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प्राचीन चिकित्सा परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ें, छपरा में आयुर्वेद परिषद की बड़ी मांग

प्राथमिक केंद्र से बड़े अस्पताल तक आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की मांग

छपरा। आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का दर्जा देने की मांग तेज हो गयी है। विश्व आयुर्वेद परिषद की ओर से जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपकर आयुर्वेद चिकित्सा व्यवस्था को देश की स्वास्थ्य प्रणाली में और मजबूत स्थान देने का आग्रह किया गया। परिषद ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थानों तक आयुर्वेदिक स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक तकनीकी संसाधनों, आवश्यक सुविधाओं और मजबूत आधारभूत संरचना से सुसज्जित करने की भी मांग की।

परिषद के प्रतिनिधियों ने ज्ञापन में कहा कि आयुर्वेद भारतीय परंपरा से जुड़ी चिकित्सा व्यवस्था होने के साथ जीवन को समग्र रूप से देखने वाली पद्धति भी है। संगठन ने आयुर्वेद के विकास और विस्तार के लिए केंद्र तथा राज्य स्तर पर किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए इसे और व्यापक स्तर पर विकसित करने की आवश्यकता बतायी।

29 वर्षों से आयुर्वेद के उत्थान के लिए सक्रिय

विश्व आयुर्वेद परिषद स्वयं को राष्ट्रोत्थान, स्व-जागरण और आयुर्वेद के समग्र विकास के लिए कार्यरत स्वयंसेवी संगठन बताती है। परिषद के अनुसार, संगठन पिछले 29 वर्षों से आयुर्वेद के विकास एवं उत्थान की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।

ज्ञापन में भारत सरकार की ओर से आयुर्वेद के क्षेत्र में किए गए प्रयासों के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया। परिषद ने कहा कि हाल के वर्षों में आयुर्वेद के विकास से जुड़े कई कार्य हुए हैं और इसके विस्तार को गति मिली है। कोरोना काल के दौरान आयुर्वेद आधारित प्रयासों को भी परिषद ने महत्वपूर्ण बताया।

वैकल्पिक चिकित्सा के बजाय राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का दर्जा देने की मांग

परिषद ने ज्ञापन में कहा कि स्वतंत्रता के करीब आठ दशक बाद भी आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का औपचारिक दर्जा नहीं मिला है और इसे कई स्तरों पर अभी भी वैकल्पिक चिकित्सा व्यवस्था के रूप में देखा जाता है।

परिषद के अनुसार, आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और जीवनशैली को समग्र रूप से देखने वाला ज्ञान-विज्ञान है। ज्ञापन में आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों और परंपरा में विकसित चिकित्सा अवधारणाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि समय के साथ वैद्य और आयुर्वेद विशेषज्ञ आधुनिक वैज्ञानिक मानकों तथा अनुसंधान के माध्यम से इस क्षेत्र में नए प्रयास कर रहे हैं।

“पुरानी नींव, नया निर्माण” की अवधारणा पर जोर

विश्व आयुर्वेद परिषद ने आयुर्वेद चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए “पुरानी नींव, नया निर्माण” की अवधारणा पर काम करने की जरूरत बतायी। परिषद की मांग है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थानों तक आयुर्वेद के लिए आवश्यक आधुनिक तकनीकी संसाधन, जांच सुविधाएं और अन्य आधारभूत व्यवस्थाएं विकसित की जाएं।

ज्ञापन में कहा गया कि आयुर्वेदिक संस्थानों को आधुनिक तकनीक और अनुसंधान से जोड़ने के साथ चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

आयुर्वेद को मिले व्यापक संस्थागत पहचान

परिषद का कहना है कि आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का दर्जा दिए जाने से देश की प्राचीन चिकित्सा परंपरा को संस्थागत स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। संगठन ने इसे भारतीय चिकित्सा विरासत को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

परिषद ने केंद्र सरकार से आयुर्वेद को और मजबूत करने, चिकित्सा संस्थानों में आधुनिक सुविधाएं बढ़ाने और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

विश्व आयुर्वेद परिषद की ओर से जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में आयुर्वेद के विकास, विस्तार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण से जुड़ी मांगें रखी गयीं।

ज्ञापन सौंपने वालों में डॉ. कमलेश कुमार शर्मा, डॉ. उमाकांत प्रसाद, डॉ. आलोक चंद पांडेय, डॉ. विजय कुमार, डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह तथा प्रांत महासचिव डॉ. सुधांशु शेखर त्रिपाठी शामिल रहे।

परिषद ने उम्मीद जतायी कि आयुर्वेद की परंपरागत ज्ञान-संपदा को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और संस्थागत संसाधनों से जोड़कर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में इसकी भूमिका को और व्यापक बनाया जा सकता है।

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Ganpat Aryan
Ganpat Aryan
वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।

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