
छपरा। राज्य में मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में लंबे समय से चुनौती बनी रही समस्याओं के बीच अब सकारात्मक बदलाव की तस्वीर उभरने लगी है। सरकारी प्रयासों, योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रियता के कारण राज्य में शिशु मृत्यु दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
क्या है आंकड़ा
सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (SRS) 2023 के ताजा आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक बिहार में शिशु मृत्यु दर घटकर 23 हो गई है, जो 2022 में 26 थी। यानी एक साल में दो अंकों की गिरावट दर्ज की गई है, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
दरअसल, शिशु मृत्यु दर उस संख्या को दर्शाती है, जिसमें प्रति 1000 जीवित जन्मों पर एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की मौत होती है। इस संवेदनशील सूचकांक में सुधार सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को दर्शाता है। यही वजह है कि सरकार इस दिशा में मिशन मोड में काम कर रही है और अब उसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं।
अगर व्यापक तस्वीर देखें तो सिर्फ शिशु मृत्यु दर ही नहीं, बल्कि मातृ और नवजात स्वास्थ्य से जुड़े अन्य संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया है। SRS 2023 के अनुसार राज्य का मातृ मृत्यु अनुपात घटकर 104 पर पहुंच गया है। वहीं नवजात शिशु मृत्यु दर 18 और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 27 दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, सामान्य मृत्यु दर भी 2022 के 6.4 से घटकर 2023 में 6.1 हो गई है। यह संकेत देता है कि स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है।
सदर अस्पताल का एसएनसीयू और सोनपुर एनबीएसयू बना जीवन रक्षक
सारण जिले की बात करें तो यहां भी स्वास्थ्य विभाग की कोशिशें जमीनी स्तर पर दिख रही हैं। सदर अस्पताल के एमसीएच विंग में संचालित एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। यहां अत्याधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित चिकित्सकों की मदद से गंभीर रूप से बीमार नवजातों का इलाज किया जा रहा है। वहीं सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल में एनबीएसयू (न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट) की व्यवस्था है, जहां रेडिएंट वार्मर, सक्शन मशीन और फोटोथेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन इकाइयों की मदद से नवजातों को शुरुआती स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल रहा है, जिससे उनकी जान बचाने में मदद मिल रही है।
एचबीएनसी कार्यक्रम की भूमिका अहम
स्वास्थ्य विभाग का फोकस सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि घर-घर तक सेवाएं पहुंचाने पर भी है। इसी कड़ी में गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल कार्यक्रम (HBNC) अहम भूमिका निभा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत आशा कार्यकर्ता नवजात के जन्म के बाद 42 दिनों तक लगातार घर जाकर उसकी निगरानी करती हैं। वे यह सुनिश्चित करती हैं कि बच्चा सही तरीके से दूध पी रहा है या नहीं, उसका वजन ठीक है या नहीं और उसे कोई संक्रमण तो नहीं है। किसी भी तरह की समस्या नजर आने पर तुरंत उसे स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जाता है।
गांवों में यह व्यवस्था खासतौर पर कारगर साबित हो रही है, जहां पहले जागरूकता और संसाधनों की कमी के कारण कई नवजात समय पर इलाज नहीं मिल पाने से दम तोड़ देते थे। अब आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता से स्थिति बदल रही है। संस्थागत प्रसव हो या घर पर प्रसव, दोनों ही स्थितियों में आशा कार्यकर्ता नियमित अंतराल पर घर जाकर बच्चे और मां दोनों की देखभाल करती हैं।
अगर कोई भी खतरे का संकेत मिलता है तो तुरंत करते हैं अस्पताल रेफर
इस पूरी प्रक्रिया में आशा कार्यकर्ता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरी है। रिविलगंज की आशा कार्यकर्ता मीरा देवी बताती हैं, हम लोग नवजात के जन्म के बाद तय समय पर घर-घर जाकर जांच करते हैं। बच्चे के शरीर का तापमान, सांस लेने की गति और दूध पीने की स्थिति पर नजर रखते हैं। अगर कोई भी खतरे का संकेत मिलता है तो तुरंत अस्पताल रेफर करते हैं। पहले लोग जागरूक नहीं थे, लेकिन अब स्थिति काफी बदल रही है।
जीवन के पहले 28 दिन सबसे ज्यादा संवेदनशील
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो नवजात के जीवन के पहले 28 दिन सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसी दौरान अधिकतर मौतें होती हैं, जिन्हें समय पर इलाज और देखभाल से रोका जा सकता है। छपरा सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप कुमार यादव कहते हैं, नवजात मृत्यु के प्रमुख कारणों में समय से पहले जन्म, कम वजन, संक्रमण और निमोनिया शामिल हैं। अगर गर्भावस्था के दौरान सही पोषण और नियमित जांच हो, तो इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही जन्म के बाद स्तनपान और टीकाकरण बेहद जरूरी है।
साइंस जर्नल लांसेट की रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है कि समय पूर्व जन्म और कम वजन नवजात मृत्यु के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा निमोनिया, डायरिया और संक्रमण भी बड़ी वजह हैं। ऐसे में शुरुआती स्तर पर इन लक्षणों की पहचान और तुरंत इलाज बेहद जरूरी हो जाता है। यही काम अब आशा कार्यकर्ता और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है।
मातृ मृत्यु की सूचना देने वाले व्यक्ति को 1000 रुपये
सरकार ने इस दिशा में जवाबदेही तय करने के लिए सुमन कार्यक्रम भी लागू किया है। इसके तहत मातृ मृत्यु की सूचना देने वाले व्यक्ति को 1000 रुपये और समय पर सूचना देने वाली आशा कार्यकर्ता को 200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी मातृ मृत्यु छिपी न रहे और हर मामले की सही तरीके से जांच हो सके। इससे न सिर्फ आंकड़ों की पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने में भी मदद मिल रही है।
बदल रही है स्वास्थ्य सेवाओं की नकारात्मक छवि
हेल्थ एक्सपर्ट मानते हैं कि बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जो नकारात्मक छवि पहले बनी हुई थी, वह अब धीरे-धीरे बदल रही है। छपरा मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. सीपी जयसवाल बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन और जागरूकता तीनों स्तरों पर काम किया है। इसका असर अब आंकड़ों में दिख रहा है। अगर यही गति बनी रही, तो आने वाले समय में बिहार देश के बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।
चुनौतियां अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं:
हालांकि चुनौतियां अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ जगहों पर अभी भी संसाधनों की कमी और जागरूकता का अभाव है। लेकिन जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग और फ्रंटलाइन वर्कर्स मिलकर काम कर रहे हैं, उससे उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले वर्षों में स्थिति और बेहतर होगी।
बिहार में शिशु और मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहा यह बदलाव एक सकारात्मक संकेत है। यह न सिर्फ सरकारी नीतियों की सफलता को दर्शाता है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम कर रहे हजारों स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत का भी नतीजा है। अगर इन प्रयासों को निरंतरता और मजबूती के साथ आगे बढ़ाया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब हर नवजात को सुरक्षित और स्वस्थ जीवन की शुरुआत मिल सकेगी।
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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