
नेशनल डेस्क। अब ट्रेनों में ड्यूटी के दौरान जीआरपी और आरपीएफ के पुलिस के जवान बिना टिकट के नहीं चढ़ पायेंगे। इसके लिए अब उन्हें रेलवे द्वारा टिकट खरीदना पड़ेगा। रेलवे दावा अधिकरण ने कहा है कि जीआरपी और आरपीएफ कर्मियों को ट्रेन यात्रा के लिए टिकट खरीदना होगा या वैध अनुमति प्राप्त करनी होगी। यात्रा के लिए उनका केवल पहचान पत्र ले जाना पर्याप्त नहीं है। भारतीय रेलवे ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए घोषणा की है कि अब ट्रेन यात्रा के दौरान ड्यूटी पर तैनात जीआरपी (Government Railway Police) और आरपीएफ (Railway Protection Force) के जवानों को भी टिकट खरीदना होगा। यह नई नीति रेलवे की सुरक्षा और सुगमता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है।
नई नीति का उद्देश्य
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों में यात्रा करने वाले सभी लोगों के लिए समान नियम लागू करना है, जिसमें रेलवे सुरक्षा बल के सदस्य भी शामिल हैं। पहले, जीआरपी और आरपीएफ के कर्मियों को ट्रेन यात्रा के दौरान केवल पहचान पत्र दिखाकर यात्रा की अनुमति मिल जाती थी, लेकिन अब उन्हें भी वैध टिकट या अनुमति प्राप्त करनी होगी। यह कदम ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और अनुशासन को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
कांस्टेबल का याचिका खारिज:
अधिकरण ने एक कांस्टेबल द्वारा दायर मुआवजे की याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही, जिसने दावा किया था कि ट्रेन से गिरने के समय वह आधिकारिक ड्यूटी पर था। अधिकरण की अहमदाबाद पीठ ने राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) कर्मियों को ड्यूटी कार्ड पास जारी करने के परिपत्र के संबंध में ‘‘रेलवे के लापरवाह रवैये’’ को भी रेखांकित किया, जिन्हें अक्सर यात्रा करनी पड़ती है।
GRP कांस्टेबल ने मांगा था 8 लाख का मुआवजा
जीआरपी कांस्टेबल राजेश बगुल ने अधिकरण में याचिका दायर कर रेलवे से ब्याज के साथ आठ लाख रुपए का मुआवजा मांगा था और दावा किया था कि दुर्घटना के दिन वह ड्यूटी पर थे। उनकी याचिका के अनुसार, बगुल 13 नवंबर, 2019 को आधिकारिक ड्यूटी के लिए सूरत रेलवे पुलिस थाने गए थे। वह सूरत-जामनगर इंटरसिटी ट्रेन से सूरत से भरूच लौट रहे थे और इसी दौरान वह पालेज स्टेशन पर गिर गए, जिससे उनके बाएं पैर में गंभीर चोटें आईं और पैर का एक हिस्सा काटना पड़ा।
आधिकारिक यात्रा के दावे नहीं हुए साबित
अधिकरण के सदस्य (न्यायिक) विनय गोयल ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि बगुल अपने आधिकारिक यात्रा दावों को साबित करने के लिए कोई वैध यात्रा अनुमति प्रस्तुत करने में असफल रहे हैं। पीठ ने कहा कि वैध यात्रा अनुमति के अभाव में आवेदक को वास्तविक यात्री नहीं माना जा सकता है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि रेलवे को जीआरपी और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) अधिकारियों को वैध यात्रा अनुमति देने के संबंध में जारी परिपत्र का पालन करना चाहिए।
नई प्रक्रिया और नियम
- टिकट की आवश्यकता: जीआरपी और आरपीएफ के जवानों को अब ट्रेन यात्रा करने के लिए रेलवे द्वारा जारी टिकट खरीदना होगा। इसका मतलब है कि ड्यूटी पर होने के बावजूद उन्हें अब ट्रेन के लिए टिकट लेना पड़ेगा, जैसा कि अन्य यात्रियों के लिए होता है।
- अनुमति प्राप्त करना: यदि किसी जवान को विशेष परिस्थितियों में यात्रा करनी है, तो उसे एक वैध अनुमति प्राप्त करनी होगी। यह अनुमति रेलवे के संबंधित विभाग द्वारा जारी की जाएगी और इसे यात्रा के दौरान पेश किया जाना आवश्यक होगा।
- पहचान पत्र की भूमिका: हालांकि पहचान पत्र पहले की तरह अनिवार्य रहेगा, लेकिन अब यह अकेले यात्रा की अनुमति के लिए पर्याप्त नहीं होगा। जवानों को पहचान पत्र के साथ-साथ टिकट या अनुमति भी प्रस्तुत करनी होगी।
प्रतिक्रिया और प्रभाव
इस नए नियम पर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। कुछ का मानना है कि इससे ट्रेनों में अनुशासन और सुरक्षा में सुधार होगा, क्योंकि सभी यात्रियों को समान नियमों का पालन करना होगा। वहीं, कुछ का कहना है कि इससे ड्यूटी पर तैनात जवानों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर जब वे आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रा कर रहे हों।
रेलवे का दृष्टिकोण
रेलवे विभाग का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य सभी यात्रियों के लिए समान नियम और सुविधाएँ सुनिश्चित करना है। विभाग ने आश्वस्त किया है कि इस नई नीति का प्रभावी कार्यान्वयन सभी सुरक्षा बलों की यात्रा को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाएगा।रेलवे की यह नई पहल सुरक्षा और अनुशासन को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इसके प्रभावी कार्यान्वयन से ट्रेनों में यात्रा की सुविधा और सुरक्षा में निश्चित रूप से सुधार होगा।
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