Brucellosis Vaccination: पशुओं को संक्रामक गर्भपात से बचाने के लिए डोर-टू-डोर हो रहा है टीकाकरण
शुरू हुआ ब्रुसेलोसिस टीकाकरण अभियान

पटना। बिहार सरकार पशुओं की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए उनके स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रख रही है। इसी कड़ी में पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा मादा पशुओं को ब्रुसेलोसिस रोग से बचाव के लिए 19 सितंबर से टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। राज्य में वर्ष 2016-17 से ही ब्रुसेलोसिस रोग से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा रहा है। सरकार के द्वारा आयोजित इस टीकाकरण कार्यक्रम से न सिर्फ पशु स्वास्थ्य में सुधार आया है बल्कि दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिला है।
19 सितंबर से ब्रुसेलोसिस रोग अर्थात संक्रामक गर्भपात से बचाव के लिए राज्य में 4 से 8 माह की पाड़ी एवं बाछी का निशुल्क टीकाकरण सुबह 8 बजे से संध्या 4 बजे तक पशु चिकित्सकों एवं टीकाकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर किया जा रहा है। यह टीकाकरण क्षेत्र के संबंधित जनप्रतिनिधि जैसे- जिला परिषद् सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य या वार्ड सदस्य की देख-रेख में हो रहा है।
सात तरह के रोगों से बचाव के लिए होता है टीकाकरण
बिहार में पिछले करीब 18 वर्षों से पशुओं को सात तरह के रोगों से बचाव के लिए नि:शुल्क टीके लगाए जा रहे हैं। इन टीकों के कारण पशुओं की असमय होने वाली मृत्यु में कमी आई है। इसका लाभ राज्य के किसानों और पशुपालकों को मिल रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में ही पशुओं को करीब 7 करोड़ टीके लगाए गए हैं। इन टीकों में एच. एस. एवं बी. क्यू.,एफ. एम. डी., एल. एस. डी., पी.पी.आर., ब्रुसेल्ला एवं क्लासिक स्वाईन फीवर शामिल हैं।
जानें क्या है ब्रुसेलोसिस रोग
पशुओं में ब्रुसेलोसिस (संक्रामक गर्भपात) एक जीवाणु संक्रमण है जो मुख्य रूप से मवेशी, सूअर, भेड़ और बकरियों को प्रभावित करता है। इस रोग में पशुओं को गर्भपात, बांझपन, कम दूध उत्पादन और प्रजनन विफलता जैसे गंभीर प्रजनन संबंधी समस्याएं होती हैं। यह ब्रुसेला (Brucella) जीवाणु के कारण होता है और संक्रमित जानवरों के भ्रूणों, प्लेसेंटा या स्रावों के सीधे संपर्क में आने या दूषित पशु उत्पादों, विशेषकर कच्चे दूध, के सेवन से फैलता है। यह मनुष्यों के लिए भी एक ज़ूनोटिक रोग है, जो संक्रमित जानवरों या उत्पादों से फैल सकता है।
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