सारण में मछलियों के मातृत्व काल की सुरक्षा के लिए प्रशासन सख्त, 15 अगस्त तक शिकारमाही पर रोक
10 हजार मछुआरों को मिलेगी राहत,नियम तोड़ा तो जेल और जुर्माना दोनों

छपरा। सारण जिले में मत्स्य संसाधनों के संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 15 अगस्त तक सभी नदियों, तालाबों, जलकरों एवं अन्य सार्वजनिक जलाशयों में मछली पकड़ने (शिकारमाही) पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। मानसून के दौरान मछलियों के प्रजनन काल को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि मत्स्य संपदा सुरक्षित रहे और भविष्य में मछली उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
जिला मत्स्य विभाग ने इस आदेश के प्रभावी अनुपालन के लिए सभी प्रखंड मत्स्य पदाधिकारियों, अंचल प्रशासन एवं संबंधित थाना प्रभारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान अवैध रूप से मछली पकड़ने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रजनन काल में संरक्षण पर विशेष जोर
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून का मौसम अधिकांश देशी मछलियों के प्रजनन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान नदियों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ने से मछलियां बड़ी संख्या में अंडे देती हैं। यदि इस अवधि में शिकारमाही जारी रहती है तो बड़ी मात्रा में मछलियां और उनके अंडे नष्ट हो जाते हैं, जिससे आने वाले वर्षों में मत्स्य उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
इसी कारण प्रत्येक वर्ष प्रजनन काल के दौरान मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाता है।
पूरे जिले में चलेगी निगरानी
जिला प्रशासन ने प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का निर्णय लिया है। सभी प्रखंडों में मत्स्य विभाग की टीमें नियमित निरीक्षण करेंगी, जबकि आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा।
विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध बिहार मत्स्य अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
उल्लंघन करने पर क्या होगी कार्रवाई?
प्रतिबंधित अवधि में मछली पकड़ते हुए पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर—
- छह माह तक का कारावास,
- 500 रुपये तक का जुर्माना,
- अथवा दोनों प्रकार की सजा का प्रावधान है।
मछुआरों को मिलेगी आर्थिक सहायता
सरकार ने प्रतिबंध अवधि में मछुआरा परिवारों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए विशेष सहायता योजना भी लागू की है।
‘लीन पीरियड’ के दौरान पंजीकृत मत्स्यजीवियों को केंद्र सरकार की योजना के तहत तीन माह के लिए प्रति तिमाही 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का लाभ विशेष रूप से गंगा नदी से जुड़े मछुआरा परिवारों को मिलेगा।
सारण जिले में लगभग 10 हजार से अधिक मत्स्यजीवी समिति के सदस्य इस योजना से लाभान्वित होने की संभावना है।
सारण में मजबूत है मत्स्य उत्पादन
जिला मत्स्य विभाग के अनुसार सारण जिले में करीब 2,000 तालाब एवं जलकरों में मत्स्य पालन किया जाता है। जिले में 5 मत्स्य हैचरी तथा 3 मत्स्य बीज प्रक्षेत्र भी संचालित हैं। इन सभी स्थानों पर भी प्रतिबंध अवधि के दौरान मछली पकड़ने पर रोक लागू रहेगी।
विभाग के अनुसार जिले में प्रतिवर्ष लगभग 19 हजार मीट्रिक टन मछली तथा करीब 250 लाख मत्स्य बीज का उत्पादन होता है। इस उत्पादन को और बढ़ाने के लिए प्रजनन काल में मछलियों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक माना गया है।
मत्स्य विभाग की अपील
जिला मत्स्य पदाधिकारी प्रदीप कुमार ने सभी मछुआरों एवं आम लोगों से अपील की है कि वे प्रतिबंध अवधि के दौरान मछली पकड़ने से परहेज करें और मत्स्य संसाधनों के संरक्षण में सहयोग दें। उन्होंने कहा कि यदि प्रजनन काल में मछलियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी तो भविष्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा, जिससे मछुआरा परिवारों की आय भी बढ़ेगी और जिले की मत्स्य अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
एक नजर में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| प्रतिबंध अवधि | 15 अगस्त 2026 तक |
| प्रतिबंधित क्षेत्र | सभी नदियां, तालाब, जलकर एवं सार्वजनिक जलाशय |
| उद्देश्य | मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन एवं संरक्षण को बढ़ावा देना |
| आर्थिक सहायता | पंजीकृत मत्स्यजीवियों को 3 माह के लिए ₹3,000 |
| संभावित लाभार्थी | 10,000 से अधिक मत्स्यजीवी परिवार |
| वार्षिक मछली उत्पादन | लगभग 19,000 मीट्रिक टन |
| मत्स्य बीज उत्पादन | लगभग 250 लाख |
| उल्लंघन पर सजा | 6 माह तक की जेल, ₹500 तक जुर्माना अथवा दोनों |
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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