
पटना। राजद और जदयू की पहली कतार के नेताओं के बीच भले ही संबंध सामान्य हों, लेकिन दूसरी कतार के कई नेता आपस में दो-दो हाथ कर रहे हैं।विधान परिषद में राजद के मुख्य सचेतक और बिस्कोमान के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह तो दोधारी तलवार भांज रहे हैं।राजद कोटे के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर और अपर मुख्य सचिव केके पाठक के बीच विवाद छिड़ा तो सुनील ने पाठक की तारीफ कर दी और शिक्षा मंत्री के बारे में कह दिया कि वे विभाग पर ध्यान देने के बदले रामचरितमानस बांच रहे हैं।
हालांकि, बाद में उन्होंने अधिसंख्य अधिकारियों की तुलना अंगुलिमाल और डाकू खड़ग सिंह से कर दी। सिंह ने फेसबुक पोस्ट पर अपने बारे में लिखा कि हमारी छवि भले ही ईमानदार की हो, मगर हमारे अधीनस्थ कई अधिकारियों की छवि अंगुलिमाल और खड़ग सिंह जैसी है।पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई सुनील सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी पर भी हमला किया।
उन्होंने चौधरी के बारे में कहा कि वे भाजपा की भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा- असल में अशोक चौधरी अपने लाभ के लिए दल बदलते रहते हैं। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि वे जल्द ही जदयू से अपना नाता तोड़ लेंगे।
सुनील सिंह यहां तक बोल गए कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नियंत्रण में अब सबकुछ नहीं है। जदयू के बड़े नेताओं ने सुनील सिंह की बात को संज्ञान में नहीं लिया है।लेकिन, जदयू के प्रवक्ता और नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. सुनील कुमार सिंह ने शनिवार को कहा- राजद का शीर्ष नेतृत्व अपने ऐसे नेताओं पर लगाम लगाए। हमारी पार्टी का सब्र का बांध टूट सकता है।
JDU प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- सब ठीक है
विवाद पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि महागठबंधन के घटक दलों के बीच सब ठीक है। कुछ लोग भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका महागठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।कांग्रेस प्रवक्ता असितनाथ तिवारी ने कहा कि आज की तारीख में पार्टी का कोई विधायक यह सोच भी नहीं सकता कि वह भविष्य में बड़ा नेता बन पाएगा।
चार-पांच नेताओं ने पार्टी पर इस तरह से कब्जा जमा लिया है कि अब किसी और को आगे बढ़ने का मौका ही नहीं मिल रहा है।

ऐसा लग रहा है कि भाजपा एक गिरोह बन गई है और गिरोह के अलग-अलग खेमे के सरगना एक-दूसरे को औकात बताते फिर रहे हैं।ऐसे में स्वाभिमान के साथ जीने वाले भाजपा के ज्यादातर विधायकों-नेताओं को वहां घुटन महसूस होने लगी है।अपनी प्रतिष्ठा से समझौता नहीं करने वाले विधायक और नेता खेमे के सरदारों की आपसी टकराव से परेशान हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि अब वह भाजपा को छोड़कर दूसरा विकल्प तलाशने लगे हैं। जल्दी ही भाजपा में बड़ी टूट संभावित है।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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