
Bharat Tiwari Fake encounter: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई चर्चित पुलिस कार्रवाई और भरत तिवारी की मौत के मामले में बिहार सरकार ने न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में इस संबंध में गठित न्यायिक जांच आयोग और उसके कार्यक्षेत्र (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) को घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान कर दी गई।
सरकार के इस फैसले के बाद अब पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ हो गया है। न्यायिक जांच आयोग घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेगा और अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा।
हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे जांच
राज्य सरकार द्वारा जारी विभागीय अधिसूचना संख्या-7146, दिनांक 24 जून 2026 के अनुसार, पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया है। आयोग को घटना से संबंधित तथ्यों, परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया तथा अन्य सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच का दायित्व सौंपा गया है।
17 जून की घटना के बाद उठा था विवाद
गौरतलब है कि 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौटी गांव में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी व्यापक चर्चा हुई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया।
आयोग करेगा सभी पहलुओं की पड़ताल
सरकारी अधिसूचना के अनुसार आयोग को घटना से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करनी है। जांच के दौरान पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियां, कानूनी प्रक्रियाओं का पालन, घटनास्थल की स्थिति तथा अन्य संबंधित पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। आयोग आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य पक्षों से भी जानकारी प्राप्त कर सकता है।
निष्पक्ष जांच से सामने आएंगे तथ्य
सरकार का मानना है कि न्यायिक जांच से घटना से जुड़े सभी तथ्य सामने आएंगे और जनता के बीच मौजूद शंकाओं का समाधान होगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे इस मामले पर अब सभी की निगाहें न्यायिक जांच आयोग की कार्यवाही और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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