फसलों का अवशेष जलाने पर नहीं मिलेगा योजनाओं का लाभ: डीएम

फसल अवशेष प्रबंधन हेतु जिला स्तरीय अंतर्विभागीय कार्य समूह की बैठक
छपरा : खेतों में फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण के नुकसान के साथ साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कम होती है। राज्य सरकार द्वारा फसल अवषेश प्रबंधन हेतु विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों- स्ट्रॉ बेलर, हैप्पी सीडर, जीरो टिल सीड कम फ़र्टिलाइज़र ड्रिल, रीपर-बाइंडर , स्ट्रॉ रीपर, रोटरी मल्चर आदि पर अनुदान दिया जाता है। सारण समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सोमवार को फसल अवशेष हेतु जिला स्तरीय अंतर्विभागीय कार्य समूह की बैठक आहुत की गई। जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि विभागीय प्रावधान के अनुसार जिला में किसी भी कंबाइन हार्वेस्टर के संचालन हेतु प्राप्त आवेदन के आधार पर जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा पास निर्गत किया जायेगा। बगैर वैध पास के हार्वेस्टर का संचालन अवैध होगा।
खेतों में फसल अवशेष जलाने वाले किसानों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है। ऐसे किसानों को डीबीटी पोर्टल पर तीन वर्षों के लिये ब्लॉक कर दिया जाता है। इस अवधि में वे कृषि विभाग के किसी भी योजना का लाभ लेने से वंचित रहेंगे। फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग एवं आत्मा के माध्यम से किसानों को निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसान चौपाल के माध्यम से उन्हें लगातार जागरूक किया जा रहा है।
अन्य विभागों के सहयोग से भी जागरूकता लाने की आवश्यकता है। शिक्षा विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, सहकारिता विभाग, पंचायती राज विभाग एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से भी किसानों को इस संबंध में जागरूक किये जाने की आवश्यकता है। सभी संबंधित विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने का निदेश दिया गया। बैठक में उपविकास आयुक्त, जिला कृषि पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
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