॅट चिन्हित किए गए है। एनएचएआई के अनुसार, राज्य में 2022 में 160, 2023 में 145 और 2024 में 114 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए। वहीं पथ निर्माण विभाग ने 2022 में 96, 2023 में 96 और 2024 में 91 ब्लैक स्पॉट की पहचान की। इन स्थानों पर सुधार के लिए तेज मोड़ों को सुरक्षित, साइन बोर्ड, सड़क चौड़ीकरण और बैरिकेडिंग जैसे काम किए जा रहे हैं।
ब्लैक स्पॉट सड़क का वह हिस्सा होता है जहां पिछले 3-5 वर्षों के आंकड़ों के आधार पर सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं और मौतें दर्ज की जाती हैं। इसमें तेज मोड़, खराब डिजाइन वाले चौराहे, अंधेरा क्षेत्र, गड्ढे या बार-बार दुर्घटना वाले स्थान शामिल हैं। इनके सुधार के लिए साइन बोर्ड, सड़क चौड़ीकरण, अंडरपास/ओवरपास निर्माण, मरम्मत, अवैध कट बंद करना, बैरिकेडिंग और जागरूकता अभियान जैसे कदम उठाए जाते हैं।
सड़क दुर्घटना में त्वरित मदद और एंबुलेंस व्यवस्था
परिवहन मंत्री ने कहा कि राज्य में 1500 से अधिक सरकारी एंबुलेंस और 2000 से ज्यादा निजी एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इनमें सभी सरकारी एंबुलेंस की मैपिंग इमरजेंसी नंबर 102 से की जा चुकी है,निजी एंबुलेंस को 102 से जोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग को दोबारा चिट्ठी लिखी गई है। मौजूदा समय में 102 पर कॉल करने पर शहरी क्षेत्र में 20 मिनट और ग्रामीण क्षेत्र में 30 मिनट के अंदर एंबुलेंस पहुंचाई जा रही है।
हिट एंड रन के 20,727 मामले
मंत्री ने आगे कहा कि विभाग दुर्घटनाग्रस्त लोगों की मदद व इलाज के लिए भी काम कर रहा है। दुर्घटना प्रभावित लोगों को ई-डीएआर, कैशलेस उपचार और हिट एंड रन मुआवजा योजना का लाभ दिया जा रहा है। भारत सरकार के आई-आरएडी और ई-डीएआर पोर्टल पर अब तक 45,103 दुर्घटनाओं की प्रविष्टि की गई, जिसमें हिट एंड रन के 20,727 और अन्य 24,376 मामले हैं। 18,955 मामलों को ई-डीएआर में प्रोसेस किया जा चुका है और केवल 14 प्रतिशत में पुलिस ने फाॅर्म-7 अपलोड किया गया है। वहीं, पीएम-राहत (नगद रहित उपचार योजना) के तहत दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का इलाज दुर्घटना के 7 दिनों तक देना सुनिश्चित किया जा रहा है। इसमें भुगतान केन्द्र सरकार के मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से दिया जाता है और नोडल बिहार सड़क सुरक्षा परिषद् होता है।
हिट एंड रन मुआवजा योजना
इसके तहत मृतक के आश्रितों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये दिए जाते हैं। बिहार ने 16 हजार 319 मृतकों के खिलाफ 9,617 आवेदन मुम्बई स्थित साधारण बीमा परिषद् को भेजे गए हैं, जिनमें 73 प्रतिशत में मुआवजा भुगतान हो चुका है। साथ ही दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर में मदद करने वाले गुड सेमेरिटन (राहगीर) को अब 25 हजार रुपये नकद इनाम देने की घोषणा हुई है।
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