समय पर पर्याप्त इलाज नहीं होने से कुपोषित बच्चों के मृत्यु की होती है संभावना

• कुपोषित बच्चों की पहचान करना आगनबाड़ी सेविकाओं की जिम्मेदारी
• एनआरसी में भेजने के लिए नि:शुल्क 102 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध
• उम्र के साथ वजन, लंबाई और ऊँचाई के आधार पर चिन्हित किया जाता है कुपोषित बच्चें
छपरा। जिले समय के साथ बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास नहीं होने पर उन्हें कुपोषित बच्चों की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे बच्चों की शुरुआत में ही पहचान करते हुए चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए आईसीडीएस विभाग तत्पर रहता है। कुपोषित बच्चें के इलाज के छपरा सदर अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित है। पिछले कुछ महिनों से पोषण पुनर्वास केंद्र में लक्ष्य के अनुरूप में बच्चें नहीं आ रहें है। जिसको गंभीरता से लेते आईसीडीएस के डीपीओ कुमारी अनुपमा ने पत्र जारी कर सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को आदेश दिया है कि आंगनबाड़ी सेविकाओं के द्वारा अति गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान कर 102 निशुल्क एंबुलेंस सेवा के माध्यम से पोषण पुनर्वास केंद्र में रेफर कराना सुनिश्चित करें।
कुपोषित बच्चों की पहचान कर एनआरसी सेंटर में भर्ती कराना आगनबाड़ी सेविकाओं का कर्तव्य है। आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा नवजात शिशुओं का जन्म के साथ वजन, लंबाई व ऊंचाई के आधार पर उनके पोषण स्थिति की पहचान की जाती है। ऐसे कुपोषित बच्चे जिन्हें केवल शारीरिक कमजोरी है लेकिन चिकित्सकीय समस्या नहीं है उनका इलाज समुदाय स्तर पर संचालित टीकाकरण केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र द्वारा पोषण और चिकित्सकीय सहायता देकर किया जाता है। लेकिन ऐसे बच्चे जिन्हें शारीरिक कमजोरी के साथ मानसिक कमजोरी और निर्बलता है उसे अतिकुपोषित की श्रेणी में रखते हुए बेहतर इलाज के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र भेजते हुए उसे चिकित्सक द्वारा देखरेख कर इलाज कराया जाता है। ऐसे बच्चों को चिह्नित करते हुए उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं को आवश्यक निर्देश दिया गया है जिससे कि समय से ऐसे बच्चों की पहचान कर उनका इलाज किया जा सके और उन्हें सुपोषित बनाया जा सके।
अति गंभीर कुपोषित बच्चों में मौत का खतरा नौ गुणा अधिक:
डीपीओ कुमारी अनुपमा ने बताया कि सामान्य बच्चों की तुलना में गंभीर अतिकुपोषित बच्चों की मृत्यु का खतरा नौ गुना अधिक होता है। 100 में 80-85 प्रतिशत ऐसे कुपोषित बच्चे पाए जाते हैं जिनका चिकित्सकीय सहायता समुदाय स्तर पर किया जा सकता है। 10-15 प्रतिशत बच्चों को ही पोषण पुनर्वास केंद्र भेजने की जरूरत होती है। ऐसे बच्चों की समय से पहचान कर उनका इलाज करने से कुपोषण के कारण होने वाले बच्चों की मृत्यु को खत्म किया जा सकता है।
भर्ती बच्चों के माँ दिया जाता है दैनिक भत्ता:
एनआरसी इंचार्ज पुष्पा कुमारी ने बताया कि एनआरसी में अतिकुपोषित बच्चे को 21 दिनों के लिए रखा जाता है। डाक्टर की सलाह के मुताबिक ही डाइट दी जाती है। अगर यहां रखा गया कोई बच्चा 21 दिन में कुपोषण से मुक्त नहीं हो पाता है तो वैसे बच्चों को एक माह तक भी यहां रखा जाता है। बच्चों की देखभाल के लिए यहां स्टाफनर्स, केयरटेकर व कुक भी उपलब्ध रहते हैं।उन्होंने बताया यहां पर जीरो से 5 साल तक के बच्चों का 15 फीसद वजन बढऩे तक इलाज किया जाता है। बच्चे के साथ एनआरसी में रह रहे परिजनों को दैनिक भत्ते के रूप में प्रतिदिन 100 रूपये दिए जाते हैं। साथ ही दोनों टाइम का खाना भी मिलता है। इलाज के बाद पुन: फालोअप के लिए भी बुलाया जाता है।
पोषण पुनर्वास केंद्र पर दी जाने वाली सेवाएं :
• बच्चों के खेलने की सभी सुविधाएं
• अक्षर ज्ञान का बोध कराना
• बच्चों के देखभाल और खाना खिलाना
• आवश्कतानुसार दवा और पौष्टिक आहार
• साथ रहने वाली माँ को रहने खाने के साथ प्रतिदिन 100 रूपये प्रोत्साहन राशि
• आशा कार्यकर्ताओ को प्रोत्साहन राशि
• रेफर किए गए बच्चों की पुन:जांच कर (सैम) अति-कुपोषित की पहचान करना
• भर्ती किए गए कुपोषित बच्चों की 24 घंटे उचित देखभाल करना
• सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमियों में सुधार हेतु पूरक खुराक देना
• भर्ती कुपोषित बच्चों व उनके माताओं को निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन देना तथा इसके लिये अभिभावक से कोई शुल्क नहीं लेना
• मां एवं देखभाल करने वाले को उचित खान-पान, साफ-सफाई के विषय पर परामर्श देना
• पोषण पुनर्वास केंद्र में डिस्चार्ज के बाद हर 15 दिन में 2 माह तक 4 बार फॉलोअप करना
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में जिला प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में संजीवनी समाचार डॉट कॉम में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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