हर माह 2 लाख का जुर्माना नहीं भरने पर छपरा नगर निगम का बिल्डिंग होगा सील

छपरा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के मामले में एनजीटी के आदेश की अनुपालन के लिए छपरा व्यवहार न्यायालय में सुनवाई की गई। यह सुनवाई एडीजे 9 में की गई। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए रिटायर्ड विंग कमांडर एवं वेटरन फोरम के महासचिव डॉक्टर बीएनपी सिंह के द्वारा एनजीटी में याचिका दायर की गई थी। जिसमें एनजीटी ने 2020 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नहीं होने तक प्रति माह 2 लाख जुर्माना लगाने और नगर आयुक्त पर एडवर्ड्स रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके अनुपालन के लिए डिस्ट्रिक्ट कोर्ट को मामला भेज दिया।
नगर निगम के दफ्तर को सील करने के पक्ष पर पहल
कोर्ट में दोनों पक्षों से जवाब रखा गया। जिसमें नगर निगम के वकील और दूसरी तरफ वादी डॉक्टर बीएनपी सिंह द्वारा अपना-अपना पक्ष रखा गया । कोर्ट की सुनवाई में वादी द्वारा मांग की गई कि पिछले अप्रैल 2020 से अभी तक का 2 लाख प्रतिमाह फाइन ब्याज के साथ कोर्ट में जमा की जाए एवं जिम्मेदार अधिकारियों की सर्विस बुक में की जाए एवं नहीं जमा करने के एवज में नगर निगम के दफ्तर को सील कर दिया जाए। जिसमें जरूरी कार्यों जैसे कचरा प्रबंधन के कार्यों को जारी रखा जाए ताकि शहर का कचरा उठाने का कार्य अवरोध न हो इसके अलावा नगर निगम के वित्तीय संचालन पर नजर रखने के लिए एक पर्यवेक्षक कोर्ट द्वारा नियुक्त किया जाए।
15 दिन का माँगा गया समय
जिसके आलोक में विपक्षी नगर निगम के वकील द्वारा एक माह का वक्त मांगा गया। जिसे लेकर माननीय जज ने नाराजगी व्यक्त करते हुए एवं वादी के विरोध करने पर 15 दोनों का अंतिम समय नगर पालिका को दिया गया ।अंतिम समय दिया ।
कोर्ट परिसर में वेटरन फोरम के महासचिव एवं रिटायर्ड विंग कमांडर डॉक्टर बी एन पी सिंह, वह पूर्व सैनिक कल्याण संस्था के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, सचिव रमेश प्रसाद सिंह , एयर वेटरन अमृत प्रियदर्शी, वकील सियाराम सिंह एवं मोहम्मद सुल्तान इदरीसी उपस्थित थे।
शहरों की आबादी के अनुसार जुर्माना लगाया जाता है
कूड़े के निस्तारण तक और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्य संपूर्ण होने के प्रमाण पत्र उपस्थित किए जाने तक नगर निगम को ₹200000 प्रति माह जुर्माने की वसूली की जाए तथा संबंधित दोषी अधिकारियों जिलाधिकारी सहित नगर आयुक्त आदि की सेवा के रिपोर्ट में प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज की जानी चाहिए । ऐसा एनजीटी ने अपने आदेश संख्या 46/ 2021 में कहा है । एनजीटी ने रतलाम म्युनिसिपालिटी से संबंधित मामले में आदेशित किया है कि आबादी की श्रेणी के अनुसार नगर निगमों या महापालिकाओं से क्रमशः 10 लाख ,5 लाख और 2 लाख रुपए की जुर्माना की राशि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अधिनियम के प्रति उदासीनता के कारण वसूला जाना चाहिए । वादी डॉक्टर बीएनपी सिंह ने इस आदेश का हवाला देते हुए न्यायालय को सूचित किया की छपरा नगर निगम भूतलक्षी प्रभाव से 1.4 .2020 से प्रति माह 2 लाख जुर्माना वसूल किया जाए ।
नगर निगम छपरा 4.98 एकड़ जमीन खोज ली फिर टेंडर रद्द
ठोस अपशिष्ठ के प्रबंधन के लिए नगर निगम छपरा 4.98 एकड़ जमीन खोज ली है। यह जमीन गड़खा अंचल के कोठिया मौजा के धर्मबागी गांव के मिडिल स्कूल से 100 मीटर दूरी पर गाय घाट पुल के पास चिन्हित किया है। यह जमीन गैरमजरुआ है। सीओ,कनीय अभियंता और नगर निगम आयुक्त ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। प्रकाशित खबरों को आधार बनाते हुए वेटरन फोरम के राष्ट्रीय महासचिव विंग कमांडर डॉ. बीएनपी सिंह ने एनजीटी में याचिका दाखिल की थी। जिसमें एनजीटी ने नगर निगम पर आबादी के हिसाब से दो लाख प्रति माह जुर्माना लगाया था। उसके बाद डीएम व नगर आयुक्त ने आनन-फानन में कार्रवाई शुरु कर दी। फिलवक्त एनजीटी के अनुपालन याचिका छपरा व्यवहार न्यायालय में चल रहा है।
कहां अभी हो रही है चूक,कानून का हो रहा उल्लंघन
जमीन अधिग्रहण नियमावली का उल्लंघन पहले भी हो चुका है। अभी भी इसके लिए एक ही जगह पर 10 एकड़ की प्लाट में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्लांट लगाने है। जो कि दो हिस्सों में किया जा रहा है। अभी एक ही प्लाट चिन्हित हुआ है। इसमें नदी से 100 मीटर,तालाब से 200 मीटर,हाइवे से भी दो सौ मीटर,एयर पोर्ट से 20 किलाेमीटर की दूरी अनिवार्य है। सबसे बड़ी बात है कि आबादी से दो सौ मीटर की दूरी जरुरी है। इसके साथ ही 25 साल के लिए ही यह प्लांट लगाये जाना है। इसके एक किलोमीटर के दायरे में आबादी पर प्रभाव पड़ता है। साथ ही जलस्तर को भी प्रभावित करता है।
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने 24 लाख का जुर्माना लगा चुका है
छपरा नगर निगम पर राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने 24 लाख का जुर्माना लगाया है। साथ ही नगर आयुक्त पर एडवर्स रिपोर्ट इंट्री करने का आदेश दे चुका है। जुर्माना की राशि बढ़ सकती है। कारण 2017 से कानून का उल्लंघन किया जा रहा है। उस हिसाब से करीब 46 लाख रुपये जुर्माना होगा। यह कार्रवाई एनजीटी के आदेश पर किया गया है। इस बावत प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अशोक घोष ने बताया कि जो शहर ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन कानून का उल्लंघन नहीं किया है जुर्माना लगाया गया है। विदित हो कि 2017 में एनजीटी में वेन्ट्रन फोरम के महासचिव डॉ. बीएनपी सिंह के दायर याचिका में फैसला दिया गया था। जिसमें ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन कानून 2016 के अनुपालन नहीं करने के सूरत में निर्धारित जुर्माना लगाने और संबंधित दोषी अधिकारी पर एडवर्स रिपोर्ट इंट्री का आदेश दिया था। एनजीटी ने जिला जज को तामिला कराने और अनुपालन कराने के लिए आदेशित किया था।
निगम पर आबादी के हिसाब से दो लाख जुर्माना वसूल की जायेगी
नगर निगम पर एनजीटी के आदेश पर ठोस अपशिष्ठ का प्रबंधन नहीं करने की सूरत में एक लाख प्रति माह का जुर्माना लगाये जाना है। पांच लाख से कम आबादी वाले शहर पर प्रति माह एक लाख जुर्माना है और पुराना कूड़ा डंप होने की सूरत में एक लाख प्रति माह जुर्माना लगाये जाना है। यानि हर माह दो लाख नगर निगम को जुर्माना देना है। यहां बता दें कि वेट्रंस फोरम के याचिका पर एनजीटी ने छपरा सिविल जज को अनुपालन करने का आदेश दिया है। जिसमें निगम को हर माह एक लाख रुपये जुर्माना के तौर पर देने है।
ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन के लिए जमीन खरीदारी में फर्जीवाड़ा की हो चुकी है कोशिश
नगर निगम प्रशासन ने तीसरी बार कानून का उल्लघंन कर ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन के लिए जमीन खरीदारी के लिए टेंडर निकाला। जिस पर वेन्ट्रस फोरम आफ ट्रांसपरेेंसी इन इंडिया ने कड़ा ऐतराज जताया तो रोक दी गई । पहले भी नगर निगम ने यही गलती करते हुए ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन के लिए 10 एकड़ जमीन के लिए टेंडर निकाला था। जिसमें भू-माफियाओं ने फर्जी तरीके से टेंडर भी भर दिया। पौने दो करोड़ रुपये की राशि गबन होने से बचा ली गई। वेन्ट्रस फोरम के आपत्ति के बाद वह टेंडर रद्द कर दिया गया।
हकीकत: निगम नदी किनारे और बाइपास रोड किनारे फेंक रहा कूड़ा
अभी नगर निगम शहर से उठाव किये गये कूड़ा को सरयू नदी के किनारे या फिर बाइपास व एनएच के पास फेंक रहा है। वहां पर कूड़ा में आग भी लगा दी जा रही है। जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुलेयाम उल्लंघन है। उससे निकलने वाली जहरीली गैस घातक सिद्ध हो रही है।
शहर से हर दिन 200 टन कूड़ा पैदा होता है
शहर की आबादी करीब चार लाख है। एक मानक के अनुसार प्रति व्यक्ति आधा किलोग्राम कूड़ा पैदा किया जाता है। उस हिसाब से करीब दो सौ टन कूड़ा पैदा हो रहा है। उस कूड़ा को उठाव करने के बाद कोई प्रबंधन नहीं है। यानि उसका रिसाइकिलिंग नहीं है। लिहाजा कूड़ा रोड व शहर के बीचोबीच डीडीसी आवास के पीछे खाली बेतिया राज की जमीन में डंप किया जा रहा है। जिसका विरोध किया जा चुका है।
आंकड़ों में जानें
क्षेत्रफल-38.26वर्ग मी.
जनसंख्या-चार लाख
जनसंख्या/ वर्ग किमी-6523
गैर कृषि आधारित जनसंख्या-80 फीसदी
प्रति दिन कूड़ा निकलता है-200 टन
शहर में होल्डिंग-39 हजार
सफाई पर खर्च-96 लाख प्रति माह
सफाई मजदूर-358
ट्रैक्टर,ट्राली-18
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- वर्ष 2015 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय है। दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हिन्दुस्थान समाचार में सेवाएं दीं। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई मंचों से सम्मानित। वर्तमान में Publisher & Editor-in-Chief के रूप में निष्पक्ष और जनहितकारी डिजिटल पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय है।
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