टीबी से उबर चुके मरीजों को चैंपियन के रूप में आरोग्य मंदिर पर किया जायेगा तैनात

• समुदाय में अपनी कहानी बताकर टीबी के प्रति फैलाएंगे जागरूकता
• टीबी चैंपयिंस के रूप में दिया गया प्रशिक्षण
छपरा। टीबी उन्मूलन की दिशा में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा लगातार विभिन्न स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। इसको लेकर कई पहल की गयी है। अब टीबी बीमारी को मात दे चुके लोगों से टीबी उन्मूलन में सहयोग लिया जायेगा। टीबी से उबर चुके लोगों को टीबी चैंपियन के रूप में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्तर पर तैनात किया जायेगा। इसको लेकर केएचपीटी संस्था के द्वारा इंपैक्ट इंडिया प्रोजेक्ट के तहत जिले में टीबी से ठीक हो चुके मरीजों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. रत्नेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि टीबी चैंपियंस स्थानीय स्कूलों, गाँव की बस्तियों और अन्य स्थानीय सार्वजनिक मंचों जैसे गाँव के मेलों और सामूहिक समारोहों आदि में टीबी के लक्षणों, परीक्षण और उपचार के महत्व, एनटीईपी की योजनाओं और सेवाओं के बारे में सही जानकारी प्रदान करेंगे। टीबी चैंपियंस टीबी से पीड़ित लोगों, उनके परिवारों और समुदायों की सफलताओं, चुनौतियों और जरूरतों के बारे में खुलकर बात करके टीबी मंचों पर सक्रिय रूप से भाग लेंगे। वे स्थानीय टीबी प्रतिक्रिया गतिविधियों के लिए भी सक्रिय रूप से समर्थन जुटाएंगे ।
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के सहयोग से टीबी चैंपियंस उन टीबी से पीड़ित व्यक्तियों का पता लगाएंगे और उन्हें प्रेरित करेंगे जिन्होंने इलाज छोड़ दिया था ताकि वे अपनी दवा लेना फिर से शुरू कर सकें और सफलतापूर्वक इलाज पूरा कर सकें। मौके पर सीडीओ डॉ. रत्नेश्वर प्रसाद सिंह, केएचपीटी के डिस्ट्रिक्ट लीड रमेश कुमार, डीपीएस मुकेश कुमार, एसटीएस मुकेश कुमार, रतन संजय समेत अन्य मौजूद थे।
टीबी मुक्त पंचायत के लिए टीबी चैंपियंस सबसे बड़े संदेशवाहक:
केएचपीटी के डिस्ट्रिक्ट लीड रमेश कुमार ने कहा कि इम्पैक्ट इंडिया प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य टीबी के प्रसार को कम करना तथा टीबी से होने वाले मौत में कमी लाना है। प्रशिक्षण का उद्देश्य के बारे मे चर्चा करते हुए कहा कि टीबी मुक्त पंचायत के लिए टीबी चैंपियंस सबसे बड़े संदेशवाहक का काम कर सकते हैं। ग्रामीण स्तर पर टीबी चैंपियंस टीबी मुक्त पंचायत के लिए काम करें और लोगों को जागरूक करें।
इस परियोजना में टीबी चैंपियंस को आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एचडब्यूसी) के स्तर पर तैनात किया जाएगा जो ग्राम पंचायत में एडवोकेसी/सामुदायिक बैठकों में भाग लेकर ग्राम पंचायत के सदस्यों और सामुदायिक नेताओं की मदद से, टीबी केस-फाइंडिंग को बढ़ावा देने, बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने, कम आय वाले परिवारों के लिए उपचार और पोषण सहायता प्रदान करने में सुविधा प्रदान करने में सहयोग करेंगे।
बाल और नाख़ून को छोड़कर किसी भी अंग को कर सकता है प्रभावित :
टीबी डीपीसी हिमांशु शेखर द्वारा टीबी के फैलाब, रोकथाम एबं उपचार से सम्बंधित विषय पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। क्षय रोग (टीबी) एक वायुजनित बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (एम. ट्यूबरकुलोसिस) के कारण होती है। यह एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो फेफड़ों को प्रभावित करती है, यह शरीर के किसी भी हिस्से (बालों और नाखूनों को छोड़कर) को प्रभावित कर सकती है। जब पल्मोनरी टीबी वाला कोई पीड़ित कोई व्यक्ति खांसता है, थूकता है या छींकता है, तो टीबी के कीटाणुओं को ले जाने वाली श्लेष्मा की बूंदें हवा में फैल सकती हैं। चूंकि टीबी वायुजनित है, इसलिए जो कोई भी बैक्टीरिया को सांस के माध्यम से ग्रहण करता है, वह टीबी से संक्रमित हो सकता है ।
क्षय रोग (टीबी) एक वायुजनित बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (एम. ट्यूबरकुलोसिस) के कारण होती है। यह एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो फेफड़ों को प्रभावित करती है, यह शरीर के किसी भी हिस्से (बालों और नाखूनों को छोड़कर) को प्रभावित कर सकती है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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