
पटना। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में ड्रोन प्रदर्शनी और लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से मछली पालन में ड्रोन तकनीक के उपयोग की संभावनाओं को उजागर किया गया। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रोन मत्स्यपालन में समय और श्रम की लागत को कम करने में मदद कर सकते हैं। बिहार में ‘‘मत्स्यपालन के क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग एवं प्रत्यक्षण‘‘ विषय पर एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री नितीश कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, केन्द्रीय मंत्री, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार, ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
इन कार्यों में कारगर साबित होगा ड्रोन
ड्रोन का उपयोग मछली के बीज छोड़ने, आहार वितरित करने और आपातकालीन स्थिति में जीवन रक्षक सामग्रियाँ पहुँचाने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, ये जलक्षेत्रों का सर्वेक्षण करने, मछली के परिवहन में सहायता करने और डेटा एकत्र करने में भी कारगर साबित हो सकते हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में अपनी व्यापक अनुप्रयोगों के लिए पहचानी जाने वाली ड्रोन तकनीक अब मछली पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में अपनी जगह बना रही है। इसकी निगरानी, फार्म प्रबंधन और बीमारी का पता लगाने की क्षमता के चलते यह उद्योग में एक नई क्रांति लाने के लिए तैयार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन के माध्यम से मछली पालन के कार्यों को अधिक कुशलता से किया जा सकेगा, जिससे इस क्षेत्र की उत्पादकता और sustainability में वृद्धि होगी। इस तकनीक के बढ़ते उपयोग से मत्स्यपालन में नई संभावनाएँ और अवसर खुल सकते हैं, जो किसानों और उद्यमियों के लिए फायदेमंद साबित होंगे।
दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक है भारत
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि “ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के Vision और Initiatives से Fisheries sector में व्यापक बदलाव आया है । भारत आज विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है और ग्लोबल फिश प्रोडक्शन में भारत का योगदान 8 प्रतिशत है”। उन्होंने कहा कि जल कृषि उत्पादन में भी भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है । यह शीर्ष झींगा उत्पादक और निर्यातक देशों में से एक है और तीसरा सबसे बड़ा कैप्चर फिशरीज उत्पादक है। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र में निर्यात दोगुना करने पर सरकार काम कर रही है।
1.50 लाख मत्स्य अंगुलिकाओं का पुर्नस्थापन
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनान्तर्गत कुल 1.50 लाख मत्स्य अंगुलिकाओं का पुर्नस्थापन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के बहते नदियों में मूल प्रजाति के मेजर कार्प मछलियों को पुर्नस्थापित किया जाना है, जिससे कार्प मछलियों की नदियों में घटती आबादी का पुर्नस्थापन एवं नदियों के किनारे बसे हुए मछुआरों को आजीविका का साधन प्राप्त हो सकेगा।
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